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हीरा गोल्ड पोंजी स्कैम: शरिया कानून के नाम पर महिला ने ठगे 6000 करोड़, विदेश तक था नेटवर्क

Heera Gold Ponzi Scam: इस घोटाले के मुख्य शिकार वे मुसलमान थे, जो शरिया कानून का पालन करते हैं. इस्लाम में ‘ब्याज’ कमाना या देना पूरी तरह से हराम (वर्जित) माना जाता है. नौहेरा शेख और उनके साथियों ने इसी बात का फायदा उठाया. लेकिन यह स्कैम शुरु कैसे हुआ?

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25 मई 2026 (अपडेटेड: 25 मई 2026, 10:38 AM IST)
Heera Gold Ponzi scam
नौहेरा शेख ‘हीरा गोल्ड एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड’ की मैनेजिंग डायरेक्टर (MG) हैं. (फोटो: सोशल मीडिया)
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देश के चर्चित ‘हीरा गोल्ड पोंजी स्कीम घोटाले’ में बड़ी कार्रवाई हुई है. इस घोटाले की मास्टरमाइंड हैदराबाद की रहने वाली एक महिला नौहेरा शेख थीं. उन्हें 21 मई को गुरुग्राम के एक होटल से गिरफ्तार किया गया. इस घोटाले के मुख्य शिकार वे मुसलमान थे, जो शरिया कानून का पालन करते हैं. इस्लाम में ‘ब्याज’ कमाना या देना पूरी तरह से हराम (वर्जित) माना जाता है. नौहेरा शेख और उनके साथियों ने इसी बात का फायदा उठाया.

नौहेरा शेख ‘हीरा गोल्ड एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड’ की मैनेजिंग डायरेक्टर (MG) हैं. हीरा गोल्ड जैसी कंपनियां खुद को 'इस्लामिक बिजनेस' या 'शरिया कानूनों के मुताबिक' बताती हैं. इन कंपनियों का कहना है कि वे इनवेस्टर्स का पैसा सोने के कारोबार, टेक्सटाइल और फूड बिजनेस में लगाती हैं. इस तरह वे ब्याज नहीं, बल्कि उस बिजनेस से होने वाला मुनाफा शेयर करती हैं.

कुछ इस तरह का ही दावा नौहेरा शेख और उनकी कंपनी ने किया. टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि उनका बिजनेस इतना मजबूत है कि वे हर साल इनवेस्टर्स के निवेश पर सालाना 36% तक का मुनाफा दे सकते हैं. इस तरह कुछ ही सालों में उन्होंने देश-विदेश के 1.72 लाख से ज्यादा मुस्लिम निवेशकों से 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा करा ली.

कैसे शुरु हुआ स्कैम?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2010 में नौहेरा शेख ने हैदराबाद से 'हीरा ग्रुप' नाम की कंपनी बनाकर काम शुरू किया. उन्होंने दावा किया कि वह बिना ब्याज के, पूरी तरह शरिया के नियमों के तहत बिजनेस से होने वाला मुनाफा (सालाना 36% तक) निवेशकों को देंगी. शुरुआती सालों में उन्होंने नए इनवेस्टर्स के पैसे लेकर पुराने इनवेस्टर्स को समय पर मुनाफे के नाम पर बांटे. इससे लोगों का विश्वास बढ़ गया और लोगों ने अपनी जीवनभर की पूंजी इसमें लगा दी.

ईडी की एंट्री

जून 2018 के बाद कंपनी ने मुनाफे की रकम देना बंद कर दिया. देशभर में निवेशकों ने पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं. अक्टूबर 2018 में हैदराबाद पुलिस ने पहली बार नौहेरा शेख को गिरफ्तार किया. इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल देखकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केस दर्ज किया. जांच में पता चला कि ठगे गए पैसों से देश-विदेश में कई संपत्तियां खरीदी गई थीं. ईडी ने करोड़ों की संपत्ति जब्त करना शुरू कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केस

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2021 में कोर्ट ने नौहेरा शेख को इस शर्त पर अंतरिम जमानत दी कि वे जांच में सहयोग करेंगी और निवेशकों के पैसे वापस लौटाने का इंतजाम करेगी. अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नौहेरा शेख निवेशकों का पैसा वापस नहीं लौटा रही है और जांच में सहयोग नहीं कर रही है. कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी.

हालांकि, जमानत रद्द करने का आदेश तब रोक दिया गया जब नौहेरा ने प्रभावित निवेशकों को इन्वेस्ट की गई रकम वापस करने के लिए तीन प्रॉपर्टी बेचने का ऑफर दिया. अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके लगातार असहयोग को देखते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया और उन्हें एक हफ्ते के अंदर कोर्ट या पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया.

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गुरुग्राम के होटल से हुई गिरफ्तारी

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट के आदेश दिए जाने के बाद नौहेरा एक महीने से ज्यादा समय से फरार थीं. बीते हफ्ते गुरुग्राम के एक होटल से उन्हें गिरफ्तार किया गया. इस महिला ने कई बार अदालतों और जांच एजेंसियों को भी चकमा दिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश की. यह कहते हुए कि उन्होंने हैदराबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन उन्होंने उन्हें हिरासत में लेने से मना कर दिया. उनकी मालिकाना हक वाली और उनके नियंत्रण वाली 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां जब्त कर ली गई हैं और उन्हें पीड़ितों को वापस लौटाने की प्रक्रिया चल रही है. 

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