मोदी सरकार ने BJP नेता को बांग्लादेश में भारत का राजदूत बनाया? भाजपा नेता बधाई दे रहे
2019 में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग (रिटायर्ड) को सेशेल्स में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था. अगर Dinesh Trivedi को ढाका भेजा जाता है, तो यह मोदी सरकार में में किसी राजनेता को राजनयिक नियुक्ति मिलना जरूर नया होगा.

बांग्लादेश के अगले हाई कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर इन दिनों चर्चा का दौर है. दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला हाई कमिश्नर नियुक्त किया जा सकता है. ढाका में तैनात भारत के मौजूदा हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा को बेल्जियम और यूरोपीय संघ (EU) में राजदूत के तौर पर भेजा जा रहा है. भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी के बजाय उच्चायुक्त के तौर पर किसी राजनेता को बांग्लादेश भेजा जाता है, तो इसे मोदी सरकार के परंपरा से अलग लिए जाने वाले फैसले के तौर पर देखा जाएगा. हालांकि, दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन BJP नेताओं ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया है.
दिनेश त्रिवेदी की बात करें, तो वह यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) की सरकार में रेल मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाली थी. त्रिवेदी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं. उन्हें पश्चिम बंगाल से ही राज्यसभा भेजा गया था. वे कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आ गए. फरवरी 2021 में उन्होंने TMC को भी छोड़ दिया और BJP का हाथ थाम लिया.
पश्चिम बंगाल की बैरकपुर सीट से लोकसभा सांसद रहे दिनेश त्रिवेदी को हाई कमिश्नर बनाया जाता है, तो उनके लिए ये बड़ी जिम्मेदारी होगी. बांग्लादेश में पिछले कुछ समय में राजनीतिक अस्थिरता और भारत के साथ संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. अभी वहां प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनी है. रहमान सरकार बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की धुर-विरोधी है, जिन्हें भारत ने शरण दे रखी है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश त्रिवेदी के हाई कमिश्नर बनाने की चर्चा है. इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन BJP नेता अमित मालवीय ने उन्हें बधाई दे दी है. अमित मालवीय ने X पर लिखा,
"वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बैरकपुर के पूर्व सांसद श्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किए जाने पर बधाई."

BJP के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने भी X पर लिखा,
"मैं दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त होने पर बधाई देता हूं. मैं उन्हें कई सालों से जानता हूं और मैंने सार्वजनिक जीवन में उनकी यात्रा को करीब से देखा है. उनके पास बहुमूल्य अनुभव, शासन-प्रशासन की गहरी समझ और नीतिगत मामलों को लेकर एक संतुलित नजरिया है.
ऐसे समय में जब भारत-बांग्लादेश संबंधों का खास महत्व है, मुझे विश्वास है कि वे हमारे संबंधों को और ज्यादा मजबूत बनाने में सार्थक योगदान देंगे. इस नई जिम्मेदारी के लिए मेरी ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं."

राजनयिक पदों पर सियासतदानों या गैर-IFS अधिकारियों की नियुक्ति कोई नई बात नहीं है. पहले की सरकारों ने भी IFS अफसरों के बजाय अन्य शख्सियतों को राजदूत के तौर पर नियुक्त किया है. आजादी के तुरंत बाद ही देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विजयलक्ष्मी पंडित को राजदूत बनाया गया था. उन्होंने सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और मेक्सिको में राजनयिक के तौर पर काम किया था. 1992 में एक और पॉलिटिशियन सिद्धार्थ शंकर रे को अमेरिका में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था.
2012 में UPA सरकार ने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल (रिटायर्ड) निर्मल कुमार वर्मा को कनाडा में हाई कमिश्नर बनाया था. 2024 में खुद मोदी सरकार ने पूर्व विदेश सचिव विनय क्वात्रा को अमेरिका में उच्चायुक्त बनाकर भेजा. विदेश सेवा से रिटायर होने के बाद विनय क्वात्रा को यह जिम्मेदारी मिली थी.
2019 में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग (रिटायर्ड) को सेशेल्स में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था. अगर दिनेश त्रिवेदी को ढाका भेजा जाता है, तो मोदी सरकार में में किसी राजनेता को राजनयिक नियुक्ति मिलना जरूर नया होगा.
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