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भूकंप से बेहाल वेनेजुएला के लिए भारत ने बढ़ाया हाथ, राहत सामग्री के साथ भेजे 2 विमान

Operation Amistad For Venezuela: भूकंप की वजह से वेनेजुएला में भारी तबाही हुई है. अब तक 235 मौतें हो चुकी हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इस बीच भारत ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है और राहत सामग्री के साथ 2 विमान रवाना किए हैं.

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26 जून 2026 (अपडेटेड: 26 जून 2026, 04:19 PM IST)
India sends aid to earthquake hit Venezuela in two C17 Globemaster aircraft depart with relief supplies from hindon airbase
भारत ने वेनेजुएला में मदद के लिए दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान भेजे हैं (PHOTO-IAF)
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वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही मच हुई है.अभी भी हजारों लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है. 26 जून को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट (भारतीय समयानुसार) तक 235 मौतों की पुष्टि हो चुकी है. कुछ सेकेंड के अंदर आए दो बेहद जोरदार भूकंपों ने भारी तबाही मचाई. पहला भूकंप 7.2 Magnitude का था. लेकिन उसके सिर्फ 39 सेकेंड बाद ही 7.5 Magnitude का दूसरा और उससे भी ज्यादा खतरनाक भूकंप आ गया. राजधानी ‘कराकास’ सहित कई इलाकों में इमारतें मलबे के ढेर में बदल गई हैं. इस बीच भारत ने वेनेजुएला के लिए मदद भेजी है. इंडियन एयरफोर्स के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों में 41 मेडिकल अफसरों की टीम वेनेजुएला रवाना हो गई है. इस ऑपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ (Operation Amistad) रखा गया है. अमिस्ताद, स्पैनिश भाषा का शब्द है जिसका मतलब ‘दोस्ती’ होता है.

स्पेशलाइज्ड मेडिकल टीम ‘60 Para Field Hospital’ रवाना

वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद इंडियन आर्मी ने प्रभावित इलाके में मानवीय राहत का कामों में मदद के लिए एक खास मेडिकल टीम भेजी है. ये इंडियन आर्मी की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल टीम है. आर्मी की '60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल' एक एलीट और तेजी से तैनात होने वाली मेडिकल यूनिट है. यह यूनिट हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकटों और आपदा राहत मिशनों के दौरान भारत की ओर से सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली मेडिकल टीम के तौर पर काम करने के लिए जानी जाती है.

60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की मेडिकल टीम 26 जून की दोपहर हिंडन एयरफोर्स स्टेशन, गाजियाबाद से रवाना हुई है. ये यूनिट इंडियन एयरफोर्स के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों से वेनेजुएला जा रही है. इस टीम में 9 मेडिकल ऑफिसर्स सहित कुल 41 लोग शामिल हैं. यह टीम भूकंप से प्रभावित लोगों को इमरजेंसी मेडिकल केयर, ट्रॉमा मैनेजमेंट, लाइफ सेविंग सर्जरी और दूसरी जरूरी हेल्थकेयर सेवाएं देने के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है.

para field hospital
मेडिकल सप्लाई लेकर वेनेजुएला रवाना होती 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की टीम (PHOTO-Indian Army)
6 टन की राहत सामग्री

पैरा फील्ड हॉस्पिटल की टीम अपने साथ लगभग छह टन मेडिकल सप्लाई और राहत सामग्री लेकर जा रही है. इसके अलावा, दो विमानों में से एक में भारत के 'आरोग्य मैत्री प्रोजेक्ट' के तहत एक BHISHM क्यूब (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री) भी ले जाया जा रहा है. BHISHM क्यूब एक अत्याधुनिक, स्वदेशी और तेजी से तैनात की जा सकने वाली मॉड्यूलर मेडिकल फैसिलिटी है. इसे आपदा जैसी स्थिति में तत्परता से काम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है.

