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दुश्मन के टैंक, जेट और चौकियां, कुछ न बचेगा... भारत ने बना ली खुद की ड्रोन मिसाइल

भारत ने अपनी ड्रोन तकनीक में एक मील का पत्थर हासिल किया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने ड्रोन्स से मिसाइल लॉन्च का ट्रायल पूरा कर लिया है. ड्रोन ये मिसाइल लेकर रडार से बचते हुए दुश्मन के एरिया में जाएगा. फिर वहां जमीन पर मौजूद उसके ठिकानों जैसे बंकर्स, टैंक्स, फौजी चौकियों पर हमला करेगा.

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20 मई 2026 (अपडेटेड: 20 मई 2026, 09:08 AM IST)
DRDO completes development trials of Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile V3 in Air to Ground & Air to Air
DRDO ने ड्रोन से मिसाइल दागने का टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है (PHOTO-DRDO)
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एक कहावत है कि लोहा लोहे को काटता है. लेकिन रक्षा क्षेत्र में हमेशा ऐसा नहीं होता. आती हुई गोली को रोकने के लिए गोली नहीं चलाई जाती. टैंक के गोले को टैंक नहीं रोक सकता. लेकिन ये सभी युद्ध के पारंपरिक (Conventional) तरीके हैं. लेकिन आज का जमाना ड्रोन्स का है. मिसाइल या गाइडेड बमों से कम खर्च में लगभग उतना ही नुकसान करने वाले ड्रोन्स ही भविष्य की लड़ाईयों का रुख तय करेंगे. और शायद अब वो तय भी करने लगे हैं. ईरान-अमेरिका की जंग इसका सबसे ताजा उदाहरण है. और अब भारत ने भी अपनी ड्रोन तकनीक में एक मील का पत्थर हासिल किया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने ड्रोन्स से मिसाइल लॉन्च का ट्रायल पूरा कर लिया है. जल्द ही इन्हें सेनाओं को सौंप दिया जाएगा.

ULPGM की खासियत

ड्रोन से लॉन्च होने वाली इस मिसाइल को Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile (ULPGM)-V3 नाम दिया गया है. DRDO ने इसके दोनों वेरिएंट्स Air-to-Ground (हवा से जमीन) and Air-to-Air (हवा से हवा) में हमला करने वाली मिसाइलों का टेस्ट किया है. ये टेस्ट आंध्र प्रदेश की कुरनूल टेस्टिंग रेंज में किया गया है. इस ट्रायल में एक ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS) का इस्तेमाल कर ULPGM को कंट्रोल किया गया.

भारत ने ये मिसाइल कहां बनाई? 

DRDO ने इन मिसाइलों के डेवलपमेंट और प्रोडक्शन के लिए दो एजेंसियों के साथ हाथ मिलाया है. DRDO ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, हैदराबाद के साथ पार्टनरशिप की है. मौजूदा टेस्ट्स के लिए इस सिस्टम को बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज की बनाई हुई UAV माने ड्रोन पर लगाया गया है. ULPGM मिसाइल डेवलपमेंट के लिए हैदराबाद के रिसर्च सेंटर की इमारत को नोडल लैब बनाया गया है. इसके अलावा DRDO की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) हैदराबाद, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL) चंडीगढ़ और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (HEMRL) पुणे ने भी इसके डेवलपमेंट में साथ काम किया है.

इस एडवांस ड्रोन को इस तरह बनाया गया है कि ये मिसाइल को लेकर रडार से बचते हुए दुश्मन के एरिया में जाएगा. फिर वहां जमीन पर मौजूद उसके ठिकानों जैसे बंकर्स, टैंक्स, फौजी चौकियों पर हमला करेगा. इसके अलावा ये ड्रोन, दूसरे ड्रोन्स को भी मिसाइल दागकर तबाह कर देगा.

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