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सेना के जवान पर रेप का आरोप था, कोर्ट ने 'गलत संदेश जाएगा' कहकर केस रद्द क्यों किया?

हिमाचल हाई कोर्ट में 8 मई 2026 को इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप शर्मा की बेंच कर रही थी. आरोपी जवान ने भी अपने खिलाफ दर्ज हुई FIR और चल रहे मामले को खारिज करने की याचिका दायर की थी.

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14 मई 2026 (पब्लिश्ड: 08:15 PM IST)
Himachal Pradesh
रेप के आरोपी सेना के जवान खिलाफ दायर मामला रद्द. (फोटो- आज तक)
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सेना के एक जवान के खिलाफ चल रहे रेप के मामले को खारिज कर दिया. कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि पीड़िता कानूनी कार्रवाई की वजह से अपने ट्रॉमा (मानसिक तनाव) को और नहीं बढ़ाना चाहती है. ऐसी स्थिति में ‘पीड़िता की भलाई’ ज्यादा जरूरी है. हालांकि कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि रेप समाज के लिए जघन्य अपराध है. दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर ऐसे मामलों को खारिज नहीं किया जा सकता. ऐसा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा.

हिमाचल हाई कोर्ट में 8 मई 2026 को इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप शर्मा की बेंच कर रही थी. आरोपी जवान ने भी अपने खिलाफ दर्ज हुई FIR और चल रहे मामले को खारिज करने की याचिका दायर की थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस संदीप शर्मा ने सुनवाई करते हुए कहा, “महिला इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती. ऐसी स्थिति में जवान के दोषी ठहराए जाने की संभावना काफी कम हो गई है.” 

उन्होंने अपने आदेश में आगे कहा,

‘याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप समाज के खिलाफ हैं. समझौते के आधार पर FIR रद्द करने की अपील नहीं मानी जा सकती. हालांकि, इस मामले के अजीब तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए शिकायतकर्ता का हित सबसे ज्यादा जरूरी लगता है, जो घरेलू समस्याओं के कारण मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती. क्योंकि वह ट्रॉमा से भरा जीवन नहीं जीना चाहती.’

हाई कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है. महिला अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती. ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से FIR और उससे जुड़ी सभी कार्रवाईयों को रद्द करने की अपील स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं है, हालांकि इससे गलत संदेश जाएगा.

मामले पर एडिशनल अपर एडवोकेट राजन काहोलम और विशाल पंवार ने कोर्ट में दलीलें दी. उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रतिवादी (महिला) ने शपथ लेकर यह बयान दिया है कि उसने याचिकाकर्ता के साथ यह समझौता बिना किसी दबाव के किया है. दोनों ने कोर्ट को यह भी बताया कि महिला अपनी घरेलू समस्याओं की वजह से मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती. उसे सेना के जवान के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं है.

ये मामला साल 2022 का है. पीड़िता और सेना का जवान कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए थे. बाद में दोनों मिलने-जुलने लगे. महिला ने जवान पर आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2022 को आरोपी ने महिला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और इसके बहाने उसे एक होटल में ले गया. वहां, उसकी मर्जी के खिलाफ यौन उत्पीड़न किया. बाद में शादी की बात से मुकर गया.

बाद में महिला ने थाने में FIR दर्ज कराई. पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट भी दायर कर दी. लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने खुद ही इस विवाद को सुलझा लिया और आपस में समझौता कर लिया.

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