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105 साल पुराने जर्मन ट्रैक्टर को कबाड़ समझा, सवा करोड़ में बिका तब पता चला लाजवाब था

अब उस सुनसान इलाके में खड़ा रहने वाला खामोश ट्रैक्टर वहां नहीं है. वह बिक गया है. बताते हैं कि अमेरिका में किसी ने उसके असली मालिक से ट्रैक्टर का सौदा कर लिया.

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23 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 23 फ़रवरी 2026, 10:35 PM IST)
Junked German tractor sold out
कबाड़ माना जा रहा ट्रैक्टर एक करोड़ 25 लाख में बिका. (social media-X)
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हिंदी में एक कहावत है, ‘बारह बरस बाद घूरे के दिन भी फिरते हैं.’ ये कितनी सटीक बात है, इस धूल-धूसरित जंग लगे ‘बुजुर्ग’ ट्रैक्टर की कहानी सुनकर आप ठीक से समझ जाएंगे. पंजाब का एक बड़ा शहर है जालंधर. उसके सबसे व्यस्त बाजार में शहीद भगत सिंह चौक है. इस चौक पर एक जर्जर बिल्डिंग के पास दशकों से एक जंग लगा उजाड़ ट्रैक्टर खड़ा रहता था. टायर घिस गए थे. पूरी बॉडी ब्राउन हो गई थी. उसका सिर्फ ढांचा बचा था.

हालांकि, धुआं फेंकने वाला ‘स्तंभ’ अभी भी आकाश में लहरा रहा था और स्टीयरिंग भी मजबूती से अपनी जगह जमा था. ये ट्रैक्टर इतना पुराना था कि बचपन में इस पर चढ़कर खेलने वाले लोगों के नाती-पोते भी इस पर खेले, लेकिन ट्रैक्टर वहीं और वैसा ही खड़ा रहा. 

हालांकि, अब उस सुनसान इलाके में खड़ा रहने वाला खामोश ट्रैक्टर वहां नहीं है. वह बिक गया है. बताते हैं कि अमेरिका में किसी ने उसके असली मालिक से ट्रैक्टर का सौदा कर लिया.

लेकिन कितने में? यही तो मेन स्टोरी है. 

जितने में ये ट्रैक्टर बिका है, उतने में 20-30 साल पहले आप एक बंगला खरीद लें. अब तो खैर संभव नहीं है. इस ट्रैक्टर के लिए 2 लाख से सौदे की बात शुरू हुई थी, लेकिन अंत में ये बिका 1 करोड़ 25 लाख में. यानी कल तक जो एक कबाड़ था, आज अपने मालिक को करोड़पति बना गया. एक सदी तक ‘उपेक्षित’ रहने के बाद 105 साल पुराने इस विंटेज लैंज बुलडॉग HL-12 जर्मन ट्रैक्टर का ‘अपना टाइम आ गया’. वही ‘बारह बरस’ वाला, जिसमें घूरे के दिन भी फिर जाते हैं. ‘कबाड़ भी कुंदन’ बन जाता है.

ट्रैक्टर का ये सौदा फिलहाल इंटरनेट पर सनसनी बन गया है. 

लेकिन ऐसा क्या था इस ट्रैक्टर में कि खरीदार इसकी ‘मुंहमांगी’ कीमत भी देने को कोई तैयार हो गया. इतने में तो दो लग्जरी गाड़ियां आराम से खरीदी जा सकती थीं.

दरअसल, जो ट्रैक्टर लावारिस हालात में चौक पर खड़ा रहता था, वो लांज़ बुलडॉग ट्रैक्टर था जिसे जर्मनी के मैनहाइम में बने एकदम शुरुआती ट्रैक्टरों में से एक माना जाता है. इसके साइड पैनल पर LANZ और पिछली प्लेट पर ‘हेनरिक लांज़ मैनहाइम’ लिखा था. यह ट्रैक्टर ऐतिहासिक तो था ही. साथ ही ये गजब की इंजीनियरिंग का नमूना भी है. इनकी बेजोड़ मजबूती इन्हें ‘बेहद कीमती कलेक्शन आइटम’ बनाती है.  

इसके अलावा ये ट्रैक्टर जर्मनी में एग्रीकल्चर इंडस्ट्रियलाइजेशन (कृषि औद्योगीकरण) के प्रतीक माने जाते हैं. डॉ. फ्रिट्ज़ ह्यूबर ने साल 1921 में इन ट्रैक्टर्स को सबसे पहले बाजार में उतारा था. यह दुनिया का पहला सफल ट्रैक्टर था जो कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) से चलता था और ‘हॉट-बलब’ इंजन तकनीक पर काम करता था. इसकी खास बात ये थी कि यह तकरीबन किसी भी तरह के ईंधन पर चल सकता था. जी, सही पकड़ा आपने. वेजिटेबल ऑयल से लेकर वेस्ट ऑयल तक. किसी से भी इसे चलाया जा सकता था. 

हेनरिक लांज़ कंपनी ने बुलडॉग HL- 12 ट्रैक्टर को पहली बार 16 जून 1921 को जर्मन एग्रीकल्चर सोसायटी के ट्रैवलिंग एग्जीबिशन में पेश किया था. बुलडॉग नाम मशीन के हॉट-बल्ब इंजन के सिलेंडर हेड से पड़ा, जो कुत्ते के आकार का था.

बिक गया ट्रैक्टर

दुनिया भर में इस ट्रैक्टर की इतनी डिमांड है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ एक वीडियो वायरल होने के बाद जहां ये ट्रैक्टर खड़ा रहता था, उस पूरे इलाके के लोगों के फोन घनघनाने लगे. ये फोन इसे खरीदने की इच्छा रखने वाले लोगों के होते थे. ट्रैक्टर के मालिक के पड़ोसी और पार्षद पुनीत वढेरा ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि इसके मालिक 40 साल पहले अमेरिका चले गए थे. करीब ढाई महीने पहले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने इसका वीडियो बनाया था. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उनके पास भी लगातार फोन आने लगे. वढेरा बताते हैं,  

हमने सुना है कि ये ट्रैक्टर मूल रूप से अंग्रेजों का था, लेकिन बाद में पंजाब के एक किसान ने इसे खरीद लिया. 

वढेरा ने बताया कि मुंबई की एक कंपनी ने उनके एक पड़ोसी को फोन किया. पहले ट्रैक्टर के लिए 2 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया. अगली ही रात तक यह बढ़कर 28 लाख तक पहुंच गया. फिर 17 फरवरी 2026 को उन्हें पता चला कि अमेरिका में रहने वाले ट्रैक्टर के मालिकों ने इसे 1.25 करोड़ रुपये में बेच दिया है. 

आगे उन्होंने बताया कि इसके बाद 18 फरवरी की सुबह एक क्रेन आई. उसकी मदद से ट्रैक्टर को उठाया गया और ट्रक से मुंबई के बंदरगाह तक ले जाया गया. वहां से ट्रैक्टर को अमेरिका के कैलिफोर्निया भेजा जाएगा. हालांकि, वढेरा को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि इस ट्रैक्टर को किसने खरीदा है.

अब ट्रैक्टर वहां नहीं है, जहां दशकों से वह उजाड़ हालत में खड़ा था. लेकिन वो जगह अब बाजार की शान बन गई है. लोग अभी भी उस जगह को देखने आते हैं जहां वह खड़ा था. वढेरा ने ट्रैक्टर बिकने की जो जानकारी दी थी, उसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं.

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