FSSAI में डायरेक्टर की नियुक्ति पर सवाल उठाया, एक्स यूजर पर FIR दर्ज हो गई
Delhi Police को दी शिकायत में आरोप लगाया गया कि कथित सोशल मीडिया यूजर्स का कैंपेन FSSAI को बदनाम करने, भारत के फूड सेफ्टी सिस्टम पर लोगों का भरोसा कमजोर करने और कुछ बिजनेस संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए चलाया गया.

‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. संस्थान की एक अधिकारी स्वीटी बेहरा (FSSAI डायरेक्टर, रेगुलेटरी कंप्लायंस) पर आरोप लगे हैं कि उनकी नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है. इसके कुछ कथित आधिकारिक दस्तावेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं. इसमें बताया गया कि जिस पद पर बेहरा की नियुक्ति हुई है, उसके लिए जरूरी एक्सपीरियंस का सर्टिफिकेट उनके पास नहीं था. आरोप है कि फिर भी कई योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर उन्हें नौकरी दे दी गई. खुरपेंच नाम के सोशल मीडिया यूजर ने ये डॉक्यूमेंट शेयर कर FSSAI से जवाब मांगा. इसके बाद उस पर FIR दर्ज हो गई.
24 मार्च 2026 को दिल्ली पुलिस से शिकायत की गई कि खुरपेंच समेत कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने बिना इजाजत FSSAI के आधिकारिक दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर शेयर किया. इन गोपनीय दस्तावेजों को गैरकानूनी तरीके से हासिल किया गया. उन्हें लीक किया गया. इसमें संस्था के किसी अंदरूनी व्यक्ति के शामिल होने का शक भी है, जिसने संस्थान में गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन किया.
शिकायत में आरोप लगाया कि ये सब FSSAI को बदनाम करने, भारत के फूड सेफ्टी सिस्टम पर लोगों का भरोसा कमजोर करने और कुछ बिजनेस संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया. खासकर उन कंपनियों को जो बिना FSSAI सर्टिफिकेशन के काम कर रही हैं. आरोप यहीं तक नहीं हैं. ये भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर इस तरह का कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसमें विदेशी फंडिंग की भी आशंका है.
क्या है ये मामला?इस पूरे मामले की जड़ तक जाने के लिए हमें इस साल की जनवरी में जाना होगा. एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर खुरपेंच (@khurpenchh) नाम के यूजर ने 2 जनवरी 2026 को एक पोस्ट लिखा- ‘FSSAI हम आ रहे हैं.’ इसके दो महीने के बाद 9 मार्च को इस विषय पर उसका दूसरा पोस्ट आया. इसमें संस्थान की एक कथित आंतरिक जांच के बारे में बताया गया. कहा गया कि 26 दिसंबर 2024 को FSSAI के 6 बड़े अधिकारियों पर जांच बिठाई गई थी.
इनमें से सिर्फ एक अधिकारी लोकेंद्र कुमार के दस्तावेज सही पाए गए थे. बाकी के पांच के बारे में पता चला कि उन्होंने अधूरे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाई. इन लोगों में कविता रामासामी, भरत पचिया, वैदेही संजय कालजुंकर, स्वीटी बेहरा और सौरभ दुग्गल शामिल हैं. इस जानकारी के साथ यूजर ने सूचना दी कि वो जल्दी ही मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा.

इसके अगले ही दिन यानी 10 मार्च को ‘खुरपेंच’ ने स्वीटी बेहरा को लेकर बड़ा आरोप लगाया. एक्स पर एक पोस्ट की गई, जिसमें स्वीटी बेहरा की फोटो के साथ कुछ डॉक्यूमेंट्स के स्क्रीनशॉट लगे थे. जो स्क्रीनशॉट्स थे, उसे लेकर दावा किया गया कि वह FSSAI के आधिकारिक दस्तावेज हैं जो साबित करते हैं कि स्वीटी बेहरा की नियुक्ति फर्जी तरीके से की गई है. पोस्ट में कहा गया कि दिसंबर में संस्था की आंतरिक जांच प्रक्रिया में उनका एक्सपीरियंस लेटर और सीटीसी क्राइटेरिया से कम पाया गया. फिर उनका सेलेक्शन कैसे हो गया?
आगे सवाल किया गया कि स्वीटी बेहरा ने अपने एक्सपीरियंस लेटर में दिखाया था कि उन्होंने नेस्ले इंडिया में साल 2006 से 2020 तक काम किया. लेकिन उनका ये दावा और एक्सपीरियंस लेटर फर्जी है. उन्होंने वहां 2007 से काम किया था. आगे दावा किया कि नियम कहते हैं कि जिस पद पर उनकी नियुक्ति हुई है, उसमें पांच सालों का सुपरवाइजरी अनुभव चाहिए लेकिन उसके भी दस्तावेज बेहरा के पास नहीं थे.

