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KBC लॉटरी के नाम पर पाकिस्तान से हो रहा था स्कैम, साढ़े 13 लाख की ठगी का पर्दाफाश

Surat Cyber Cell के ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि इस KBC Scam को Pakistan से संचालित किया जा रहा था. भारत में रहने वाले लोकल ऑपरेटिव फ्रॉड का पैसा असम में मौजूद बैंक अकाउंट्स में डाल कर भेजा करते थे. ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि पैसे को ट्रेस करने पर पाकिस्तान से लिंक न निकलने पाए.

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31 मई 2026 (पब्लिश्ड: 11:19 PM IST)
gujarat cyber cell arrests two accused in fake kaun banega crorepati scam link to pakistan assam
सूरत की साइबर सेल ने फर्जी केबीसी केस में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है (PHOTO-ITG)
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गुजरात में सूरत पुलिस के साइबर सेल ने एक इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेक्सस का पर्दाफाश किया है. इस फ्रॉड नेटवर्क के तार असम से लेकर पाकिस्तान से जुड़े हैं. सूरत साइबर सेल ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों फर्जी तरीके से 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC Scam) में शामिल थे. इस स्कैम के तहत सूरत के रहने वाले एक व्यक्ति से 13 लाख 51 हजार की ठगी हुई थी.

साइबर सेल के ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि इस फ्रॉड को पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था. भारत में रहने वाले लोकल ऑपरेटिव फ्रॉड का पैसा असम में मौजूद बैंक अकाउंट्स में डाल कर भेजा करते थे. ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि पैसे को ट्रेस करने पर पाकिस्तान से लिंक न निकलने पाए.

KBC और फर्जी लॉटरी के नाम पर ठगी

इस मामले की जांच कर रह अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया कि सूरत के रहने वाले पीड़ित को कुछ फोन कॉल्स आए थे. इन फोन कॉल्स में दावा किया गया कि उसने 25 लाख रुपये की KBC लॉटरी जीत ली है. पीड़ित व्यक्ति फोन करने वालों के झांसे में आ गए. फ्रॉड करने वालों ने उन्हें यकीन दिला दिया कि लॉटरी के इनाम की रकम पाने के लिए अलग-अलग तरह के चार्ज और फीस देने होते हैं. वो हर बात पर भरोसा करते गए. लिहाजा उन्होंने कई ट्रांजैक्शन किए और कुल 13 लाख 51 हजार 450 रुपये ट्रांसफर कर दिए.

कुछ समय बाद पीड़ित को समझ आया कि उसके साथ स्कैम हो रहा है. लेकिन एक कहावत है - 'अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गई खेत.' जब तक उसे एहसास हुआ कि उसे पैसे लुट गए हैं, तब तक देर हो चुकी थी. पूरी घटना के बाद उसने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद सूरत सिटी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भी एक केस दर्ज किया गया.

सूरत से 2500 किलोमीटर दूर पहुंची साइबर सेल की टीम

सूरत साइबर सेल ने इस मामले की जांच शुरू की. टेक्निकल सुरागों पर काम करते हुए साइबर क्राइम की एक टीम लगभग 2,500 किलोमीटर का सफर तय करके असम के नगांव जिले पहुंची. ये जिला गुवाहाटी से लगभग 140 किलोमीटर दूर है. लेकल पुलिस और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर, टीम ने सात से आठ दिनों तक वहीं कैंप किया. आखिरकार पुलिस ने दो मुख्य संदिग्धों को अरेस्ट कर लिया.

आरोपियों की पहचान 24 साल के एजाजुल हक के रूप में हुई है, जो कोचगांव का रहने वाला है और मछली पालन के काम से जुड़ा है. जबिक दूसरा आरोपी 27 साल का मुजफ्फर अली है, जो उसी गांव का रहने वाला है. एजाजुल हक ही वो व्यक्ति है जिसके नाम पर खोले गए बैंक खातों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया. जो भी रकम फ्रॉड के जरिए मिली, उसे एजाजुल हक के अकाउंट में ही जमा किया जाता था.

वीडियो: गाजियाबाद के शख्स पर साइबर ठगी का आरोप, एंटीवायरस के नाम पर हजारों लोग बने शिकार

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