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अल नीनो के चलते कमजोर मानसून के आसार, कम बारिश तोड़ेगी किसानों की कमर!

El Nino Effect: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कम मानसून की आशंका जताई है, जिसका मुख्य कारण अल नीनो (El Nino) को माना जा रहा है. कमजोर बारिश से धान, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

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30 मई 2026 (अपडेटेड: 30 मई 2026, 10:05 AM IST)
Monsoon Worries Grow for Farmers (Photo - Reuters)
IMD ने इस साल सामान्य से कम मानसून की संभावना जताई है (फोटो- PTI)
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देश के करोड़ों किसानों की नजरें हर साल मानसून पर टिकी होती हैं, लेकिन इस बार मौसम के संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कम मानसून की संभावना जताई है. इसके पीछे अल नीनो (El Nino) की संभावित वापसी को प्रमुख कारण माना जा रहा है. अनुमान सही साबित हुआ, तो इसका सबसे बड़ा असर उन किसानों पर पड़ सकता है जिनकी खेती आज भी बारिश पर निर्भर है.

भारत की 60 फीसदी से ज्यादा खेती की जमीन आज भी बारिश पर निर्भर करती है. ऐसे में मानसून में थोड़ी भी कमी किसानों की लागत, उत्पादन और कमाई पर सीधा असर डालती है. शुक्रवार, 29 मई को जारी IMD की प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) का लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान है, जिसे 'सामान्य से कम' श्रेणी में रखा गया है. यानी इस बार मानसून में आम सालों के मुकाबले कम बारिश होने का अनुमान है, जिससे खेती और पानी पर असर पड़ सकता है

कौन से राज्य सबसे ज्यादा खतरे में?

बारिश का कम होने की आशंका उत्तर,पश्चिम और मध्य भारत के कई कृषि राज्यों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में धान और अन्य खरीफ फसलें काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर समेत कई इलाकों में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया गया है. इन राज्यों में हालात काफी चिंताजनक हो सकते हैं.

उम्मीद से कम बारिश रही, तो क्या?

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर बारिश उम्मीद से कम रहती है तो धान, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा मिट्टी में नमी की कमी के कारण गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों पर भी असर पड़ सकता है. कमजोर मानसून किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च करने के लिए मजबूर कर सकता है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी और मुनाफा घट सकता है.

हालांकि, सभी क्षेत्रों के लिए तस्वीर एक जैसी नहीं है. मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि तमिलनाडु और चेन्नई समेत दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. इससे एक तरफ जहां कुछ क्षेत्रों में सूखे की आशंका है, तो वहीं दूसरी ओर बाढ़ और जलभराव की चुनौती भी खड़ी हो सकती है.

अल नीनो ने पहले भी बढ़ाई मुश्किलें

भारत ने इससे पहले भी अल नीनो के प्रभाव का सामना किया है. इंडिया टुडे के मुताबिक, 2015-16 के दौरान आए शक्तिशाली अल नीनो के समय मानसून बारिश दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) के केवल 86 फीसदी तक सिमट गई थी, जिससे कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई थी.

2023 के अल नीनो के दौरान अगस्त महीने में देशभर में 36 फीसदी तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी. 2009 में कमजोर अल नीनो के बावजूद भारत में मानसून वर्षा घटकर दीर्घकालिक औसत के 78.2 फीसदी पर पहुंच गई थी, जो उस समय 37 सालों का सबसे निचला स्तर था.

क्या राहत की कोई उम्मीद है?

मौसम वैज्ञानिकों ने कुछ अच्छे संकेत भी दिए हैं उनके अनुसार, मानसून के आखिरी चरण में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) विकसित हो सकता है. ऐसी स्थिति भारत में बारिश को बढ़ावा देती है और अल नीनो के कुछ नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकती है.

IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में हीटवेव का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है और मध्य भारत में भी 30 मई से राहत मिलने की संभावना है. IMD ने 29 से 31 मई के बीच उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली तेज आंधी और हवाओं की चेतावनी जारी की है. 

30 मई को बिहार, अंडमान-निकोबार द्वीप और ओडिशा में बहुत तेज बारिश की संभावना है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तराखंड, झारखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक और नॉर्थ-ईस्ट के कई राज्यों में तेज बारिश होने का अनुमान है. इनमें से कुछ राज्यों में ओले भी पड़ सकते हैं.

इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली बहुत तेज तूफान की आशंका है. ओडिशा, झारखंड और राजस्थान में भी आंधी और तेज हवाएं चल सकती हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और विदर्भ के कई इलाके हीटवेव की चपेट में आ सकते हैं.

IMD ने कहा है कि अगले 2-3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. ऐसे में अल नीनो की आशंकाओं के बीच किसानों, मौसम वैज्ञानिकों और सरकार की नजर अब मानसून की अगली चाल पर टिकी है.

(ये खबर हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे कुमार ऋषभ ने लिखी है)

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