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Rafale से आसमान सुरक्षित, P8i से समुद्र पर नजर; DAC ने दी डबल डिफेंस डील को मंजूरी

एयरफोर्स के लिए ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रहे 'रफाल' की 114 यूनिट की खरीद को मंजूरी मिल गई है. वहीं नेवी के लिए सबमरीन हंटर कहे जाने वाले 6 'P8i' सर्विलांस विमान की खरीद को भी DAC ने हरी झंडी दिखा दी है. इस डिफेंस डील से भारत की एयर पावर और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, खासकर इंडियन ओशन रीजन में निगरानी क्षमता बढ़ेगी.

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india dac clears rafale deal for 114 fighter jets and p8i maritime patrol and reconnaissance aircraft
भारत ने 114 रफाल की खरीद को हरी झंडी दे दी है (PHOTO-X)
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मानस राज
12 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 02:44 PM IST)
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भारत की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने दो बड़ी रक्षा डील्स को मंजूरी दे दी है. एक डील इंडियन एयरफोर्स के लिए है, जबकि दूसरी नेवी के लिए. एयरफोर्स को ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले ‘रफाल’ के 114 फाइटर जेट मिल सकते हैं, वहीं नेवी के लिए सबमरीन हंटर कहे जाने वाले 6 ‘P-8I’ सर्विलांस विमान खरीदने पर भी हरी झंडी मिल गई है. आइए समझते हैं कि इन डील्स से भारतीय सेनाओं की ताकत कैसे बढ़ेगी.

Poseidon: समुद्र का देवता

इंडियन नेवी अपने आसपास के समुद्री क्षेत्र, यानी इंडियन ओशन रीजन (IOR), की निगरानी के लिए P-8I विमान का इस्तेमाल करती है. इस विमान को ‘Poseidon’ नाम दिया गया है, जो ग्रीक मिथकों में समुद्र के देवता माने जाते हैं. बोइंग द्वारा बनाया गया यह विमान समुद्री निगरानी के लिए नेवी के सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स में से एक है.
 

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हवा में गश्त लगाता इंडियन नेवी का P8i-Poseidon (PHOTO-X)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद DGMO की ब्रीफिंग में भी बताया गया था कि इस विमान ने पूरे संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी नौसैनिक ठिकानों की लगातार निगरानी की. P-8I, बोइंग के P-8 का भारतीय वेरिएंट है और मूल रूप से बोइंग 737-800 प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं. इसका मुख्य काम समुद्र में गश्त, निगरानी और पानी की गहराई में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना है. क्या है इस विमान के फीचर्स, उन पर भी नजर डाल लेते हैं.

  • लंबाई: 37.64 मीटर 
  • ऊंचाई: 12.83 मीटर 
  • विंगस्पैन: 37.64 मीटर
  • क्रू: 9 
  • इंजन: CFM-56-7BE मॉडल के 2 इंजन. हर इंजन 121.4 किलोन्यूटन का थ्रस्ट पैदा करते हैं. 
  • अधिकतम स्पीड: 907 किलोमीटर प्रति घंटा 
  • मैक्सिमम टेक-ऑफ वजन की क्षमता: 85,820 किलोग्राम 
  • रेंज: फुल टैंक पर 2,225 किलोमीटर से अधिक की रेंज

यह भले ही निगरानी विमान हो, लेकिन इसकी खास तकनीक इसे अलग बनाती है. इसमें ‘A-Size Sonobuoys’ नाम का सेंसर सिस्टम लगाया जा सकता है, जिनकी संख्या 129 तक हो सकती है. इन्हें विमान से समुद्र में गिराया जाता है, जहां ये तैरते हुए पनडुब्बियों या जहाजों की गतिविधियों का पता लगाते रहते हैं और विमान से संपर्क बनाए रखते हैं. इस तरह हवा और पानी दोनों में निगरानी का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो जाता है.

How do aircraft detect submarines? | by Naval Post | Medium
विमान से Sonobuoys ड्रॉप करता P8i (PHOTO-X)
रफाल: ऑपरेशन सिंदूर का हीरो

इस समय इंडियन एयरफोर्स मात्र 29 स्क्वाड्रंस के साथ ऑपरेट कर रही है. एक स्क्वाड्रन में 18-20 विमान होते हैं. भारत के साइज और सीमाओं को देखते हुए 42 स्क्वाड्रन स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति इससे बहुत उलट है. और भारत के पड़ोसी पाकिस्तान-चीन की आदत को देखते हुए ये और भी जरूरी है कि भारत की एयरफोर्स के पास विमानों की कमी न हो.

