'NEET में फेल हो गया, इसलिए...', सेना के हत्थे चढ़े 'फर्जी ब्रिगेडियर' ने क्या कहानी बता दी
शाहजहांपुर में 21 वर्षीय युवक आर्यन वर्मा खुद को सेना का ब्रिगेडियर बताकर वर्दी, फर्जी आई-कार्ड और सुरक्षा दस्ते के साथ घूम रहा था. सेना ने अभियान चलाकर उसे पकड़ लिया और आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया.

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक फर्जी ब्रिगेडियर गिरफ्तार किए गए हैं. वो लाव-लश्कर के साथ बाकायदा इलाके में गश्त करते थे. वर्दी है. गाड़ी भी है. गाड़ी पर आर्मी हेडक्वार्टर का फ्लैग भी लगा है. ड्राइवर है. दो फर्जी NSG कमांडोज साथ चलते हैं. फर्जी वाले ढेर सारे आई कार्ड भी हैं. माने वो सारे तामझाम जो एक असली अफसर के पास हो सकते हैं, सब उसके पास थे. फिर भी ये सब चालाकी ज्यादा दिन टिकी नहीं. सेना ने इनका भंडाफोड़ कर दिया. लेकिन कैसे? सब बताते हैं. आगे-आगे पढ़ते जाइए.
पिछले दो महीनों से खुफिया जानकारी मिल रही थी कि शाहजहांपुर और उसके आसपास के इलाकों में एक संदिग्ध व्यक्ति फर्जी अफसर बनकर घूम रहा है. शाहजहांपुर स्टेशन हेडक्वार्टर के एडमिनिस्ट्रेटिव कमांडेंट कर्नल जेएस जगलान ने वहां के रिटायर्ड सैनिकों के साथ मिलकर एक प्लान बनाया. ताकि संदिग्ध की पहचान की जा सके. इसके लिए 12 जून को एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया गया. संदिग्ध को बिना भनक लगे शहीद म्यूजियम (Shaheed Museum) में एक इवेंट में उसे बुलाया गया.
कहा गया कि स्टूडेंट्स को सम्मानित करना है और उन्हें मोटिवेशनल स्पीच देनी है. ये साहब भी लाव-लश्कर के साथ पहुंच गए. बाकायदा ब्रिगेडियर की वर्दी पहने हुए आए. साथ में दो और लोग भी थे जो नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो होने का नाटक कर रहे थे. यहां अधिकारियों ने उसे और उसके साथियों को पहचान लिया और तुरंत हिरासत में ले लिया.
संदिग्ध की पहचान 21 साल के आर्यन वर्मा के रूप में हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, वो टाटा हैरियर गाड़ी से सफर कर रहा था, जिस पर वन-स्टार वाली प्लेट और Army Headquarters का झंडा लगा हुआ था. इस ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने उसके पास से नकली आई-कार्ड, एक नकली एयर पिस्टल, एक एएमसी रेजिमेंटल केन और सेना के मेडल्स बरामद किए. इन सभी चीज़ों की शॉपिंग उसने नोएडा, गुरुग्राम से की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, आर्यन ने अपने घर पर भी ब्रिगेडियर वाला नेम प्लेट लगा रखा था.

आर्यन वर्मा, उसके साथियों और बरामद किए गए सामान को आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के लिए शाहजहांपुर के सदर थाने को सौंप दिया गया है.
अब बात कि आखिर उसने ये सब क्यों किया? क्या मजबूरी रही होगी?
आर्यन शाहजहांपुर के रोजा थाना क्षेत्र के दुर्गा एनक्लेव कॉलोनी का रहने वाला है. वो इसी इलाके में फर्जी ब्रिगेडियर बनकर घूम रहा था. संवेदनशील इलाका है. यहां सेना की पूरी एक ब्रिगेड मौजूद है. इसके अलावा डीएम और एसपी के आवास भी हैं. आर्यन का कहना है कि वो नीट एग्जाम क्वालिफाई नहीं कर पाया. उसकी मां दिल की मरीज हैं इसलिए उसने घर पर झूठ बोल दिया कि ‘मैं AFMC में डॉक्टर बन गया हूं.’
खैर, इस मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए सेना की इंटेलीजेंस टीम उससे पूछताछ कर रही है. इसके अलावा बरेली से सेना की स्पेशल इंटेलिजेंस टीम भी पहुंच रही है, जो पूछताछ करेगी. सेना कर्नल जे एस जगरन का कहना है कि उन्होंने कई बार इस फर्जी ब्रिगेडियर को देखा था और वो उसकी तलाश में थे. पर वो हर बार मौके से फरार हो जाता था. लेकिन इसकी चालाकी ज्यादा दिन तक चली नहीं. वैसे भी नियम कहता है कि भारतीय सेना में ब्रिगेडियर की भारी-भरकम वर्दी के लिए कम से कम 25 साल की कमीशंड सर्विस जरूरी होती है.
मतलब, अगर आप 21 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो भी गए तो बाल पकते-पकते 46-47 की उम्र में जाकर कहीं ‘ब्रिगेडियर साहब’ कहलाने का नंबर आता है. अब ऐसे कड़े नियमों के बीच, अगर अचानक 21 साल का लड़का सीधे ब्रिगेडियर की वर्दी और स्टार लगाकर घूमता दिख जाए तो शक लाज़मी है.
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