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वेनेजुएला के लिए विमान में सप्लाई लोड करती आर्मी (PHOTO-Indian Army)

इसमें छोटे मेडिकल मॉड्यूल होते हैं, जिन्हें तेजी से जोड़कर एक पूरी तरह काम करने वाला फील्ड हॉस्पिटल बनाया जा सकता है. यानी ये एक तरह की कॉम्पैक्ट मेडिकल फैसिलिटी है जिसका साइज घटाकर, प्लेन के जरिए इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है. यह हॉस्पिटल 200 मरीजों को एडवांस्ड ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी, इंटेंसिव केयर सपोर्ट और जरूरी मेडिकल इलाज देने में सक्षम है. पोर्टेबल वेंटिलेटर, मॉनिटर, डायग्नोस्टिक एक्विपमेंट्स, सर्जिकल एक्विपमेंट्स, बिजली बनाने की व्यवस्था और ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम से लैस है. BHISHM क्यूब वो चीज है, जिसकी वजह से भारत के लिए किसी भी देश में तुरंत मदद भेजना आसान हो जाता है.

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C-17 ग्लोबमास्टर में एंबुलेंस लेकर जाते पैरा फील्ड हॉस्पिटल के ऑफिसर्स (PHOTO-Indian Army)
C-17 Globermaster - भारत का हेवीलिफ्टर

अमेरिका की कंपनी मैक्डॉनल डगलस/बोइंग द्वारा बनाया गया सी-17 ग्लोबमास्टर एक चार इंजन वाला, टी-टेल (T-Tail) के आकार का ट्रांसपोर्ट जहाज है जो मिलिट्री के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है. मैक्डॉनल डगलस के YC-15 ट्रांसपोर्ट विमान को सी-17 की पूर्वज माना जाता है.

सी-17 ग्लोबमास्टर को फिलहाल भारत समेत 8 और देश इस्तेमाल कर रहे हैं. चूंकि ये एक ट्रांसपोर्ट या कार्गो विमान की श्रेणी में आता है, इसलिए इस विमान की सबसे बड़ी खूबी है इसकी भार उठाने की क्षमता. सी-17 ग्लोबमास्टर 74,797 किलोग्राम),माने लगभग 12 व्यस्क हाथियों के बराबर वजन उठाने में सक्षम है. अगर कोई पेलोड न हो तो ये विमान 6 हजार 230 नॉटिकल मील यानी 11 हजार 537 किलोमीटर की उड़ान बिना रिफ्यूलिंग के भर सकता है.

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सप्लाई लेकर जाता एयरफोर्स का सी-17 ग्लोबमास्टर (PHOTO-Indian Air Force)

साथ ही सी-17 ग्लोबमास्टर में हवा में ईंधन भरने की भी क्षमता है. ग्लोबमास्टर को टेक-ऑफ करने के लिए 7 हजार 740 फीट माने 2359.15 मीटर के रनवे की जरूरत होती है. वहीं लैंडिंग के लिए इसे 3 हजार फीट यानी 914 मीटर का एयरफील्ड चाहिए. इस विमान में दिन और रात, दोनों समय लैंड करने की सुविधा है. सी-17 ग्लोबमास्टर के विंग्सस्पैन से विंगलेट टिप (डैनों के अंत तक) की लंबाई 169.8 फीट, विमान की लंबाई 174 फीट है. इसमें Pratt and Whitney PW2040 के चार इंजन लगे हैं. हर इंजन 40 हजार 440 पाउंड का थ्रस्ट जेनरेट करता है जिससे भारी लोड के साथ भी ये विमान बड़ी आसानी से टेक-ऑफ करता है.

ग्लोबमास्टर को उड़ाने के लिए 2 पायलट्स की जरूरत पड़ती है. विमान में 2 फुल टाइम हेड-अप-डिस्प्ले लगे हैं जो उड़ान के दौरान पायलट को सारी जरूरी जानकारी देते रहते हैं. सी-17 में डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स नेविगेशन सिस्टम और कम्युनिकेशन सिस्टम ओपन आर्किटेक्चर (COSA) लगा है. इसे बेहतर नेविगेशन और बिना रुकावट के बेस से संपर्क बनाए रखने में मदद करता है.