ऐसे में इंडियन एयरफोर्स के लिए इन 114 रफाल विमानों की डील काफी मायने रखती है. क्योंकि भारत का स्वदेशी विमान LCA तेजस उस रफ्तार से डिलीवर नहीं हो पा रहा है, जिसकी जरूरत है. AMCA के आने में कम से कम 7-9 साल लग सकते हैं. इसलिए फ्रांस से रफाल की डील एयरफोर्स के लिए बेहद अहम हो जाती है. अगर यह डील मंजूर हो जाती है, तो यह भारत की सबसे बड़ी फाइटर एयरक्राफ्ट डील में से एक होगी. इसकी अनुमानित कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये हो सकती है.

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इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में मौजूद रफाल के फीचर्स (Source-Dassault Aviation)

Rafale को फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation ने बनाया है. ये एक डबल इंजन वाला 4.5 जेनरेशन का विमान है. Rafale को सबसे पहले 2006 में फ्रांस ने अपनी वायुसेना में शामिल किया था. तब से अब तक Rafale ने नाटो सेनाओं के साथ अपनी काबिलियत साबित की है. Rafale का रडार 100 किलोमीटर के दायरे में 40 टारगेट्स को ढूंढ सकता है. बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल्स से लैस होने के कारण ये 150 किलोमीटर की दूरी से ये दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकता है. वहीं, Rafale में 9G तक की प्रोटेक्शन मिलता है जिससे मैनुवरिंग करने के दौरान भी विमान स्टेबल रहता है.

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Rafale फाइटर जेट (PHOTO-Indian Air Force)
ये 4.5 जेनरेशन का क्या मतलब है

4.5 जेनरेशन फाइटर जेट का मतलब है ऐसे लड़ाकू विमान जो चौथी और पांचवीं पीढ़ी की तकनीकों का मिश्रण होते हैं. इनमें एडवांस रडार, बेहतर मैनुवरिंग, लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम होते हैं, लेकिन ये पूरी तरह स्टेल्थ नहीं होते जैसे 5th जेनरेशन जेट (F-35 या F-22).

रफाल, यूरोफाइटर टाइफून और Su-35 जैसे जेट्स को 4.5 जेनरेशन कहा जाता है क्योंकि इनमें AESA रडार, बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल, डेटा फ्यूजन और कुछ हद तक कम रडार सिग्नेचर जैसी खूबियां हैं. यानी ये पुराने 4th जेनरेशन जेट्स से ज्यादा स्मार्ट और घातक हैं, मगर 5th जेनरेशन की पूरी स्टेल्थ क्षमता तक नहीं पहुंचते.

क्यों अहम है ये डील?

फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले रफाल को मंजूरी, भारत-फ्रांस के बीच फाइटर जेट्स, इंजन, एवियोनिक्स, हथियारों के इंटीग्रेशन और भविष्य के जॉइंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में गहरे सहयोग की नींव है. ये मंजूरी फ्रांस में भारत के स्ट्रेटेजिक भरोसे को दिखाती है. इस डील से प्रेसिडेंट मैक्रों के भारत के साथ जुड़ाव और डिफेंस डिप्लोमेसी बातचीत के लिए एक पॉजिटिव माहौल तैयार होगा.

ये भी पढ़ें- AMCA के लिए DRDO ने जो 'मॉर्फिन विंग' तकनीक खोजी है, वो चीन- पाकिस्तान की हवा टाइट कर देगी

इंडिया टुडे के मुताबिक प्लान में 114 राफेल जेट खरीदने की बात है, जिसमें से 18 विमान फ्लाई-अवे यानी तैयार कंडीशन में खरीदे जाएंगे. जबकि बाकी विमान भारत में बनाए जाएंगे. लगभग 80 प्रतिशत विमान देश में ही बनाए जाएंगे, और मेक इन इंडिया के तहत विमानों में 60 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट होगा. प्रस्तावित कॉन्फिगरेशन के तहत 88 विमान सिंगल-सीट और 26 विमान ट्विन-सीट यानी डबल सीट वेरिएंट वाले होंगे. ट्विन-सीट विमानों का इस्तेमाल अधिकतर ट्रेनिंग में किया जाता है. उम्मीद है कि डसॉल्ट एविएशन विमानों को भारत में बनाने और असेंबली के लिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के साथ डील कर सकता है.

वीडियो: आधी रात तीनों सेनाओं ने ऐसे किया ऑपरेशन सिंदूर, रफाल के कमाल से दहला पाकिस्तान

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