बीजिंग का प्लान धड़ाम, भारत बना रहा महा-हाईवे, नेपाल-भूटान को मिलेगा नया गेटवे, बांग्लादेश क्यों पिछड़ा?
BBIN Corridor Milestone: भारत ने चीन के CPEC की काट के तौरपर 1300 किलोमीटर लंबे महा-हाईवे प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है. ये मेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर सीधे चार देशों यानी भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश को आपस में जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है.

साउथ एशिया के नक्शे पर एक बहुत बड़ा खेला हो गया. भारत ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक लगाया है जिससे चीन के महात्वाकांक्षी CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के गुब्बारे की हवा निकलना तय माना जा रहा है. खबर आई है कि भारत करीब 1300 किलोमीटर लंबा हाईवे प्रोजेक्ट तैयार कर रहा. ये कोई आम सड़क नहीं, बल्कि एक ऐसा इंटरनेशनल कॉरिडोर है, जो सीधे चार देशों का व्यापरिक भविष्य आपस में जोड़ देगा.
हर तरफ बस इसी नए रूट की चर्चा हो रही है. डिफेंस एक्सपर्ट्स से लेकर इकोनॉमी के जानकारों तक, हर कोई हैरान कि भारत ने इतनी खामोशी से चीन के घेराव की इतनी तगड़ी स्क्रिप्ट कैसे लिख दी. आम आदमी भी सोच में डूबा है कि आखिर इस महापरियोजना से भारत को क्या मिलने वाला है और अचानक इसमें बांग्लादेश का क्या एंगल आ गया?
असल खेल जियो पॉलिटिक्स और कारोबार का है. चीन लंबे समय से हमारे पड़ोसियों को कर्ज के जाल में फंसाकर भारत को घेरने की फिराक में था. पर इस बार दिल्ली ने वो चाल चली कि बीजिंग का पूरा का पूरा प्लान ही धड़ाम होता लग रहा है. आसान भाषा में समझते हैं कि ये 1300 किलोमीटर लंबा हाईवे क्या है और ये कैसे पूरे साउथ एशिया का भूगोल बदलने जा रहा.
आखिर क्या है ये 1300 किमी का 'महा प्रोजेक्ट'?
पहले इस हाईवे का पूरा ढांचा समझिए. भारत सरकार साउथ एशिया के भीतर कनेक्टिविटी को एक नए लेवल पर ले जाने के लिए इस मेगा हाईवे पर काम कर रही है. ये कॉरिडोर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (नॉर्थ-ईस्ट) को केंद्र में रखकर डिजाइन किया गया है. 1300 किलोमीटर की ये सड़क सिर्फ गड्ढे भरने या चौड़ीकरण का काम नहीं, बल्कि एक हाई-स्पीड इकोनॉमिक एक्सप्रेसवे है.
पेंच असल में सीधा और अचूक व्यापारिक रूट तैयार करने का है. अब तक इस पूरे इलाके में माल ढुलाई के लिए टेढ़े-मेढ़े और संकरे रास्तों का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था. इस हाईवे के बनते ही गाड़ियों की रफ्तार तो बढ़ेगी ही, बॉर्डर पार व्यापार में लगने वाला समय भी आधा रह जाएगा.
वो चार देश, जिनकी किस्मत इस रूट से चमकेगी
इस पूरे कॉरिडोर की सबसे बड़ी ताकत हैं वो चार देश, जो इसके जरिए एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाएंगे. ये देश हैं- भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश. इसे इंटरनेशनल लेवल पर BBIN (Bangladesh, Bhutan, India, Nepal) कॉरिडोर के नाम से भी जाना जाता है.
सीधा गणित है भाई. नेपाल और भूटान चारों तरफ से जमीन से घिरे (Landlocked) देश हैं. उनके पास अपना कोई समंदर या बड़ा पोर्ट नहीं है. व्यापार के लिए वे पूरी तरह भारत के कोलकाता या अन्य पोर्ट्स पर निर्भर रहते हैं. इस 1300 किलोमीटर लंबे हाईवे के जरिए नेपाल और भूटान सीधे भारत के बेहतरीन रास्तों से जुड़ेंगे, जिससे उनका सामान सीधे इंटरनेशनल मार्केट तक कम लागत में पहुंच सकेगा. भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को भी इससे सीधे इंटरनेशनल ट्रेड का गेटवे मिल जाएगा.
फिर बांग्लादेश क्यों बजाएगा झुनझुना?
अब आते हैं सबसे दिलचस्प और चुभते हुए सवाल पर. जब इस प्रोजेक्ट का नाम BBIN है और बांग्लादेश भी इसका हिस्सा है, तो फिर वो झुनझुना क्यों बजाएगा? इसके पीछे बांग्लादेश की अपनी ही कुछ सियासी और रणनीतिक गलतियां हैं.
दरअसल, इस पूरे कॉरिडोर के तहत गाड़ियों को बिना रोक-टोक एक देश से दूसरे देश में जाने की इजाजत मिलनी थी (मोटर व्हीकल एग्रीमेंट). भारत, नेपाल और भूटान इस पर तेजी से आगे बढ़े. पर बांग्लादेश ने अपने घरेलू राजनीतिक दबाव और कुछ अंदरूनी हिचकिचाहट के चलते इस रूट को पूरी तरह एक्टिव करने में लेटी-लतीफी दिखाई. नतीजा क्या हुआ?
भारत ने रुके बिना अपने हिस्से का काम और नेपाल-भूटान के साथ कनेक्टिविटी को इतनी तेजी से बढ़ा दिया कि मुख्य व्यापारिक मलाई अब भारत, नेपाल और भूटान के खाते में जा रही. बांग्लादेश इस बड़े रूट का हिस्सा होकर भी अपनी सुस्ती के कारण इसके शुरुआती और बड़े फायदों से लगभग महरूम खड़ा है.
चीन के CPEC को कैसे मिला करारा जवाब?
तीसरी और सबसे बड़ी वजह है ड्रैगन को उसकी अपनी भाषा में घेरना. चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर फूंककर CPEC बनाया ताकि वो अरब सागर तक पहुंच सके और भारत पर दबाव बना सके. भारत ने पाकिस्तान के उस खूनी और विवादित रूट से उलझने के बजाय अपने पूर्वी मोर्चे को इतना मजबूत कर लिया.
चीन नेपाल और भूटान को भी पैसे का लालच देकर अपनी तरफ खींचने की कोशिश में था. पर भारत ने इस 1300 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के जरिए नेपाल और भूटान को साफ संदेश दे दिया कि असली तरक्की चीन के कर्ज से नहीं, बल्कि भारत की इस खुली सड़क से आएगी. ये हाईवे चीन के उस दबदबे को पूरी तरह मटियामेट कर देगा जो वो साउथ एशिया में बनाने का ख्वाब देख रहा था.
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लब्बोलुआब ये कि भारत का ये कदम सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि पूरे रीजन का बॉस बनने की तरफ एक बड़ा कदम है. जब ये रूट पूरी रफ्तार से चालू होगा, तो व्यापार के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट जाएंगे. चीन देखता रह जाएगा और अपना भारत अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर तरक्की की नई इबारत लिख देगा.
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