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9 साल पहले मर चुके हत्यारे को HC ने पेशी के लिए बुलाया, वकील-पुलिस का गजब ब्लंडर

जुलाई, 2025 में गुजरात हाई कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना. सजा सुनाने के लिए उसे कोर्ट में बुलाया गया. लेकिन वो पेश ही नहीं हुआ.

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हरीश
| ब्रिजेश दोशी
6 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 6 अगस्त 2025, 10:28 PM IST)
 Gujarat HC convicted man who died 9 years ago
गुजरात हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई है. (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)
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गुजरात हाई कोर्ट में हुई एक घटना से राज्य में न्यायपालिका और कानूनी मशीनरी के बीच तालमेल की कमी सामने आई है. हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को दोषी करार दिया. लेकिन इसके बाद कोर्ट को बताया गया कि उस शख्स की मौत 9 साल पहले ही हो चुकी है. इसके बाद, हाई कोर्ट ने सरकारी वकील और पुलिस को फटकार लगा दी.

इंडिया टुडे के इनपुट के मुताबिक, मृतक पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप था. साल 2012 में सेशंस कोर्ट ने उसको बरी कर दिया था. फिर गुजरात सरकार की तरफ से इस फैसले को चुनौती दी गई. उसने हाई कोर्ट में सेशंस कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की. इसी मामले में जुलाई, 2025 में गुजरात हाई कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना. सजा सुनाने के लिए उसे कोर्ट में बुलाया गया. लेकिन वो पेश ही नहीं हुआ.

ऐसे में गुजरात हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी कर दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषी को कोर्ट में पेश किया जाए. ताकि उसे सजा सुनाई जा सके. बाद की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि उसकी साल 2016 में ही मौत हो गई थी. हाई कोर्ट को पता चला गया कि इस मामले में लापरवाही हुई है. ऐसे में उसने एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और पुलिस को फटकार लगाई.

हाई कोर्ट का कहना था कि आरोपी (अब दोषी) 9 साल पहले ही मर चुका है. वो अकेला इस मामले में आरोपी था. ऐसे में ये मामला पहले ही खत्म हो जाना चाहिए था. 9 साल तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और पुलिस कोर्ट को ये जानकारी नहीं दे पाए.

कोर्ट ने आदेश दिया कि सही समय पर जानकारी न देने वाले ‘लापरवाह पुलिस अफसरों’ के खिलाफ कार्रवाई की जाए. साथ ही, हिदायत भी दी कि आगे से ऐसी को गलती ना हो, जिससे कोर्ट का समय बर्बाद हो.

कोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के ऑफिस को भी इसके लिए जिम्मेदार माना. कहा कि ये सरकारी वकील की जिम्मेदारी है कि ऐसे पुराने मामलों में अंतिम सुनवाई से पहले आरोपी के बारे में जानकारी हासिल कर ले. कोर्ट के मुताबिक, ये साफ तौर पर दिख रहा है कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिस और पुलिस के बीच सही तालमेल की कमी थी.

ये भी पढ़ें- गुजरात HC ने सुनवाई में टॉयलेट जाने वाले को सजा दी, बियर पीने वाले वकील को माफ कर दिया

क्या था मामला?

अप्रैल 2012 में रायजीभाइ सोढाने नाम के शख्स ने अपनी पत्नी रुक्ष्मणीबेन को जिंदा जला दिया था. बाद में पता चला कि आरोपी ने शराब के लिए अपनी पत्नी रुक्ष्मणीबेन से चांदी के गहने मांगे थे. पैसे नहीं मिलने पर उसके साथ झगड़ा किया. बाद में उसने पत्नी को जिंदा जला दिया.

वीडियो: सास-ससुर के सामने पत्नी का रेप, गुजरात हाईकोर्ट की मैरिटल रेप पर बेहद ज़रूरी टिप्पणी

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