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नौसेना ने रचा एक और कीर्तिमान, हेलीकॉप्टर से एंटी शिप मिसाइल NASM-SR का सफल लॉन्च

Indian Navy ने इस टेस्ट के लिए अपने 'Sea King' हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया है. नेवी ने बंगाल की खाड़ी में NASM-SR को एक टारगेट पर दागा. NASM-SR भारत की स्वदेशी मिसाइल है जिसका इस्तेमाल समुद्री जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है.

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30 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 03:57 PM IST)
drdo Indian navy successfully conduct flight trials Naval Anti Ship missile salvo launch
'सी-किंग' हेलीकॉप्टर से एंटी शिप मिसाइलों का लॉन्च टेस्ट सफल रहा (PHOTO- Indian Navy)
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डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (DRDO) और इंडियन नेवी (Indian Navy) ने बंगाल की खाड़ी में एक नया कीर्तिमान रचा है. इंडियन नेवी ने अपने एक हेलीकॉप्टर से लगातार 2 मिसाइलें लॉन्च कर एक टारगेट पर हमला किया. नेवी ने इस दौरान नेवल एंटी-शिप मिसाइल शॉर्ट रेंज (NASM-SR) लॉन्च किए. सुरक्षा रणनीति के लिहाज से भारतीय सेना के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है.

नेवी ने कौन सी मिसाइल लॉन्च की?

इंडियन नेवी ने इस टेस्ट के लिए अपने 'सी-किंग' हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया है. नेवी ने बंगाल की खाड़ी में  NASM-SR को एक टारगेट पर दागा. NASM-SR भारत की स्वदेशी मिसाइल है. जिसका इस्तेमाल समुद्री जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है. नेवी ने इस मिसाइल से 'सैल्वो लॉन्च' का ट्रायल किया है. आसान भाषा में समझाएं, तो एक ही हेलीकॉप्टर से कम समय में एक के बाद एक मिसाइलें दागी जाती हैं. इससे दुश्मन का एयर डिफेंस कन्फ्यूज होने लगता है कि किस मिसाइल को रोके. ऐसे में मिसाइल के टारगेट पर लगने की संभावना बढ़ जाती है. अब उस मिसाइल NASM-SR के बारे में भी समझ लेते हैं कि जिसे सी किंग से दागा गया है.

Westland Sea King – Indian Navy
इंडियन नेवी का सी किंग हेलीकॉप्टर (PHOTO-Indian Navy)
  • टाइप: नेवल एंटी-शिप मिसाइल
  • वजन: एक मिसाइल का वजन लगभग 385 किलोग्राम है 
  • रेंज: 55 किलोमीटर 
  • वॉरहेड: 100 किलोग्राम 
  • गाइडेंस सिस्टम: इस मिसाइल में अपने टारगेट तक पहुंचने के लिए इंफ्रारेड सीकर और हीट सीकिंग सेंसर लगा है. इसमें GPS और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम है, जिसकी वजह से मारक क्षमता बेहद सटीक भी है.
  • रडार से ओझल: हेलीकॉप्टर से लॉन्च होते ही ये मिसाइल जमीन/पानी की सतह के करीब आ जाती है. इसके बाद ये आगे का रास्ता तय करती है. सतह के करीब होने के कारण ये रडार की पकड़ में नहीं आती.
भारत के लिए क्यों खास है Salvo Launch?

जिस तरह से दुनिया के हालात बदल रहे हैं, उस हिसाब से भारत भी अपनी स्ट्रेटेजी बदल रहा है. समुद्र ही वो जगह है जिसपर कब्जे के लिए भविष्य में संघर्ष बढ़ेंगे. होर्मुज का उदाहरण हमारे सामने है. ऐसे में ये जरूरी है कि भारत समुद्र में न सिर्फ डिफेंसिव, बल्कि हमलावर वाली स्थिति में भी रहने की तैयार रहे. सैल्वो लॉन्च की सफलता के बाद अब इस मिसाइल का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होगा. साथ ही DRDO इसे और अपग्रेड करके इसकी रेंज 150 किमी तक बढ़ाने पर भी काम कर रहा है.

वीडियो: पाकिस्तान ने अपनी नेवी के एडिटेड वीडियोज़ दिखाए, ट्रोल होने लगे

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