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अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस को एकसाथ देख कैसा लगा? एकनाथ शिंदे ने सब साफ-साफ कह दिया

थाणे जिले के अंबरनाथ में बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई. इस गठबंधन में शिंदे गुट वाली शिवसेना को बाहर कर दिया गया, जबकि 20 दिसंबर को हुए नगर पालिका चुनाव में शिंदे गुट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा था.

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Shinde Shivsena
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे. (Aaj Tak)
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सौरभ
8 जनवरी 2026 (Published: 05:01 PM IST)
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि अंबरनाथ के चुनाव में बना बीजेपी–कांग्रेस गठबंधन उनकी विचारधारा के खिलाफ है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है. एकनाथ शिंदे ने ये बातें आजतक के ‘मुंबई मंथन 2026’ कार्यक्रम में कहीं.

इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे के साथ किसी भी तरह की अनबन की खबरों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच सब ठीक है और उन्हें अहंकार से जुड़ी कोई समस्या नहीं है. सीएम फडणवीस ने यह भी कहा कि अंबरनाथ में गठबंधन एक रणनीतिक फैसला था, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव मूल रूप से बीजेपी कार्यकर्ताओं के स्तर पर लड़े जाते हैं.

थाणे जिले के अंबरनाथ में बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई. इस गठबंधन में शिंदे गुट वाली शिवसेना को बाहर कर दिया गया, जबकि 20 दिसंबर को हुए नगर पालिका चुनाव में शिंदे गुट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा था.

चुनाव नतीजों में शिंदे गुट की शिवसेना को 27 सीटें मिली थीं, जो बहुमत से सिर्फ चार कम थीं. बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को 4 सीटें मिलीं और दो निर्दलीय पार्षद चुने गए थे. एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से बीजेपी–कांग्रेस–एनसीपी गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई.

जब एकनाथ शिंदे से पूछा गया कि क्या वह इस गठबंधन से आहत हैं, तो उन्होंने साफ कहा, ‘हां, हमें दुख पहुंचा है.’ उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने राज्य बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण से बात की और फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर चर्चा की. शिंदे ने कहा कि उन्होंने फडणवीस को बताया कि यह घटना उनकी विचारधारा के खिलाफ है और मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया है.

हालांकि, इशारों में शिंदे ने अपनी अहमियत भी बताने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो इन बातों से घबरा जाएं. उन्होंने 2022 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने देखा है कि उन्होंने उस समय क्या किया था. 2022 में उन्होंने उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता वाली शिवसेना तोड़ दी. अब पार्टी और पार्टी का सिंबल उन्हीं के पास है. शिंदे ने कहा कि वह डॉक्टर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने एक ‘बड़ा ऑपरेशन’ किया था.

शिंदे ने ऐसे गठबंधनों को पाखंडी और अवसरवादी बताया, खासकर तब जब विपक्ष राज्य की सत्तारूढ़ महायुति पर सवाल उठाता है. उन्होंने कहा कि जब अंबरनाथ में कांग्रेस और बीजेपी साथ आए, तब उनकी नैतिकता कहां थी. उन्होंने आरोप लगाया कि यही विपक्ष उन्हें गठबंधनों पर उपदेश देता है, जबकि पहले उन्हें अपने ही ऐसे “अपवित्र गठबंधनों” का जवाब देना चाहिए.

7 जनवरी के घटनाक्रम के बाद शिंदे गुट की शिवसेना ने इस गठबंधन को “गठबंधन धर्म” से विश्वासघात बताया था. पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि अंबरनाथ में यह व्यवस्था जानबूझकर शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए की गई, जबकि उसके पास सबसे ज्यादा जनादेश था.

इस असहज गठबंधन के बाद कांग्रेस को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ी. पार्टी ने अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया. इसके बाद ये 12 पार्षद बुधवार देर रात बीजेपी में शामिल हो गए.

वीडियो: राजधानी: महाराष्ट्र में बीजेपी और कांग्रेस के गठबंधन की पूरी कहानी

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