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वोटर आईडी लिंक होगा Aadhaar से, इस पर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से क्या मांग कर दी?

UIDAI और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई. इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा UIDAI के सीईओ शामिल थे. बैठक में यह तय किया गया कि सभी कानूनों और कोर्ट के निर्दशों का पालन करते हुए मतदाता फोटो पहचान पत्र को आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा.

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वोटर आईडी कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के मुद्दे पर राहुल गांधी ने क्या सुझाया? (तस्वीर:PTI)
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शुभम सिंह
19 मार्च 2025 (Published: 08:40 AM IST)
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वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड को लिंक करने की कवायद जल्द ही शुरू होने वाली है. यह बात निर्वाचन आयोग और यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के अधिकारियों के बीच हुई बैठक से निकलकर आई है. चुनाव आयोग ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया है. इसके बाद इस मसले पर राजनीति तेज हो गई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?  

UIDAI और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों के बीच नई दिल्ली में 18 मार्च को एक बैठक हुई. बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा UIDAI के सीईओ शामिल थे. इस बैठक में यह तय किया गया कि सभी कानूनों और कोर्ट के निर्दशों का पालन करते हुए मतदाता फोटो पहचान पत्र को आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा. इस बात की जानकारी आयोग के एक पत्र से निकलकर आई है. पत्र में लिखा गया है,

चुनाव आयोग 1950 के अनुच्छेद 326 और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार वोटर आईडी कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने की कवायद शुरू करेगा. अनुच्छेद 326 के अनुसार, वोटिंग का अधिकार केवल भारत के नागरिक को ही दिया जा सकता है जबकि आधार केवल व्यक्ति की पहचान है. इसलिए, यह फैसला लिया गया कि आधार के साथ मतदाता फोटो पहचान पत्र को जोड़ने का फैसला सभी कानूनों के अनुसार लिया जाए.

इस मसले पर UIDAI और ECI के एक्सपर्ट के बीच तकनीकी परामर्श जल्द ही शुरू होने वाला है.

राहुल गांधी के पोस्ट पर अमित मालवीय की प्रतिक्रिया

चुनाव आयोग के पत्र जारी करने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘एक्स’ हैंडल से एक पोस्ट किया है. उन्होंने कहा,

चुनाव आयोग ने आज आधार को मतदाता पहचान-पत्रों से जोड़ने का एलान किया है. कांग्रेस और INDIA गठबंधन के लोग मतदाता सूचियों के मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं. इसमें वोटर लिस्ट में असामान्य रूप से अधिक संख्या में नाम जोड़ा जाना, अप्रत्याशित रूप से हटाना शामिल है. इसके अलावा डुप्लिकेट वोटर आईडी कार्ड के आंकड़े भी शामिल हैं.

राहुल ने आगे लिखा,

आधार से डुप्लिकेट मतदाता पहचान-पत्र की समस्या हल हो सकती है लेकिन गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों को आधार लिंक करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी भारतीय अपने वोटिंग अधिकार से वंचित न रह जाए. साथ ही गोपनीयता संबंधी चिंताओं का भी हल निकाला जाए.

इसके साथ ही राहुल ने मांग की कि महाराष्ट्र 2024 विधानसभा और लोकसभा चुनावों की पूरी वोटर लिस्ट को सार्वजनिक रूप से साझा करके, नाम जोड़ने और हटाने के मुद्दे पर भी प्रकाश डालना चाहिए.

बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने राहुल गांधी के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा,

राहुल गांधी को गरीब और कमजोर तबके के लोगों को बचकाना नहीं समझना चाहिए. कांग्रेस ने UPI और डिजिटल पेमेंट का जमकर विरोध किया था. पार्टी ने दलीले दीं कि गरीब लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. पी. चिदंबरम का संसद में इस संबंध में दिया गया भाषण ऐतिहासिक हो चुका है.

उन्होंने आगे लिखा,

साल 2023-24 में डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शंस की कुल संख्या 18,737 करोड़ तक पहुंच गई. जबकि 2017-18 में यह 2,071 करोड़ थी. यानी हर साल लगभग 44% की वृद्धि. इन ट्रांजैक्शंस की कुल कीमत भी 2017-18 में 1,962 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 3,659 लाख करोड़ रुपये हो गई. मतलब हर साल 11% का इजाफा हुआ. इसमें UPI का बहुत बड़ा हाथ रहा है.

मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी को INDIA गठबंधन की कभी सहयोगी रहीं ममता बनर्जी की पार्टी की ज्यादा चिंता करनी चाहिए क्योंकि TMC के सामने अपने कोर वोटर बेस अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या को खोने का खतरा है जो फर्जी वोटर कार्ड के जरिए मतदान करते आए हैं.

बता दें, यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिव सेना (UBT) समेत कई राजनीतिक दलों ने एक ही मतदाता पहचान पत्र नंबर वाले वोटर्स का मुद्दा उठाया है. राहुल गांधी ने बीते दिनों महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गड़बड़ियों का आरोप लगाया था. उनका दावा था कि पांच महीने के भीतर राज्य की मतदाता सूची में 39 लाख से ज्यादा वोटर जोड़े गए. उन्होंने आयोग से फाइनल लिस्ट की मांग की थी. 

चुनाव आयोग ने माना था कि कुछ राज्यों में खराब अल्फान्यूमेरिक सीरीज के कारण गलती हुई थी. इससे एक ही नंबर दोबारा जारी हो गए थे, लेकिन इसे फर्जीवाड़ा नहीं कहा जा सकता.

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