BMC चुनाव से पहले ही मुंबई मेयर के पद पर हिंदू-मुस्लिम की सियासत का कब्जा?
Devendra Fadnavis ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी नेशन फर्स्ट के सिद्धांत पर काम करती है. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी Mumbai के विकास के नाम पर वोट मांग रही है. और उनके वोटर मराठी और गैर-मराठी दोनों समुदायों के लोग हैं.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अब बृह्नमुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर सियासी गोलबंदी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने दावा किया है कि मुंबई का अगला मेयर कोई मराठी हिंदू ही होगा. मुख्यमंत्री फडणवीस का ये बयान AIMIM नेता वारिस पठान के एक दावे के जवाब में आया है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा था कि मुंबई की अगली मेयर एक बुर्का पहने मुस्लिम महिला भी हो सकती है. देवेंद्र फडणवीस ने इस पर पलटवार करते हुए कहा,
इंडिया टुडे के मुंबई मंथन कार्यक्रम में फडणवीस से पूछा गया कि क्या मुंबई मेयर का पद मराठी हिंदुओं के लिए ही आरक्षित माना जाए, तो मुख्यमंत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, ‘हां बिल्कुल.’
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस दौरान उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी वोटरों को 'मराठी' और 'गैर मराठी' के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है. उन्होंने जोर देकर कहा,
कैसे मिली विवाद को हवा?
मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद लंबे समय से चल रहा है. हाल में इसे लेकर बीजेपी नेता कृपाशंकर सिंह ने एक बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर के मीरा-भायंदर में एक हिंदी भाषी उत्तर भारतीय मेयर बनेगा. मराठी अस्मिता की राजनीति करने वाली पार्टियां शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने उनके बयान की जमकर आलोचना की.
अब कृपाशंकर का बचाव करते हुए फडणवीस ने कहा,
BMC के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं. इस बार यहां बेहद रोचक मुकाबला है. एक तरफ महायुति (बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट) अपनी सत्ता बरकरार रखने की कवायद में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ ठाकरे ब्रदर्स (उद्धव और राज) भी मराठी मानुस के मुद्दे पर सत्ता छीनने की हर मुमकिन कोशिश करते नजर आ रहे हैं.
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