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गधे पालने के 50 लाख रुपये देगी सरकार, लाभ उठाने के लिए योजना की एक-एक बात जानें

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना में गधों को भी शामिल किया है. यानी गधे अब सिर्फ पशु नहीं हैं. वो धन भी हैं. पहले भी थे लेकिन अब वो आपको ‘धनवान’ बनाने का जरिया हो सकते हैं.

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Donkey husbandry scheme
गधा पालने पर सरकार देगी सब्सिडी (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
3 मार्च 2026 (अपडेटेड: 3 मार्च 2026, 12:10 AM IST)
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देश ‘गधों के संकट’ से जूझ रहा है. देश में ‘पशुधन’ वाले गधों के कम होने का संकट है. जिस तेजी से इंसानों की आबादी बढ़ रही है. उसी तेजी से गधे कम हो रहे हैं. और ये बात हम नहीं कह रहे हैं. ये सरकार का आंकड़ा है. देश में 2012 के बाद से अब तक यानी 14 साल के अंदर 60 फीसदी गधे कम हुए हैं. यही वजह है कि सरकार अब ‘गधा संरक्षण योजना’ लेकर आई है, जिसके हिसाब से अगर गधे पालने का शौक है तो आपके पास करोड़पति बनने के मौके हैं. 

यानी बिजनस में ‘नए नौकरों’ को रखने से बढ़िया है गधे को बिजनस पार्टनर बनाइए. इस योजना के तहत स्टार्टअप शुरू कीजिए. गधे पालिए और सरकार आपके बिजनस को 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी. इंडिया टुडे से जुड़े नासिर हुसैन की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना में गधों को भी शामिल किया है. यानी गधे अब सिर्फ पशु नहीं हैं, वो धन भी हैं. पहले भी थे लेकिन अब वो आपको ‘धनवान’ बनाने का जरिया हो सकते हैं. 

ये सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि देश में गधों की संख्या कम हो गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल देश में कुल 1.23 लाख गधे बचे हैं, जो 2012 में उनकी आबादी से 60 फीसदी कम हैं. उनकी नस्ल बची रहे इसलिए सरकार ये योजना लेकर आई है.

अब सवाल है कि गधों की नस्ल पर ये संकट आया क्यों? 

इसकी वजह है बेरोजगारी. इंसानों की नहीं, गधों की. नई टेक्नॉलजी ने गधों के काम पर कब्जा कर लिया है. ट्रक, ट्रैक्टर, पिकअप के दौर में लोग बोझा ढोने, ईंट-रेत ढोने में गधों का प्रयोग करना कम कर चुके हैं. ऐसे में ‘बिना काम के गधों’ को पालना लोगों ने छोड़ दिया है. लेकिन सरकार चाहती है कि गधे पालने की ये व्यवस्था एकदम से लुप्त न हो जाए. यह समाज में बनी रहे. इसी संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) ने गधों को अपने संरक्षण में ले लिया है और एक खास योजना लेकर आई है.

यह योजना कहती है कि बिजनस के उद्देश्य से अगर कोई गधों को पालना चाहता है तो सरकार उसकी मदद करने के लिए तैयार है. यह मदद आर्थिक ही होगी. इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति, एफपीओ (Farmer Producer Organization), एसएचजी (Self Help Group), जेएलजी (Joint Liability Group), एफसीओ (Farmer Cooperative Organization) पशुधन मिशन के तहत गधा पालन के लिए आवेदन करता है तो उसे स्कीम की कुल लागत की 50 फीसदी सब्सिडी का फायदा दिया जाएगा. ये रकम 50 लाख रुपये तक की हो सकती है. यानी, एक करोड़ का प्रोजेक्ट लगाएंगे तो आधा पैसा यानी 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी सरकार देगी. 

इतना ही नहीं. अगर कोई राज्य सरकार भी गधों, घोड़ों और ऊंटों की नस्ल बचाने के लिए कुछ करना चाहती है तो केंद्र उसकी मदद के लिए तैयार है. जैसे अगर कोई राज्य सरकार इन पशुओं से संबंधित वीर्य स्टेशन या न्यूक्लियस प्रजनन फार्म खोलना चाहती है तो केंद्र सरकार उसे इसके लिए 10 करोड़ रुपये देगी.

हां, इसके लिए सरकार की कुछ खास शर्तें भी हैं, जिसे मानना जरूरी है. जैसे गधा पालन के लिए न्यूनतम यूनिट 50 मादा और 5 नर गधों की होगी. इस स्कीम पर सरकार की ओर से सब्सिडी 50 लाख तक दी जाएगी. इसमें भी पाले गए गधे सिर्फ स्वदेशी नस्ल के होने चाहिए. सब्सिडी दो किस्तों में मिलेगी. पहली किस्त बैंक लोन मिलने पर और दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने पर दी जाएगी.

लेकिन गधों से होगा क्या?

सरकार की स्कीम में गधी पालन पर ज्यादा जोर है. सरकार और कुछ संस्थान गधी के दूध से बने आइटम्स को खूब प्रमोट करने में लगे हैं. एक सरकारी संस्थान ने गधी के दूध को फूड आइटम की सूची में शामिल कराने के लिए FSSAI से गुहार भी लगाई है. पतंजलि आयुर्वेद कंपनी के मालिक योगगुरु रामदेव का एक वीडियो दो साल पहले वायरल हुआ था. इसमें वह गधी का दूध निकालते हुए दिखे थे. उन्होंने यह दूध पीने के बाद उसे टेस्टी भी बताया था. इसके फायदे बताते हुए कहा था कि यह स्किन और डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं में बंपर फायदेमंद होता है.

कैसे करेंगे आवेदन 

अगर आप भी सरकार की इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो सीधे इसकी आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाइए. वहां आवेदन करने की पूरी व्यवस्था है. आवेदन करने के बाद बैंक से लोन लेकर आप अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. कुल मिलाकर अब गधों को लेकर मजाक न करने और ‘इधर भी गधे हैं. उधर भी गधे हैं’ वाली कविता को जमीन पर उतारने का वक्त आ गया है. 

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