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हीटवेव से एक दिन में 3400 लोगों की मौत का अनुमान, रिपोर्ट में भीषण गर्मी का डरावना आंकड़ा

Heatwave से होने वाली Deaths को आमतौर पर गर्मी से हुई मौत के तौर पर रजिस्टर नहीं किया जाता. बल्कि इन मौतों को हार्ट अटैक, सांस लेने में दिक्कत आदि के तौर पर जोड़ा जाता है. यही वजह है कि लू से होने वाली मौतों के असल आंकड़े काफी डराने वाले हैं.

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3 जून 2026 (अपडेटेड: 3 जून 2026, 01:24 PM IST)
excess heatwave caused 3400 excess deaths in india
हीटवेव से देश में मौतों का आंकड़ा बढ़ गया है (PHOTO-India Today)
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साल 2026 की गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है. देश के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री के पार जा चुका है. एक समय था जब 40 डिग्री पार करने पर हेडलाइन बन जाया करती थी. लेकिन इंसान ने नेचर के साथ जो छेड़छाड़ की है, उसका नतीजा हमें 5 डिग्री ज्यादा तापमान से चुकाना पड़ रहा है. इस साल भारत में हीटवेव अब तक इतना खतरनाक रहा है कि हर दिन हजारों लोग गर्मी या उसकी वजह से हुई समस्या से मर रहे हैं. एक रिसर्च की मुताबिक 2026 में हीटवेव की वजह से हर दिन करीब 3400 और मौतें होने का अनुमान है. यानी हर दिन जितनी मौतें हुआ करती थीं, उनमें 3 हजार से अधिक लोग और जुड़ सकते हैं.

2024 में भी 50 डिग्री पहुंच गया था पारा 

जैसा कि हमने अभी समझा, एक समय था जब भारत में 40 डिग्री तापमान भी बड़ी बात थी. लेकिन बीते कुछ सालों से गर्मी का आलम ये है कि 40 डिग्री तापमान तो आम लगने लगा है. 2024 में राजस्थान के कुछ इलाकों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच गया था. जबकि दिल्ली जैसे शहरों ने अपनी सबसे गर्म रात देखी थी.

2026 में देखें तो स्थिति और खराब होती जा रही है. क्लाइमेट चेंज को लेकर भले ही बड़ी-बड़ी बातें और दावे हों, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि इंसान ने जंगल काट कर कंक्रीट के जंगल बना लिए हैं. यही वजह है कि दिन की धूप के बाद धरती गर्म हो जाती है, लेकिन रात में भी ठंडी नहीं हो पाती. इस साल दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भीषण गर्मी पड़ी. दिन की धूप के बाद रात में भी पारा 35-40 के बीच रहने लगा.

मौत गर्मी से, लेकिन रिकॉर्ड में हार्ट अटैक

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार दीपू राय की रिपोर्ट कहती है कि हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़े अक्सर कम होते हैं. वजह ये है कि इन मौतों का कारण हीटवेव, लू लगना या गर्मी कभी बताया ही नहीं जाता. सिस्टम ऐसा बना हुआ है कि इन मौतों को हीटवेव डेथ के तौर पर दर्ज ही नहीं किया जाता. इसके बजाय, दिल का दौरा, सांस लेने में तकलीफ या दूसरे कारणों से हुई मौत के तौर पर दिखाया जाता है.

जर्नल फ्रंटियर्स इन एनवायर्नमेंटल हेल्थ में पब्लिश नई स्टडी के अनुसार, बहुत ज्यादा गर्मी के एक दिन से देश भर में लगभग 3,400 और मौतें होने का अनुमान है. आंकड़े देखें तो पांच दिन की हीटवेव के लगभग 30 हजार मौतों की आशंका है.

अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों के जिलों में, किसी एक बेहद गर्म दिन में 250 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें हुईं जो अपने आप में डरावना है. ऐसा ही रहा तो आने वाले कुछ सालों में शायद एयर कंडीशनर भी बस एक डिब्बा बनकर रह जाएंगे.

वीडियो: मुंबई में भीषण गर्मी से झुलसेंगे लोग, अगले दो दिन हीटवेव की चेतावनी

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