दवाओं से ठीक नहीं होंगे भारत के लोग? 80% से ज्यादा भारतीयों में सुपरबग्स होने का दावा
अगर कोई शख्स बार-बार एंटीबायोटिक्स लेता है तो आगे चलकर हो सकता है उसका शरीर दवा देने पर पॉजिटिव रेस्पॉन्ड देना ही बंद कर दे. यानी बीमारी में कोई सुधार न हो. ऐसा इन्हीं मल्टीड्रग रेजिस्टेंट ऑर्गेनिज्म की वजह से होता है. गौरतलब है कि भारत में करोड़ों लोग अलग-अलग कारणों से बिना डॉक्टर की सलाह लिए एंटीबायोटिक्स लेते हैं.
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MDR के मरीज में पहली लाइन की दवाएं काम नहीं करती. उनके लिए हाई लेवल की दवाओं की जरूरत पड़ती है. (फोटो- Unsplash और PTI)
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