बेटे का रिजल्ट लेने स्कूल गए थे, गेट से निकलते ही मौत हो गई, CCTV में कैद हुई आखिरी सांस
सोनारी गांव के रहने वाले दीपांकर बोरदोलोई अपने UKG में पढ़ने वाले बेटे का रिजल्ट लेने स्कूल आए थे. सब कुछ बिल्कुल सामान्य था. स्कूल से रिजल्ट लिया, बाहर की तरफ बढ़े और जैसे ही स्कूल के गेट तक पहुंचे, अचानक चक्कर आया और वहीं ज़मीन पर गिर पड़े.

असम के जोरहाट में एक ऐसा दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसे देखकर आंखें नम हो जाती हैं. एक पिता, जो अपने छोटे से बेटे का रिजल्ट लेने स्कूल पहुंचा था, वहीं उसकी जिंदगी थम गई.
मामला जोरहाट के सैमफोर्ड स्कूल का है. सोनारी गांव के रहने वाले दीपांकर बोरदोलोई अपने UKG में पढ़ने वाले बेटे का रिजल्ट लेने स्कूल आए थे. सब कुछ बिल्कुल सामान्य था. स्कूल से रिजल्ट लिया, बाहर की तरफ बढ़े और जैसे ही स्कूल के गेट तक पहुंचे, अचानक चक्कर आया और वहीं ज़मीन पर गिर पड़े.
स्कूल में मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही अफरातफरी मच गई. आनन-फानन में दीपांकर को जोरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पूरी घटना स्कूल के CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जो अब सोशल मीडिया पर भी सामने आई है.
आजतक से जुड़े पूर्णा बिकाश बोरा की रिपोर्ट के मुताबिक दीपांकर बोरदोलोई की उम्र सिर्फ 35 साल थी. वो तेओक डिवीजन के तहत सिंचाई विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात थे. एक जिम्मेदार अफसर, एक पिता और एक परिवार का सहारा, सब कुछ एक पल में खत्म हो गया.
एनडीटीवी की रिपोर्ट बताती है कि दीपांकर की मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट मानी जा रही है. कार्डियक अरेस्ट की सबसे खतरनाक बात यही होती है कि ये बिना किसी चेतावनी के आता है. इंसान चलता-फिरता रहता है और अचानक गिर पड़ता है. अगर उसी वक्त CPR मिल जाए तो जान बच सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में वक्त हाथ से निकल जाता है.
दीपांकर की अचानक हुई मौत से स्कूल में मातम पसरा है और परिवार गहरे सदमे में है. खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था.
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पहले भी हुई है घटना?ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं. पिछले साल 2024 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से भी ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया था. वहां क्लास 2 में पढ़ने वाला 6 साल का जगत राम लंच के वक्त पानी पीने के लिए हैंडपंप पर गया था. अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा. अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया. उस वक्त बच्चों ने आशंका जताई थी कि उसने बैलून निगल लिया था, हालांकि डॉक्टरों ने इससे इनकार किया था.
स्कूल हो या सड़क, दफ्तर हो या घर, अचानक गिरती ये जिंदगियां एक सवाल छोड़ जाती हैं. क्या हम ऐसे हालात के लिए तैयार हैं? और क्या हमें CPR जैसी बेसिक मेडिकल मदद हर जगह सीखनी और सिखानी नहीं चाहिए?
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