मंदिर, जैन तीर्थ या मस्जिद? भरूच की 700 साल पुरानी धरोहर पर क्यों छिड़ा विवाद
Gujarat के भरूच की Jama Masjid को लेकर कई धार्मिक संगठनों ने अलग-अलग दावे किए हैं. हिंदू और जैन संगठनों का दावा है कि परिसर के अंदर हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां और अवशेष मौजूद हैं. इसी मुद्दे को लेकर 15 जून को लगभग 5,000 लोगों के जुटने की बात कही गई है.

गुजरात के भरूच की जामा मस्जिद इन दिनों चर्चा में है. धार्मिक संगठनों का दावा है कि मस्जिद परिसर के अंदर हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां और अवशेष मौजूद हैं. संगठनों का कहना है कि इन मूर्तियों की हालत खराब है और इन्हें सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए. इसी मुद्दे को लेकर 15 जून को लगभग 5,000 लोगों के जुटने की बात कही गई है. ऐसे में एहतियातन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और पूरे इलाके में निगरानी तेज कर दी गई है. ये पूरा मामला क्या है? विस्तार से बताते हैं.
दरअसल, भरूच की इस ऐतिहासिक धरोहर को लेकर कई धार्मिक संगठनों ने अलग-अलग दावे किए हैं. यह स्मारक आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के संरक्षण में है. आजतक से जुड़े विक्की जोशी की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू संत समिति का कहना है कि यह स्थान ‘महानुभाव पंथ’ के संस्थापक ‘चक्रधर स्वामी’ की जन्मस्थली है. वहीं मुस्लिम समाज इसे सदियों पुरानी जामा मस्जिद बता रहा है. जैन समाज का दावा है कि यह प्राचीन जैन तीर्थ ‘समड़ी विहार’ या ‘शकुनिका विहार’ का हिस्सा रहा है.
हिंदू-जैन संगठन का क्या कहना है?‘ऐतिहासिक जैन मंदिर, श्री चक्रधर स्वामी जन्म स्थल राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति’ एक साझा सामाजिक-धार्मिक संगठन है, जिसमें हिंदू और जैन दोनों समुदायों के संत और कार्यकर्ता मिलकर काम कर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति के सदस्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उनके पास एक वीडियो है, जिसे कथित तौर पर ASI के अधिकारियों की मौजूदगी में रिकॉर्ड किया गया था. इस वीडियो में स्मारक के अंदर कथित तौर पर कुछ प्राचीन मूर्तियां दिखाई दे रही हैं.
मुक्तेश्वरानंद ने आगे बताया कि उनका मकसद किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं है और न ही वो मस्जिद में होने वाली नमाज का विरोध कर रहे हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़ी इन मूर्तियों और अवशेषों को सम्मान और संरक्षण मिले. इस मांग को लेकर समिति ने 15 जून को एक बड़े शांतिपूर्ण जमावड़े का ऐलान भी किया है. दावा किया जा रहा है कि लगभग 5000 लोग पहले हॉस्टल ग्राउंड में एकत्र होंगे और उसके बाद अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय तक मार्च करेंगे.
'मंदिर का हिस्सा थी स्मारक'आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू संगठनों का दावा है कि भरूच के कोटपारसीवाड़ इलाके में मौजूद यह जामा मस्जिद किसी समय एक प्राचीन मंदिर परिसर का हिस्सा थी. उनका दावा है कि मस्जिद की वास्तुकला और नक्काशीदार खंभे इस तरफ इशारा करते हैं. इसी आधार पर पुरातात्विक जांच की मांग भी उठाई गई है. हिंदू संत समिति ने दावा किया कि पुरातत्व विभाग ने हाल में परिसर के अंदर कथित रूप से बाद में बनाए गए एक वुजुखाने को हटाया है और स्मारक के पीछे बने एक एंट्री गेट को बंद कर सील कर दिया है. हालांकि, अधिकारियों की तरफ से इस मामले में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है.
'लंका की राजकुमारी ने बनवाया था मंदिर'जैन संतों का कहना है कि यह स्थान प्राचीन ‘समड़ी विहार’ या ‘शकुनिका विहार’ रहा है और जैन इतिहास में इसका विशेष महत्व है. उनकी मान्यता के मुताबिक, लंका की एक राजकुमारी ने यहां एक भव्य जैन तीर्थ बनवाया था. जैन समाज का कहना है कि इस जगह के तहखाने और प्राचीन अवशेषों का वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए ताकि इसके इतिहास की सही जानकारी सामने आ सके. जैन समाज का यह भी दावा है कि समय-समय पर हुए नए निर्माणों से इस धरोहर के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचा है. उनका आरोप है कि पहले भी कुछ निर्माण कार्यों को लेकर आपत्तियां उठी थीं, लेकिन उस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने एक निष्पक्ष पुरातात्विक अध्ययन और ऐतिहासिक जांच की मांग की है.
मुस्लिम पक्ष क्या कह रहा है?जामा मस्जिद कमिटी और मुस्लिम समाज ने इन सभी दावों को खारिज किया है. मस्जिद के ट्रस्टी और कमिटी के पदाधिकारियों ने कहा कि 700 साल पुरानी यह मस्जिद ASI द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक मस्जिद है. यहां करीब 700 सालों से शांति के साथ नमाज अदा की जाती रही है. उनका आरोप है कि कुछ समूह इस मुद्दे को लेकर बेमतलब का विवाद पैदा कर रहे हैं और शहर के सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.
बिना इजाजत के वीडियो कैसे बनाया?जामा मस्जिद के ट्रस्टी अब्दुल कामठी का कहना है कि यह एक ASI संरक्षित स्मारक है और इसके प्रतिबंधित हिस्सों में बिना आधिकारिक अनुमति के प्रवेश या वीडियो रिकॉर्डिंग की इजाजत नहीं है. उनका दावा है कि ASI ने भी साफ कर दिया है कि ऐसी किसी रिकॉर्डिंग के लिए अनुमति नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा कि यहां सदियों से शांतिपूर्वक नमाज अदा की जाती रही है और अलग-अलग समुदायों के लोग भी इस जगह पर आते रहे हैं.
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ASI ने कलेक्टर को लिखा पत्ररिपोर्ट के मुताबिक, मस्जिद प्रबंधन की शिकायत के बाद ASI ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा है. इस पत्र में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रस्तावित जमावड़े को लेकर चिंता जताई गई है. ASI ने कहा कि यह एक संवेदनशील स्मारक है, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. एजेंसी ने जिला प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की अपील की है.
ASI की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने भी कार्रवाई की है. कलेक्टर डॉ. नवनाथ गव्हाणे ने गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. जिला प्रशासन ने लोगों से ASI के नियमों का पालन करने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. फिलहाल, प्रशासन का पूरा ध्यान 15 जून को कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है.
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