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टॉर्च की रोशनी में महिला की सड़क पर डिलीवरी हुई, वजह अस्पताल का गेट बंद था

अस्पताल का गेट बंद होने पर सड़क पर महिला के प्रसव की घटना का मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. उन्होंने इस घटना पर स्वास्थ्य अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

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30 मई 2026 (अपडेटेड: 30 मई 2026, 07:31 PM IST)
Faridabad hospital delivery
सड़क पर प्रसव का वीडियो आया था सामने. (फोटो- X)
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21वीं सदी का 26वां साल है. आप सोच भी सकते हैं कि अब भी किसी महिला को सड़क पर बच्चे को जन्म देना पड़ सकता है. दुनिया भर के अस्पताल, जननी सुरक्षा जैसी तमाम योजनाओं के बावजूद को कोई बच्चा टॉर्च की रोशनी में सड़क पर पैदा हो? ये पूरा सीन हमारी-आपकी सोच में आए या न आए लेकिन हरियाणा का फरीदाबाद इस गले न उतरने वाली हकीकत का गवाह है. पार्किंग एरिया में बच्चे के जन्म का वीडियो भी सामने आया है. दर्द से कराहती महिला का अस्पताल के पार्किंग एरिया में टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराई गई क्योंकि हॉस्पिटल का मेन गेट बंद था. अब हरियाणा के मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को संज्ञान में लिया और प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों से 12 दिनों में इस घटना पर रिपोर्ट मांगी.

क्या हुआ था?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल एक दर्दनाक वीडियो के वायरल होने के बाद मानवाधिकार आयोग के पास एक शिकायत आई. बताया गया कि एक महिला 15-16 मई की रात को प्रसव पीड़ा की हालत में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 में सरकारी अस्पताल में पहुंची थी. आरोप है कि पीएचसी का मेन गेट बंद था. इस वजह से महिला को तत्काल मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिल पाया. महिला की हालत लगातार खराब होती जा रही थी. मजबूरी में परिवार ने सड़क पर ही महिला की डिलीवरी कराने का फैसला किया. 

इसके बाद मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट में महिला का प्रसव कराया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो लोग आक्रोशित हो गए. मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया. हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने फरीदाबाद की इस घटना का गंभीर संज्ञान लिया.

आयोग ने कहा कि राज्य सरकार दावा करती है कि प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना पूरी तरह से लागू है. गर्भवती महिलाओं को फ्री में ट्रीटमेंट दिया जा रहा है लेकिन उसी राज्य में एक महिला के अस्पताल के गेट पर ही इलाज से वंचित कर दिया गया. ये दर्दनाक घटना है और आदिम काल की याद दिलाती है, जब मेडिकल फेसिलिटीज के अभाव में घर पर ही डिलीवरी कराई जाती थी. 

हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने 25 मई को इस संबंध में एक आदेश जारी किया. उन्होंने प्रदेश के बड़े हेल्थ अफसरों से 12 अगस्त तक मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी. आदेश में फरीदाबाद के सिविल सर्जन को ‘कारण बताओ’ नोटिस भेजा गया. उनसे यह भी पूछा गया कि वो बताएं कि 'मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए मुआवजे की सिफारिश क्यों न की जानी चाहिए.

सरकार ने कराई जांच

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग भी जागा. मामले की हाईलेवल जांच कराई गई. अस्पताल में नाइट एंट्री को लेकर नियम भी बदले गए. साथ ही अफसरों ने बताया कि मां और नवजात शिशु दोनों स्वस्थ हैं. राज्य सरकार ने भी घटना के हवाले से आदेश जारी कर दिया कि अस्पतालों के ओपीडी और इमरजेंसी गेट 24 घंटे खुले रहेंगे. आपातकालीन सेवाओं के लिए परमानेंट एक एंबुलेंस तैनात करने के लिए भी कहा ताकि आने वाले दिनों में ऐसी चूक न हो. 

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