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दिल्ली ब्लास्ट का आरोपी जिस यूनिवर्सिटी में काम करता था, ED ने उसकी 140 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त की

लाल किले में धमाका करने वाला डॉ. उमर नबी यहीं काम करता था. डॉ. उमर के अलावा, उनके दो साथी, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन भी इसी यूनिवर्सिटी में काम करते थे. ये सभी लोग एक "व्हाइट कॉलर" आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थे.

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ed attched 140 crore worth of assests of al falah university in delhi red fort blast case
अल-फलाह यूनिवर्सिटी (photo-x)
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मानस राज
17 जनवरी 2026 (Published: 09:57 AM IST)
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दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट (Delhi Red Fort Blast) केस में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. घटना के तार बार-बार फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) से जुड़े थे. अब अल फलाह पर कार्रवाई करते हुए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है. अल फलाह यूनिवर्सिटी पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया गया था. इसी के तहत ये कार्रवाई की गई. इसके अलावा दिल्ली ब्लास्ट के बाद से अल फलाह यूनिवर्सिटी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) के भी रडार पर है.

करीब 54 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली अल फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा के फरीदाबाद स्थित धौज गांव में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कैंपस में मौजूद स्कूलों और डिपार्टमेंट्स की बिल्डिंग को ईडी ने PMLA के तहत हुई कार्रवाई में जब्त कर लिया है. इसके अलावा, जांच एजेंसी ने चार्जशीट भी फाइल की, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी के तौर पर जवाद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का नाम शामिल किया गया है. जवाद सिद्दीकी ही अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन हैं.

दिल्ली ब्लास्ट के बाद इस संस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा था. वजह थी कि लाल किले में धमाका करने वाला डॉ. उमर नबी यहीं काम करता था. डॉ. उमर के अलावा, उनके दो साथी, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन भी इसी यूनिवर्सिटी में काम करते थे. ये सभी लोग एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थे. नवंबर 2025 में यूनिवर्सिटी की वेबसाइट बंद कर दी गई क्योंकि उसे NAAC से गलत मान्यता का दावा दिखाने के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ मिला था. इस बीच ED ने घोषणा की कि वह यूनिवर्सिटी की फंडिंग के साथ-साथ उसके डॉक्टरों के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की भी जांच करेगा.

(यह भी पढ़ें: अल-फलाह यूनिवर्सिटी से कैसे जुड़े हैं दिल्ली बम ब्लास्ट के तार? ट्रस्ट के पैसे से होती है फंडिंग)

अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को पिछले साल नवंबर में ED ने गिरफ्तार किया था. आरोप था कि उनके निर्देश पर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट ने छात्रों-अभिभावकों को फर्जी मान्यता और गलत दावों के आधार पर गुमराह किया. एजेंसी का दावा है कि इससे कम से कम 415.10 करोड़ की अवैध कमाई हुई. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक ED ने कोर्ट को बताया कि यूनिवर्सिटी ने खुद को UGC मान्यता प्राप्त बताया और NAAC (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) की मान्यता के बारे में भी झूठ बोला. NAAC UGC द्वारा फंडेड एक स्वायत्त संस्था है, जो देश के उच्च शिक्षा संस्थानों का आकलन और मान्यता देती है.

वीडियो: अल फलाह यूनिवर्सिटी ने लाल किला ब्लास्ट के आरोपियों के बारे में क्या कहा?

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