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'घूसखोर पंडत' के विरोध में नेता एकमत, ब्रजेश पाठक से लेकर मायावती तक सबने क्या कहा?

मनोज वाजपेयी की अपकमिंग फिल्म 'घूसखोर पंडत' के नाम की यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि फिल्म जगह ब्राह्मण समुदाय को लगातार निशाना बना रहा है.

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6 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:35 PM IST)
brajesh pathak on ghooskhor pandat
मनोज वाजपेयी की फिल्म के नाम का ब्रजेश पाठक ने विरोध किया है. (india today)
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डायरेक्टर नीरज पांडेय और एक्टर मनोज वाजपेयी की नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का विवाद ‘राजनीतिक’ हो गया है. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने फिल्म के नाम को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसकी ‘कड़ी निंदा’ तो की ही, साथ ही ‘फिल्म जगत’ पर आरोप भी लगा दिया कि वो भारतीय संस्कृति और इसमें भी ब्राह्मण समुदाय को खासतौर पर निशाना बना रहे हैं. 

शुक्रवार, 6 फरवरी को पाठक ने कहा कि ऐसी फिल्मों को जनता को नहीं दिखाया जाना चाहिए. ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस फिल्म को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश है और उन्होंने ये सब बातें केंद्र सरकार तक पहुंचाई थीं, जिसके बाद केंद्र से आश्वासन मिला कि ‘घूसखोर पंडत’ के नाम से कोई भी फिल्म ओटीटी पर रिलीज नहीं करने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि जाति के आधार पर किसी को समाज में वैमनस्य फैलाने नहीं दिया जाएगा. 

लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने भी फिल्म के नाम पर हैरानी जताई. उन्होंने कहा कि वह नीरज पांडेय और मनोज वाजपेयी की प्रशंसक हैं इसलिए उन्हें इस फिल्म के नाम से काफी झटका लगा. मालिनी अवस्थी ने कहा, 

फिल्म के टीजर में प्रयोग की गई भाषा मुझे नीरज पांडेय के स्टाइल की नहीं लगी. ऐसा लगा कि वो किसी दबाव में थे. 

मालिनी ने कहा कि फिल्म का टाइटल कुछ और भी हो सकता था, लेकिन जिस तरीके से इसमें 'पंडत' शब्द जोड़ा गया, उससे उन्हें दुख हुआ.

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने तो फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी. उन्होंने कहा, 

यह बड़े दुख की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी 'पंडत' को घूसखोर बताकर पूरे देश में इनका अपमान और अनादर किया जा रहा है. इससे पूरे ब्राह्मण समाज में इस समय जबर्दस्त रोष व्याप्त है. इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है. ऐसी जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) 'घूसखोर पंडत' पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबंध लगाना चाहिए.

विश्व हिंदू परिषद ने भी फिल्म को ‘अस्वीकार्य' बताया है. एक्स पर पोस्ट कर संगठन के नेता विनोद बंसल ने कहा कि सीरीज के नाम के जरिए न सिर्फ हिंदू समाज के ‘सबसे सम्मानित वर्ग’ पर हमला किया जा रहा है बल्कि देश में नफरत और अशांति फैलाने की भी कोशिश की जा रही है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,

इसे तुरंत रोकें और माफी मांगें. नहीं तो हिंदू समाज आपके ऐसे बार-बार किए जाने वाले प्रयासों के खिलाफ लोकतांत्रिक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा.

इसी बीच यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के डायरेक्टर और उनकी टीम पर एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है. इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह ने ये FIR दर्ज करवाई है. 

बता दें कि भारी विरोध के बाद फिल्म के टीजर को हटा लिया गया है. इसके लॉन्च होने के एक दिन बाद फिल्म एक्टर मनोज बाजपेयी और फिल्म निर्माता नीरज पांडे ने सफाई दी कि 'घूसखोर पंडत' की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसमें कुछ कमियां हैं और इसका किसी जाति या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है. 

नीरज पांडेय ने माना कि फिल्म के टाइटल ने दर्शकों के एक वर्ग की भावनाओं को ‘ठेस’ पहुंचाई है, इसलिए वह फिल्म के सभी प्रमोशनल मटीरियल फिलहाल हटा देंगे.

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