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ग्वालियर में 13 महीनों में एक लाख लोगों को कुत्तों ने काटा, रेबीज से महिला की मौत

डॉक्टर्स का कहना है कि Rabies की कोई दवा नहीं है, लेकिन समय पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लेकर इसे रोका जा सकता है. Dog Bite के बाद पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी है, बीच में इंजेक्शन रोकना जानलेवा हो सकता है.

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6 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 6 फ़रवरी 2026, 04:14 PM IST)
gwalior dog bite case surges 1 lakh woman died by rabies
साल 2025 में कुत्ता काटने के 80 हजार से अधिक मामले सामने आए थे (PHOTO-X)
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अभी तक हमने दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के काटने (Dog Bite) की घटनाएं सुनी थीं. लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आए आंकड़े और भी डराने वाले हैं. ग्वालियर में एक साल में 80 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं. साथ ही एक ऐसा भी मामला सामने आया है जहां रेबीज इंजेक्शन समय पर न लेने से एक महिला की मौत हो गई. 

ग्वालियर के दाने बाबा की बगिया इलाके में रहने वाली 48 साल की महिला किरण की रेबीज संक्रमण के चलते मौत हो गई है. महिला का इलाज न्यू जयारोग्य हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग में चल रहा था. लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स समय पर न लेने के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई. इस घटना के बाद पूरे इलाके में कुत्तों के लेकर दहशत का माहौल है, क्योंकि अब भी आवारा कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं.

आंकड़े डराने वाले हैं

48 साल की महिला किरण की मौत एक भयावह घटना है. लेकिन ये सिर्फ एक मामला है. इंदौर में डॉग बाइट के आंकड़ों को देखें तो सिर्फ साल 2025 में ही वहां जयारोग्य हॉस्पिटल, जिला हॉस्पिटल मुरार और सिविल हॉस्पिटल हजीरा में 82 हजार 496 डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं. जनवरी 2026 और फरवरी 2026 के आंकड़े जोड़ दें तो यह संख्या 1 लाख के पार पहुंच जाती है. इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार सर्वेश राजपुरोहित की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर्स ने इस मामले में चेतावनी जारी की है. उनका कहना है कि रेबीज की कोई दवा नहीं है, लेकिन समय पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लेकर इसे रोका जा सकता है. डॉग बाइट के बाद पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी है, बीच में इंजेक्शन रोकना जानलेवा हो सकता है.

इस मामले पर जीआरएमसी के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ ने दैनिक भास्कर को बताया कि डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं. कई बार यह देखने में आता है कि मरीज को इंजेक्शन किस तारीख को लगना है उसे याद ही नहीं रहता है. ये घातक हो सकता है. मरीजों के हित को ध्यान रखते हुए जीआरएमसी ने देश का पहला रैबी प्रो ऐप तैयार किया है. डॉ धाकड़ कहते हैं,

जैसे ही मरीज पहले दिन अस्पताल में अपना नाम दर्ज कराएगा तो उसकी एंट्री सीधे ऐप में हो जाएगी. जब मरीज को दूसरा या तीसरा इंजेक्शन लगना होता तो उसके मोबाइल पर इसका मैसेज आ जाएगा. साथ यह भी सुविधा हो गई है कि मरीज को पूरा डेटा हमारे पास संरक्षित रहेगा. इससे सरकार को आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी.

शहर में सबसे ज्यादा डॉग बाइट के केस जिला अस्पताल मुरार में आए हैं. बीते साल जिला अस्पताल मुरार में सबसे ज्यादा 31,756 डॉग बाइट के मरीज आए. इस साल 1 जनवरी से अब तक सबसे अधिक 3,445 मरीज यहां एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने आए. वहीं न्यू जेएएच के पीएसएम विभाग में 3,351 मरीज तथा सिविल अस्पताल हजीरा में 2,958 मरीज आए हैं.

वीडियो: चोट पर कुत्ते के चाटने से हुआ रेबीज, 2 साल के बच्चे की मौत

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