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मेजर स्वाति ने साउथ सूडान में हजारों महिलाओं को कैसे 'महफूज' किया? UN ने बड़ा पुरस्कार दिया है

चार फाइनलिस्ट्स में सबसे ज्यादा वोट हासिल कर मेजर स्वाति ने ये प्राइज जीता है. भारतीय सेना में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) कोर की अफसर स्वाति के पिता आर. शांति कुमार ने कहा कि उन्हें बेटी पर गर्व है.

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Major Swathi Shanthakumar
मेजर स्वाति शांताकुमार को यूएन ने सम्मानित किया है (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
12 जनवरी 2026 (Published: 05:13 PM IST)
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साउथ सूडान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन (UNMISS) में तैनात भारतीय सेना की अफसर मेजर स्वाति शांति कुमार को 2025 का UN Secretary General Award मिला है. संयुक्त राष्ट्र के पीसकीपिंग ऑपरेशन्स (शांति अभियानों) के दौरान असाधारण योगदान के लिए ये पुरस्कार दिया जाता है. मेजर स्वाति को यह पुरस्कार उनके प्रोजेक्ट 'Equal Partners, Lasting Peace' के काम के लिए मिला है, जिसकी वजह से साउथ सूडान में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ी है. उन्होंने साउथ सूडान में तैनात भारतीय टीम का सही इस्तेमाल कर स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत जुड़ाव बनाया.

31 वर्षीय मेजर स्वाति के नेतृत्व में भारतीय टीम ने जल, थल और हवाई मार्गों से पेट्रोलिंग करके दूरदराज के इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की. इन पहलों से 5 हजार से ज्यादा महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बना और उन्हें अपने समुदाय में सजग रूप से भाग लेने का मौका मिला. अपने प्रोजेक्ट Equal Partners, Lasting Peace के जरिए मेजर स्वाति ने स्थानीय समुदायों में महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने के लिए असाधारण काम किए, जिसे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहचाना और अब उन्हें सम्मानित भी किया है. 

गुटेरेस ने पुरस्कार का ऐलान करते हुए कहा कि इस मिशन ने UNMISS में लैंगिक समावेशी दृष्टिकोण (Gender Inclusive Approach) को और मजबूत किया है. यह पुरस्कार उन सभी पहलों को मान्यता देता है जो लैंगिक समानता और संवेदनशीलता के साथ शांति स्थापना को बढ़ावा देती हैं. 

चार फाइनलिस्ट्स में सबसे ज्यादा वोट हासिल कर मेजर स्वाति ने ये प्राइज जीता है. भारतीय सेना में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) कोर की अफसर स्वाति के पिता आर. शांता कुमार ने कहा कि उन्हें बेटी पर गर्व है कि वह देश की सेवा कर रही है. लेकिन हर माता-पिता की तरह उन्हें भी अपनी बेटी की चिंता है. उसे बहुत मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. उन्होंने आगे कहा,

यह पुरस्कार उसकी मेहनत और अनुशासन का सम्मान है, जिससे हमें काफी खुशी और गर्व महसूस हुआ.

शांता कुमार ने बताया कि स्वाति ने बेंगलुरु में पढ़ाई की है और New Horizon College of Engineering से ग्रेजुएशन के बाद भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया.

कौन हैं मेजर स्वाति?

मेजर स्वाति तकरीबन 15 महीने से साउथ सूडान में हैं. उनके पिता शांता कुमार ने बताया कि अगले महीने वह भारत लौट सकती हैं. इसके बाद उन्हें सिकंदराबाद में तैनात किया जाएगा. शांता कुमार आईटीसी में काम करते थे. तीन साल पहले ही वह सर्विस से रिटायर हुए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि स्वाति उनके परिवार की पहली सदस्य हैं जो सेना में गईं. 

बेंगलुरु के लिंगराजापुरम की रहने वाली मेजर स्वाति ने सेंट चार्ल्स हाईस्कूल से स्कूली पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने क्राइस्ट कॉलेज से प्री-यूनिवर्सिटी (PU) किया और फिर न्यू होराइजन कॉलेज से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री पूरी की. उनकी मां राजमणि एक सरकारी स्कूल की रिटायर्ड हेडमिस्ट्रेस हैं. राजमणि बताती हैं,

“कैंपस सिलेक्शन के जरिए स्वाति का आईबीएम में चयन हुआ था. यहां उन्होंने एक साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में जाने का फैसला किया. हमें उनकी उपलब्धियों पर बहुत गर्व है. वह हमारी तीन बेटियों में सबसे बड़ी है. हमारी दूसरी बेटी धृति फ्रांस में मास्टर्स कर रही है और सबसे छोटी बेटी मैत्री रामैय्या कॉलेज से एमबीबीएस कर रही है.”

स्वाति ने एसएसबी परीक्षा पास कर ओटीए से ट्रेनिंग पूरी की और फिर भारतीय सेना के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) कोर में शामिल हो गईं. 

साउथ सूडान में उनकी टीम की सदस्य नीतू उनके बारे में कहती हैं कि वह अपनी भूमिका को बहुत अच्छी तरह निभाती हैं और पूरी टीम को सशक्त बनाए रखती हैं.

बता दें कि हिंसा से बुरी तरह प्रभावित दुनिया के सबसे नए देश दक्षिणी सूडान में महिलाओं की बदतर स्थिति को सुधारने के लिए यूएन की शांतिदूत टीमें तैनात हैं. इसी क्रम में भारतीय सैनिकों की भी वहां तैनाती की गई है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बल फिलहास संयुक्त राष्ट्र के कुल 14 शांति अभियानों में से 7 में शामिल हैं. इनमें लेबनान (यूएनआईएफआईएल), कांगो (एमओएनयूसी), सूडान (यूएनएमआईएसएस), गोलान हाइट्स (यूएनडीओएफ), आइवरी कोस्ट (मिनुस्टाह) और लाइबेरिया (यूएनएमआईएल) शामिल हैं.

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