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IDFC First Bank में जिन 170 अकाउंट्स के जरिए सरकारी पैसा निकाला गया, वो किन लोगों के हैं?

IDFC First Bank Fraud: घोटाला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी कर सभी विभाग, सरकारी संस्थानों, निगमों से कहा कि केवल सरकारी बैंकों में ही खाते रखें. प्राइवेट बैंकों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है. अब तक क्या पता चला?

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विभावरी दीक्षित
| शुभम कुमार
24 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 24 फ़रवरी 2026, 01:48 PM IST)
idfc bank fraud 590 crores
हरियाणा सरकार ने IDFC first बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया. (फोटो-ITG)
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IDFC First Bank पर आरोप लगा है कि उसने कथित तौर पर हरियाणा सरकार के अकाउंट्स से करीब 590 करोड़ रुपये गायब कर दिए हैं. बैंक स्टेटमेंट में दिख रहा है कि पैसे सरकार के अकाउंट से निकले हैं. लेकिन सरकारी फाइलों में ये निकला हुआ अमाउंट कहीं दर्ज नहीं है. मतलब पैसा निकला लेकिन आया नहीं. तो फिर गया कहां? 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में करीब 391 ट्रांज़ेक्शन को संदिग्ध पाया गया है. ये ट्रांज़ेक्शन्स 170 से ज़्यादा अकाउंट्स में हुए हैं. इन 391 ट्रांज़ेक्शन के साथ-साथ हरियाणा सरकार के कुछ विभाग, बैंक कर्मचारी और चार IAS ऑफिसर जांच के घेरे में हैं.

सरकार को इस गड़बड़ी का पता तब चला जब हरियाणा सरकार बैंक गई, उन्हें किसी विभाग का एक बैंक अकाउंट बंद करना था. पहले तो IDFC First Bank अपने लेवल पर इंटरनल जांच करती रही. लेकिन फिर 21 फरवरी 2026 को बैंक ने इस पूरे मामले की ऑफिशियल जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को दी. फिलहाल विकास एवं पंचायत विभाग, पंचकूला नगर निगम, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कुछ रियल एस्टेट कंपनियां जांच के घेरे में हैं. 

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि जिन बैंक अकाउंट्स को संदिग्ध पाया गया है, वो अकाउंट्स हरियाणा और चंडीगढ़ के बड़े बिजनेसमैन, रियल एस्टेट कंपनियों और रियल एस्टेट एजेंट्स के हैं. इन अकाउंट्स के करीब 70 करोड़ रुपयों को फ्रीज़ कर दिया गया है. बताया गया कि ये फ्रॉड कई महीनों से चल रहा है और दूसरे बैंक अकाउंट्स की जांच की जा रही है. 

पुलिस ने क्या बताया?

हरियाणा पुलिस ने IDFC First Bank के कुछ कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया. लेकिन इनमें से एक संदिग्ध गायब था. आशंका है कि उसने देश छोड़ दिया हो. रिपोर्ट बताती है कि अभी तक किसी अधिकारी के फ्रॉड में शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं. लेकिन संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी.

राजनीतिक बहस

590 करोड़ की गड़बड़ी का मुद्दा हरियाणा विधानसभा में भी उठाया गया. बजट सेशन के दौरान नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने इस केस को लेकर राज्य सरकार से सवाल किए. जवाब में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा,

राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो को मामले की जांच सौंपी गई है. FIR दर्ज है और SIT भी गठित कर दी गई है. कई सीनियर IAS अधिकारियों को टीम में रखा गया है. चाहे वो कोई बैंक अधिकारी हो, सरकारी कर्मचारी हो या कोई आम व्यक्ति, सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. 

दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. सरकार का एक-एक पैसा वसूल किया जाएगा. बैंकों को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए.

बता दें कि हरियाणा सरकार ने अपने सभी विभाग, बोर्ड, निगमों और दूसरी सरकारी संस्थाओं को निर्देश जारी किया है. निर्देश में कहा गया है कि सरकारी बैंक खातों में ही बैंक खाते रखें जाएं. प्राइवेट बैंकों के साथ लेन-देन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. 

वीडियो: खर्चा-पानी: IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़ा 590 करोड़ का फ्रॉड क्या है?

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