लीबिया के पूर्व शासक गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की घर में घुसकर हत्या
लीबिया में पूर्व शासक मुअम्मर अल-गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई. कभी सत्ता का मजबूत दावेदार माने जाने वाले सैफ की मौत ने देश की सियासत में फिर हलचल बढ़ा दी है. हमला घर में हुआ या बॉर्डर पर, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठी है.

लीबिया से एक बड़ी खबर आई है. देश के पूर्व शासक मुअम्मर अल-गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. गद्दाफी की राजनीतिक टीम ने उनकी मौत की पुष्टि की है. 53 साल के सैफ की 3 फरवरी को ज़िंटान शहर में हत्या हुई. कभी उन्हें गद्दाफी का राजनीतिक वारिस माना जाता था.
घर में घुसकर मारी गोली?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सैफ के वकील ने बताया कि वह ज़िंटान स्थित अपने घर में थे, तभी हमला हुआ. चार हमलावरों ने उनके आवास पर धावा बोला और गोली मार दी. हमलावर कौन थे, इसका अब तक पता नहीं चल पाया है.
हालांकि सैफ की बहन का दावा थोड़ा अलग है. उनका कहना है कि सैफ की मौत लीबिया-अल्जीरिया बॉर्डर के पास हुई. इस विरोधाभास के बीच गद्दाफी की राजनीतिक टीम ने मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है.
कौन थे सैफ अल-इस्लाम?मुअम्मर अल-गद्दाफी ने 1969 से 2011 तक लीबिया पर शासन किया. 2011 में गृहयुद्ध भड़का, गद्दाफी सत्ता से हटे और बाद में मारे गए. उसी दौर में सैफ अल-इस्लाम का नाम भी तेजी से उभरा. उन्हें देश के सबसे ताकतवर और विवादित चेहरों में गिना जाता था.
पिता के शासनकाल में सैफ ने पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने में भूमिका निभाई थी. लेकिन गृहयुद्ध के बाद तस्वीर बदल गई.
जेल, आरोप और मौत की सजा2011 के तख्तापलट के दौरान सैफ को ज़िंटान में पकड़ लिया गया था. करीब छह साल तक उन्हें बंदी बनाकर रखा गया. अंतरराष्ट्रीय अदालत ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए. आरोप था कि गृहयुद्ध को दबाने में कठोर तरीके अपनाए गए.
2015 में त्रिपोली की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई. बाद में 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश भी की, लेकिन चुनाव प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई.
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जब डगमगाया गद्दाफी का राज
42 साल तक सत्ता में रहने वाले गद्दाफी के खिलाफ फरवरी 2011 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए. सुरक्षा बलों की गोलीबारी के बाद हालात और बिगड़े, और आंदोलन सशस्त्र संघर्ष में बदल गया.
राज्य टीवी पर गद्दाफी ने साफ कहा कि वह सत्ता नहीं छोड़ेंगे. प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बताया और आरोप लगाया कि वे अल-कायदा से प्रभावित हैं.
नाटो के हस्तक्षेप के साथ संघर्ष और तेज हुआ. अंतरराष्ट्रीय अदालत ने गद्दाफी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया. फिर 20 अक्टूबर 2011 को विद्रोहियों ने सिर्ते शहर पर कब्जा कर लिया, जो उनका आखिरी बड़ा गढ़ था. यहीं गद्दाफी पकड़े गए और मारे गए.
अब सालों बाद, उनके बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या ने लीबिया की सियासत को फिर सुर्खियों में ला दिया है. सबसे बड़ा सवाल यही है, यह एक टारगेटेड किलिंग थी या लीबिया की पुरानी दुश्मनियों का नया चैप्टर?
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