पोस्ट में ये भी दावा किया गया कि इंटरव्यू में दस्तावेज की कमी के कारण तीन SC कैंडिडेट्स को रिजेक्ट कर दिया गया. पोस्ट में लिखा कि FSSAI ने ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ जाकर ये कहते हुए स्वीटी बेहरा का सेलेक्शन किया कि सूटेबल कैंडिडेट्स नहीं हैं जबकि बहुत सारे कैंडिडेट्स इनसे ज्यादा अनुभवी और योग्य थे.
इस पोस्ट के 14 दिन बाद यानी 24 मार्च को दिल्ली पुलिस से शिकायत की गई कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए FSSAI को बदनाम किया जा रहा है. इसमें दावा किया गया कि कुछ लोग मिलकर लगातार X और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक जानकारी और गोपनीय दस्तावेज फैलाने का अभियान चला रहे हैं. FIR में आगे कहा गया कि यह पूरा अभियान काफी संगठित है, जहां एक जैसे पोस्ट अलग-अलग अकाउंट्स से तेजी से फैलाए जा रहे थे.

खास बात ये है कि इनमें ज्यादातर अकाउंट्स कथित तौर पर छद्म नामों से बनाए गए थे, जिससे इनके पीछे कौन है, ये जानना मुश्किल था. दिल्ली पुलिस ने बताया कि शिकायत के बाद 9 और 10 मार्च के आसपास पांच सोशल मीडिया अकाउंट्स @khurpenchh, @YTKDIndia, @gemsofbabus_, @IamTheStory_ और @NalinisKitchen के पोस्ट्स पर जांच टीम का ध्यान गया. इसके बाद पुलिस ने 'एक्स' को भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 94 के तहत चिट्ठी लिखी और इन अकाउंट्स से जुड़े यूजर्स की डिटेल्स मांगी.
इसमें उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, IP लॉग्स, अकाउंट बनने से अब तक की गतिविधियों का रिकॉर्ड और रिकवरी डिटेल्स जैसी चीजें एक्स से देने के लिए कहा गया है. अधिकारियों का कहना है कि इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इन अकाउंट्स को कौन चला रहा है और इनके पीछे क्या कोई संगठित नेटवर्क है या नहीं?
किन पोस्ट्स पर हुई एफआईआरजिन पांच यूजर्स का नाम FIR में है, उनमें से तीन लोगों ने स्वीटी बेहरा की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे. इनमें खुरपेंच की ऑफिशियल आईडी, ‘ये करके दिखाओ’ (@YTKDIndia) और @gemsofbabus शामिल हैं. ‘gems’ नाम के यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बेहरा ने दावा किया कि 2006-2020 तक उन्होंने Nestle India में काम किया, लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक वो अगस्त 2007 में जॉइन हुईं, जिससे उनकी योग्यता की अवधि कम हो जाती है. उन्होंने आगे लिखा,
5 साल का सुपरवाइजरी अनुभव जरूरी था लेकिन इसका कोई सबूत जमा नहीं किया गया. पिछले 2 साल के लिए 18 लाख CTC जरूरी था, जबकि दस्तावेजों में यह सिर्फ 1 साल के लिए दिखता है. इसके बावजूद अनुभव और CTC में छूट (relaxation) दी गई, जबकि 2018 के भर्ती नियमों में CTC में छूट की अनुमति नहीं है. यह कहकर छूट दी गई कि “कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला”, जबकि इंटरव्यू में तीन SC उम्मीदवार शामिल हुए थे. नियमों के मुताबिक, गलत जानकारी देने पर उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द हो सकती है या उसे नौकरी से हटाया जा सकता है. सवाल यह है कि ये छूट किसने और क्यों दी?
बाकी के दो यूजर्स @1IamTheStory_ और @NalinisKitchen ने बेहरा पर पोस्ट नहीं लिखी थी, लेकिन उनका टारगेट भी FSSAI था. उन्होंने संस्थान की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. हालांकि, एफआईआर होने के बाद भी आरोप लगाने वाले यूजर्स पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. इस पूरे विवाद के केंद्र में खुरपेंच है. केस दर्ज होने के बाद उसने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि वो हर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार है. उन्होंने दावा किया कि ये एफआईआर स्वीटी बेहरा की ओर की गई है.
खुरपेंच ने पूछा कि उन्होंने जो डॉक्यूमेंट्स पोस्ट किए थे, उन पर मालिकाना हक FSSAI का है. फिर FSSAI के बिहाफ पर स्वीटी बेहरा FIR कैसे कर सकती हैं? क्या वो FSSAI से बड़ी हैं? ये किस विशेष नियम या प्रावधान के तहत किया गया? क्या यह किसी तरह का विशेषाधिकार है, जो उन्हें मिला है?
अपनी ‘छद्म’ पहचान को लेकर खुरपेंच के संचालक कहते हैं,
हमें अपनी पहचान को लेकर कोई डर नहीं है. हम सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे, जिससे हमारी पहचान सुरक्षित बनी रहे. हमारा मुख्य मकसद ये है कि हम जो मुद्दे उठा रहे हैं, जो आरोप लगा रहे हैं उसकी उचित जांच हो और उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाए.

