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भारतीयों के लिए हज यात्रा करना हुआ महंगा, देने होंगे 10000 ज्यादा, ओवैसी ने सरकार को घेरा

Haj Committee Fare Political Row: तेल और गैस की किल्लत की वजह से एविएशन ट्रिब्यून फ्यूल (ATF) के दाम भी बढ़े हैं. जिसकी वजह से फ्लाइट महंगे हो गए हैं. इसी वजह से हज यात्रियों की फ्लाइट टिकट भी महंगी हुई है. विपक्ष ने इसके लिए सरकार पर निशाना साधा है.

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1 मई 2026 (अपडेटेड: 1 मई 2026, 03:10 PM IST)
haj committee fare political row
हज यात्री दो महीने पहले ही कमिटी को यात्रा से दो महीने पहले एडवांस देते हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
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हज कमेटी ऑफ इंडिया ने सर्कुलर जारी कर बताया कि साल 2026 के हज यात्रियों को हवाई टिकट के लिए 10 हजार रुपये ज़्यादा देने होंगे. बताया गया कि तेल और गैस की किल्लत की वजह से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के दाम भी बढ़े हैं. इस वजह से फ्लाइट महंगे हो गए हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में तेजी की वजह से टिकट के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं. हज कमेटी माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्ट्री (Minority Affairs Ministry) के अंतर्गत आती है. टिकट के दाम बढ़ाए जाने पर सियासी गलियारों में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर नाइंसाफी है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हर हज यात्री (हाजी) पर 100 डॉलर का खर्च बढ़ाया गया है. जब से जंग शुरू हुई है तब से एविएशन फ्यूल की कीमत दुगनी से भी ज्यादा हो गई है. एक फ्लाइट की उड़ान में एविएशन फ्यूल की कॉस्ट पूरे ऑपरेशनल कॉस्ट का 30 से 40 फीसदी होती है. कमेटी का कहना है कि ये खर्च बहुत ज्यादा है, इसलिए उड़ान की कीमत बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. ये एडिशनल मनी 15 मई तक देने की डेडलाइन तय की गई है. 

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हाजी कमिटी का सर्कुलर. 

हज सऊदी अरब के मक्का शहर की तीर्थयात्रा है. हर साल दुनिया भर से बड़ी संख्या में मुसलमान धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचते हैं. भारत से भी लाखों की संख्या में हज यात्री यह धार्मिक यात्रा करते हैं.  

विपक्ष ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपने X हैंडल से पोस्ट कर बताया कि कमेटी यात्रियों से हज के दो महीने पहले ही एक फिक्स अमाउंट जमा करवा लेती है. हर हाजी को 90, 844 रुपये जमा करने होते हैं. इनकी यात्रा मुंबई से शुरू होती है. ऐसे में इस एडिशनल मनी लेने पर उन्होंने सवाल उठाए. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 

‘क्या हज यात्रियों को हज जाने की सजा मिल रही है? ज्यादातर यात्री मिडिल क्लास से आते हैं और उम्र भर हज जाने के लिए पैसे जमा करते हैं. ये एक तीर्थ यात्रा है, कोई लक्जरी नहीं. इस सर्कुलर को तुरंत वापस लेना चाहिए.’

इसपर राज्यसभा सांसद इमराम प्रतापगढ़ी ने भी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि जब पहले से पैसे तय किए जा चुके हैं तो फिर ऐन मौके पर पैसे क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?

सरकार का तर्क?

विवाद बढ़ा तो सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी. माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने बताया कि एयरलाइन्स हर हाजी पर 300-400 डॉलर बढ़ाने की बात कह रहे थे. लेकिन सरकार के कहने पर इसे कम कर दिया गया है. इसमें एयरलाइन्स की भी गलती नहीं है. एविएशन फ्यूल इतना महंगा है कि खर्च मैनेज करने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी है. उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि सरकार ने यात्रियों के हित में सोचा और कम से कम दाम बढ़ने पर जोर दिया. 

वीडियो: हज यात्रा पर मोदी सरकार ने क्या बड़ा फैसला ले लिया है?

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