Indian Air Force's Boeing-made C-17 Globemaster
सप्लाई ड्रॉप करता इंडियन एयरफोर्स का C-17 ग्लोबमास्टर (PHOTO-Indian Air Force)
पहले भी मदद के लिए पहुंच चुका है C-17 ग्लोबमास्टर

14 दिसंबर 2023 को सोमालिया के तट से करीब 600 नॉटिकल माल दूर एक समुद्री कार्गो जहाज़ को सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने बंधक बना लिया. इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर और सी-17 के कप्तान अक्षय सक्सेना को इंडियन नेवी के मार्कोस कमांडोज़ को सोमालिया के तट पर पहुंचाने का काम सौंपा गया. उन्होंने विमान के सारे एमिटर बंद कर के काफी कम ऊंचाई पर लगातार 10 घंटे की उड़ान भरी. उन्होंने सफलतापूर्वक इंडियन नेवी के मार्कोस कमांडोज़ को सटीक जगह पर रबर बोट्स में पैरा ड्रॉप किया. इसके बाद मार्कोस ने MV Ruen जहाज़ के 17 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू किया था. सोमालिया में अंजाम दिए गए इस मिशन के लिए उन्हें वायुसेना मेडल से सम्मानित किया गया.  इसके अलावा भी कई मिशन में C-17 ने भारत के लोगों की जान बचाई, मसलन

  • सितंबर 2024 में भारत ने लाओस, विएतनाम और कंबोडिया में Yagi तूफान के बाद आई बाढ़ के बाद वहां के लोगों के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर से वाटर प्यूरीफायर, कंबल, बर्तन, जेनरेटर्स, स्लीपिंग बैग्स और मच्छरदानी जैसी राहत सामग्री भेजी.
  • इंडियन एयरफोर्स के सी-17 ने मई 2023 में युद्धग्रस्त सूडान से 192 लोगों को रेस्क्यू किया.
  • 6 फरवरी 2023 में तुर्किए में जबरदस्त भूकंप आया. इस भूकंप ने तुर्किए से सीरिया तक भयंकर तबाही मचाई. 5 हजार से अधिक लोगों ने इस भूकंप में अपनी जान गंवा दी.  भारत ने इस आपदा में मदद करने के लिए चार सी-17 ग्लोबमास्टर में तुर्किए के लिए राहत सामग्री के अलावा 30 बेड का एक फील्ड हॉस्पिटल और 99 सदस्यों वाली राहत टीम को तुर्किए रवाना कर दिया.
  • नवंबर 2023 में उत्तराखंड के Silkyara Tunnel धंसने से टनल में 40 मजदूर फंस गए. इंडियन एयरफोर्स के सी-17 ने बचाव में काम आने वाले 22 टन के उपकरणों को इंदौर से देहरादून तक ट्रांसपोर्ट किया.
  • ऑपरेशन गंगा के तहत एयरफोर्स ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान वहां फंसे भारतीयों को निकालने के लिए 20 से अधिक उड़ानें भरीं. इस दौरान यूक्रेन के पड़ोसी देशों में लैंड कर वहां रह रहे भारतीयों को सुरक्षित घर वापस लाया गया.
  • अगस्त 2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान से निकलने के बाद पूरे देश मे ऊहापोह की स्थिति बन गई. इंडियन एयरफोर्स ने मोर्चा संभालते हुए सी-130 को काबुल के लिए रवाना किया. इस सी-130 ने 120 भारतीय डिप्लोमैट्स और अधिकारियों को सुरक्षित भारत पहुंचाया.
  • जुलाई 2016 में ऑपरेशन संकट मोचन के तहत भारत के विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) के नेतृत्व में 300 भारतीयों को एयरलिफ्ट किया था.

(यह भी पढ़ें: भूकंप से कांपा वेनेजुएला: चारों तरफ मलबे का ढेर और चीख-पुकार)

वीडियो: तुर्की ने UN में पाकिस्तान का साथ दिया, भारत ने ऑपरेशन दोस्त की याद दिला दोनों को सुना डाला

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