दुनिया केे 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 भारत में, भट्ठी की तरह तपने की वजह बड़ी है
भारत में गर्मी को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतने अधिक तापमान का इस तरह एक जगह जमा होना, बढ़ती अस्थिरता का संकेत है. अप्रैल का महीना जिस गर्मी के साथ आगे बढ़ रहा है, उसे देख कर लगता है कि आने वाले दिन और भी चुनौती से भरे हो सकते हैं.

अप्रैल का महीना चल रहा है और इसी के साथ लू और हीटवेव ने आधे से अधिक देश को अपनी चपेट में ले लिया है. सुबह के 8 बजते-बजते ऐसी धूप हो जा रही है कि बिना टोपी-गमझे के अधिक देर तक बाहर रहना, मतलब खुद को झुलसाना है. भारत इस समय ऐसे देशों में से एक है जहां दुनिया के सबसे गर्म शहर मौजूद हैं. 21 अप्रैल के डेटा के मुताबिक दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19, भारत में हैं. मौसम विभाग का कहना है कि 22 अप्रैल से 24 अप्रैल तक लगातार गर्मी में इजाफा होगा. इस दौरान अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक जाने की उम्मीद है. यानी ये थोड़ी-बहुत गर्मी नहीं, बल्कि हीटवेव की शुरुआत भर है.
इंडिया टु़डे की रिपोर्ट के मुताबिक जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाए, तो उसे हीटवेव कहते हैं. इस दौरान तेज चलने वाली हवाएं बहुत अधिक गर्म हो जाती हैं जिससे वो 'लू' का रूप ले लेती हैं. अगर इसकी चपेट में आए, तो तबियत खराब होना तय है.
भारत के शहर, भट्ठी की तरह गर्मदुनिया के जो 20 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट है, उसमें से 19 भारत में हैं. इस लिस्ट में बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के शहरों का नाम शामिल है. इन शहरों का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है. आम तौर पर भारत में मई के महीने में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है. लेकिन इस साल अप्रैल में ही कई जगहों पर पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. इनमें बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचेर और पश्चिम बंगाल का आसनसोल सबसे ऊपर है. इन सभी जगहों पर 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है

मौसम विज्ञानी कहते हैं कि अप्रैल में इस बढ़ती गर्मी के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण है सूरज की रोशनी का जमीन को गर्म करना. इसे सोलर हीटिंग कहा जाता है. इसकी वजह से धरती की सतह का तापमान बढ़ता जाता है. इस महीने आसमान भी साफ रहा है. ऐसे में सूरज की गर्मी बिना किसी रुकावट के धरती की सतह तक पहुंच रही है.
हीटवेव का दूसरा कारण कम बर्फ को बताया जा रहा है. पूरे हिमालय और यूरेशिया में इस बार बर्फ की चादर बहुत कम है. इस वजह से धरती तक पहुंचने वाली गर्मी वापस रिफ्लेक्ट नहीं हो पा रही. बर्फ की मोटी चादर आ रही गर्मी को वापस स्पेस में रिफ्लेक्ट कर देती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा. इसके अलावा समुद्र के पानी के तापमान में बदलाव से भी असर पड़ रहा है. इन सभी कारणों से उन नेचुरल सिस्टम्स में कमजोरी आई है जो आमतौर पर धरती को ठंडक पहुंचाती हैं.
हवाओं ने बिगाड़ा खेलभारत में बढ़ते तापमान का एक और कारण है मैदानी इलाकों में चलने वाली हवाएं. मैदानों में चलने वाली सूखी हवाओं के कारण स्थिति और भी खराब हो रही है. नॉर्थ-वेस्ट की दिशा में चल रही ये हवाएं बादलों के बनने की प्रक्रिया को रोककर बारिश की संभावना को कम कर देती हैं. दूसरी तरफ साउथ और नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के कुछ हिस्सों में नमी और तूफान भी देखने को मिल रहा हैं. इस तरह की सिचुएशन, पूरे देश के मौसम में आए भारी अंतर और अनिश्चितता को दिखाती हैं.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतने अधिक तापमान का इस तरह एक जगह जमा होना, बढ़ती अस्थिरता का संकेत है. अप्रैल का महीना जिस गर्मी के साथ आगे बढ़ रहा है, उसे देख कर लगता है कि आने वाले दिन और भी चुनौती से भरे हो सकते हैं. यानी इस बार जून तक मानसून नहीं आता, तबतक गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं है.
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