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भारतीय सेना में शामिल हो रहा Vikram VT-21, लेह से राजस्थान तक दिखेगी इसकी बेजोड़ ताकत

विक्रम VT 21 प्रोजेक्ट में दो वेरिएंट शामिल हैं. पहला है व्हील्ड, जो टायरों पर चलता है और इसकी स्पीड भी अधिक है. साथ ही इसका मेंटेनेंस भी आसान होता है, और यह सड़कों के साथ-साथ शहरी इलाकों के लिए बेहतर है. दूसरा ट्रैक्ड वर्जन है जो टैंकों की तरह लगातार चलने वाले ट्रैक्स पर चलता है.

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29 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 12:15 PM IST)
indian army to get vikram vt21 infantry combat vehicle developed by tata bharat forge with drdo
टाटा, भारत फोर्ज ने DRDO के साथ मिलकर Vikram VT-21 को डेवलप किया है (PHOTO- X/ @ELMObrokenWings)
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इंडियन आर्मी की ताकत सिर्फ टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमानों से ही नहीं बढ़ती, बल्कि उन गाड़ियों से भी तय होती है. ये गाड़ियां हर मोर्चे पर सैनिकों और हथियारों को समय पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं. इसी कड़ी में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने अपने तरकश से एक नया तीर निकाला है. ये एक इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल है जिसे Vikram VT-21 नाम दिया गया है. विक्रम पहाड़ी रास्तों से लेकर रेगिस्तान और सीमावर्ती इलाकों तक, यह ट्रक हर चुनौती के लिए तैयार है. इसका मजबूत इंजन, भार उठाने की क्षमता और खतरनाक हथियार इसे भारतीय सेना के लिए एक अहम ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बनाते हैं. विक्रम, भारतीय सेना में पहले से इस्तेमाल हो रहे Sarath BMP-2 की जगह लेगा.

हर जगह ऑपरेट कर सकता है Vikram VT-21

विक्रम VT 21 प्रोजेक्ट में दो वेरिएंट शामिल हैं. पहला है व्हील्ड, जो टायरों पर चलता है और इसकी स्पीड भी अधिक है. साथ ही इसका मेंटेनेंस भी आसान होता है. यह सड़कों के साथ-साथ शहरी इलाकों के लिए बेहतर है. दूसरा ट्रैक्ड वर्जन है जो टैंकों की तरह लगातार चलने वाले ट्रैक्स पर चलता है. यह ऊबड़-खाबड़ या ऑफ-रोड वाले इलाकों में बेहतर परफॉर्मेंस देता है. इन प्लेटफॉर्म्स को DRDO के अधीन काम करने वाले व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) ने दो इंडस्ट्रियल पार्टनर्स, भारत फोर्ज लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर डेवलप किया है. अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया कि इस सिस्टम को तीन सालों की रिकॉर्ड टाइमलाइन में बनाकर तैयार किया गया है.

घातक फायरपावर

जंग के मैदान में हमले के लिए इसमें टरेट (Turret) का इस्तेमाल किया गया है. टरेट को ऐसे समझिए कि ये एक प्लेटफॉर्म होता है जिसपर गन, तोप या मिसाइल लॉन्चर को लगाया जा सकता है. ये पूरे 360 डिग्री घूमता है इसलिए ये हर दिशा में हमला कर सकता है. टरेट गाड़ी के ठीक ऊपर होता है. ये एक ऑटोमेटिक सिस्टम है जिसे बख्तरबंद गाड़ियों पर लगाया जाता है. 

इसमें एक 30 mm की मुख्य तोप, एक 7.62 mm की कोएक्सियल मशीन गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (ATGMs) लगी होती हैं. टरेट के अंदर कोई सैनिक नहीं बैठता; इसे गाड़ी के अंदर से ही ऑपरेट किया जाता है, ताकि सैनिकों की जान बचने की संभावना बढ़ सके और गाड़ी का बाहरी आकार (सिलुएट) छोटा रहे. विक्रम के टरेट में 3 हथियारों को लगाया गया है. इनमें-

  • 7.62mm PKT मशीन गन: इस गन को टैंकों पर लगाने के लिए ही डिजाइन किया गया था. ये क्लाश्निकोव की मशीन गन का टैंक वेरिएंट है. इसमें 7.62mm की गोली लगती है जो लगभग 1 हजार मीटर तक मार कर सकती है. विक्रम में इस गन को रिमोट कंट्रोल वाला बनाया गया है इसलिए सैनिक अंदर से ही इससे फायर कर सकता है. 
  • 'नाग' एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल: विक्रम को सबसे अधिक खतरा किसी से हो सकता है, तो वो दुश्मन के टैंक हैं. इसलिए DRDO ने इसे ‘नाग’ एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) से लैस किया है. नाग ऐसी मिसाइल है जो एक बार टारगेट लॉक करने के बाद उसे मारकर रहती है. इससे बचना लगभग नामुमकिन है. 
जबरदस्त पावर

साल 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच 88 घंटों तक युद्ध चला. अगर ये युद्ध बढ़ा होता तो निश्चित तौर पर ये ड्रोन्स तक सीमित नहीं रहता. ऐसी स्थिति में जमीनी युद्ध होता जिसमें Infantry Combat Vehicle का रोल काफी अहम होता. भविष्य की इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रख कर विक्रम को बनाया गया है. विक्रम में नाटो के स्टैंडर्ड के मुताबिक STANAG 4 और 5 की प्रोटेक्शन है जो इसे हेवी ड्यूटी बैलिस्टिक ब्लास्ट और हमले से बचाता है. इससे अंदर बैठा सैनिक सुरक्षित रहता है. साथ ही, इसमें 720hp का ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाला डीजल इंजन है जो इसे तेज चलने और मुश्किल रास्तों को पार करने में मदद करता है. इस व्हीकल की एक और खासियत है कि ये Amphibious है. यानी ये नदियों और पानी को आराम से पार कर जाता है. इसमें लगे हाइड्रो जेट और वाटर प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग कर ये आराम से पानी में ऑपरेट कर सकता है.

वीडियो: क्या ऑफ ड्यूटी आर्मी ऑफिसर को टोल टैक्स नहीं देना होता, नियम क्या कहता है?

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