उनका ये भी कहना है कि अगर वो किसी भी स्तर पर गलत साबित होते हैं तो पूरे देश से बिना किसी हिचकिचाहट के माफी मांग लेंगे. FSSAI वाले मामले पर उनकी आपत्ति है कि दस्तावेजों के साथ उन्होंने संस्थान में नियुक्तियों में फर्जीवाड़े पर सवाल उठाया था लेकिन उस पर कार्रवाई करने की बजाय संस्थान उनके पीछे पड़ गया. दिल्ली पुलिस ये जानने में लग गई कि ये दस्तावेज किसने लीक कराए हैं.
खुरपेंच ने कथित तौर पर FSSAI की इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट सोशल मीडिया पर डाली है. अब दिल्ली पुलिस ये खंगालने में लगी है कि FSSAI के अंदर से डॉक्यूमेंट्स किसने लीक किए. हालांकि, ये किसी युद्ध के क्लासीफाइड डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं. कोई RTI डालता तब भी ये शायद मिल जाते.
यूजर ने दावा किया कि एफआईआर में कहीं भी आरोपों को गलत नहीं बताया गया है. यूजर ने कहा कि खुशी की बात ये है कि डिपार्टमेंट और पुलिस ने उनके डॉक्यूमेंट्स को सही मान लिया.
ये डॉक्यूमेंट्स मिले कैसे?इस सवाल के जवाब में खुरपेंच के संचालक ने दी लल्लनटॉप को बताया कि इसमें ढेर सारी जानकारी उन्होंने RTI के जरिए हासिल की. इसके अलावा, कुछ बातें गोपनीय स्रोतों से पता चलीं लेकिन उन स्रोतों की पहचान सुरक्षा और नैतिक कारणों से उजागर नहीं की जा सकती. उन्होंने बताया कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं. इस केस को उजागर करने के लिए उन्होंने शुरुआत में मामले से जुड़े सारे दस्तावेज़ जुटाए. उनमें जो जानकारियां थीं, उन्हें आपस में सावधानीपूर्वक जोड़ा गया. इसके बाद नतीजों का आधिकारिक अधिसूचनाओं के साथ मिलान किया. इसमें पता चला कि 26 दिसंबर 2024 को FSSAI ने 6 सीनियर अधिकारियों की नियुक्ति की जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया था.
FSSAI की अपनी रिपोर्ट में जो नतीजे सामने आए, उसके अनुसार इन छह अधिकारियों में से केवल एक ने ही सही और वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. बाकी के 5 अधिकारियों ने भ्रामक या गलत जानकारी दी थी. इस रिपोर्ट की एनालिसिस के बाद उन्होंने बार-बार FSSAI को सचेत किया और अपनी चिंताएं जताईं लेकिन प्राधिकरण ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
खुरपेंच ने बताया कि इसके अलावा भी उनके पास कई दस्तावेज हैं, जो ऑनलाइन रिसर्च से मिले हैं. ये भी FSSAI के अंदर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं. FIR पर उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम इस मामले पर लगातार काम कर रही है. एक विस्तृत जवाब तैयार किया जा रहा है.
इस पूरे मामले ने देश में व्हिसलब्लोअर्स की भूमिकाओं को लेकर भी चिंता पैदा की है. व्हिसलब्लोअर्स वो व्यक्ति या संगठन होते हैं जो सरकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम करते हैं. खुरपेंच के संचालक कहते हैं कि आजकल व्हिस्लब्लोअर का काम बहुत कठिन है. RTI जैसे नागरिकों के अकाउंटेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी टूल का इंप्लीमेंटेशन बहुत खराब है. जो देश हित में इंटरनल इंफॉर्मेशन पहुंचाते है, उनके ऊपर FIR और डिपार्टमेंटल इंक्वायरी की तलवार हमेशा लटकती है.
बता दें कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. केस में धारा 316(4) और 3(5) को शामिल किया गया है. इसके साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 72A भी एफआईआर में है, जो गोपनीयता और निजता के उल्लंघन से संबंधित है.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चल रही जांच के तहत साइबर फोरेंसिक, वित्तीय लेन-देन और संभावित विदेशी संबंधों की जांच की जा रही है. स्वीटी बेहरा के ऑफिस में हमने फोन किया, तो हमें जानकारी दी गई कि वे मीटिंग में हैं और लगभग 2 घंटे बाद दोबारा फोन करने के लिए कहा गया. करीब 2 घंटे बाद उनके ऑफिस में फिर फोन किया, तो किसी ने उठाया नहीं. हमने FSSAI, स्वीटी बेहरा, कविता रामासामी, भरत पचिया और वैदेही संजय कालजुंकर से उनका पक्ष जानने के लिए ईमेल किया है. उनका जवाब आने पर खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.
वीडियो: डॉनल्ड ट्रंप ने किस पर लगाया 100 फीसदी टैरिफ, भारत पर क्या असर पड़ेगा?

.webp?width=60)
