रैगिंग से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, कोर्ट पहुंच गया स्टूडेंट, अब कॉलेज को लौटानी होगी ढाई लाख रुपये फीस
सीनियर्स की धमकियों के कारण वह चुप रहा और उसने अपने माता-पिता को भी इस बारे में नहीं बताया. आरोप लगाया कि एडमिशन के समय यह भरोसा दिलाया गया था कि संस्थान में रैगिंग-फ्री माहौल है, लेकिन उसके हैरासमेंट को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए.

हरियाणा के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यानी Haryana State Consumer Disputes Redressal Commission ने बेंगलुरु के एक इंजीनियरिंग कॉलेज को आदेश दिया है कि वह कंप्यूटर साइंस के एक स्टूडेंट की 2.42 लाख रुपये की फीस वापस करे. स्टूडेंट को सीनियर्स की रैगिंग के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. उसने इस परेशानी और अपमान को न सहने का फैसला किया और कोर्स शुरू होने के कुछ ही हफ्तों बाद घर वापस आ गया. स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि उसे कॉलेज छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. उसने अपनी मर्जी से कॉलेज नहीं छोड़ा. लिहाजा उसे उसकी जमा की गई फीस वापस मिलनी चाहिए.
कुल 2.42 लाख रुपये कॉलेज में जमा किएअंबाला के रहने वाले स्टूडेंट ने 2018 में कॉलेज शुरू किया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उसने COMEDK UGET 2018 के एंट्रेंस एग्जाम में 28 हजार 204 रैंक लाने के बाद एडमिशन लिया था. रैंक के आधार पर उसे बेंगलुरू के AMC इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिला. उसने एडमिशन प्रोसेस में एडमिशन फीस, ट्यूशन फीस और एग्जाम फीस के साथ कई और चीजों की फीस भरी. कुल मिलाकर उसने अपनी सभी ओरिजिनल मार्कशीट के साथ कुल 2.42 लाख रुपये कॉलेज में जमा किए.
इसके बाद उसने रैगिंग की शिकायत की. शिकायत में कहा कि कॉलेज में शामिल होने के शुरुआती महीनों में वह रेगुलर क्लास अटेंड करता था और उसकी अटेंडेंस पूरी रहती थी. उसने आरोप लगाया कि हॉस्टल में सीनियर छात्रों ने उसके साथ बार-बार रैगिंग की. लगातार उसकी बेइज्जती की. यहां तक कि सीनियर उसे डराने-धमकाने भी लगे. उसका कहना था कि यह उत्पीड़न और रैगिंग इतनी गंभीर हो गई कि वह डिप्रेशन में चला गया. उसने पढ़ाई-लिखाई और ठीक से खाना-पीना छोड़ दिया.
माता-पिता को डर से नहीं बतायाशिकायत के मुताबिक, सीनियर्स की धमकियों के कारण छात्र चुप रहा और उसने अपने माता-पिता को भी इस बारे में नहीं बताया. उसने आरोप लगाया कि एडमिशन के समय यह भरोसा दिलाया गया था कि संस्थान में रैगिंग-फ्री माहौल है, लेकिन उसके हैरसमेंट को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए.
इसके बाद छात्र ने कॉलेज छोड़ दिया. उसके परिवार ने कॉलेज में जमा की गई फीस वापस मांगी है. साथ ही बच्चे के ओरिजिनल एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स भी वापस करने की मांग की है.
शिकायत के अनुसार, कॉलेज ने पैसे वापस करने से इनकार कर दिया और डॉक्यूमेंट्स भी वापस नहीं किए. मामले के बारे में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) को भी बताया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. कोई और रास्ता न होने पर छात्र के परिवार ने अंबाला में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन का रुख किया और संस्थान पर सर्विस में कमी का आरोप लगाया. अंबाला के जिला उपभोक्ता आयोग ने 2019 का फैसला स्टूडेंट के हक में दिया. इसके बाद इस आदेश को कॉलेज ने स्टेट लेवल के कमीशन में चुनौती दी.
स्टूडेंट के हक में आया फैसलाकमीशन के न्यायिक सदस्य एसपी सूद और सदस्य एससी कौशिक ने AMC इंजीनियरिंग कॉलेज और उसके अधिकारियों द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई की. यह अपील अंबाला के जिला उपभोक्ता आयोग के 2019 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने 8 मई को कहा,
स्टूडेंट को हॉस्टल में अपने सीनियर्स की वजह से परेशानी और अपमान का सामना करना पड़ा, जिससे वह डिप्रेशन में चला गया. सीनियर्स की रैगिंग के कारण उसे अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. अपील करने वालों ने इस बात को चुनौती नहीं दी है और वे इस मामले का खंडन करने में भी नाकाम रहे हैं.
अपील खारिज करने के साथ राज्य आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अपील दायर करते समय कॉलेज ने जो 25 हजार रुपये की कंपल्सरी फीस दी थी, जांच के बाद वो छात्र को वापस कर दी जाए.
वीडियो: दून मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट ने सीनियर पर लगाया रैगिंग का आरोप, क्या एक्शन हुआ?

