दिल्ली के CM SHRI स्कूल की दीवार पर क्यों लिखा है 'खतरा' और 'नो एंट्री'?
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के दरियापुर कलां में स्थित एक CM SHRI स्कूल, अपने 'मॉडल स्कूल' होने के तमगे के बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करता है. सेफ, मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर तो दूर की बात, स्कूल की दीवारों पर 'खतरा' 'नो एंट्री' लिख हुआ है. प्लास्टर उखड़ रहा है. विद्यार्थियों के पास बेसिक स्वच्छता का भी अभाव है. और पीने के पानी के लिए पर्याप्त सुविधा भी नहीं.

CM SHRI स्कूल दिल्ली सरकार की एक खास पहल के तौर पर शुरू किए गए थे. कहा गया था कि ये हाईटेक स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप आधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित होंगे. बच्चों को स्मार्टबोर्ड, बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली, रोबोटिक्स लैब, AI से लैस लाइब्रेरी से लैस क्लासरूम मिलेंगे.
लेकिन उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के दरियापुर कलां में स्थित एक CM SHRI स्कूल, अपने 'मॉडल स्कूल' होने के तमगे के बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करता है. सेफ, मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर तो दूर की बात, स्कूल की दीवारों पर 'खतरा' 'नो एंट्री' लिख हुआ है. प्लास्टर उखड़ रहा है. विद्यार्थियों के पास बेसिक स्वच्छता का भी अभाव है. और पीने के पानी के लिए पर्याप्त सुविधा भी नहीं.
ये सभी चिंताएं स्कूल के एक इंटर्नल स्ट्रक्चरल ऑडिट में सामने आईं. इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि स्कूल परिसर में कुल 13 ब्लॉक हैं. इनमें से छह ब्लॉक को 'अच्छा', छह को 'जर्जर' और एक को 'निर्माणाधीन' कैटेगरी में रखा गया है. मगर ऑडिट में पता लगा कि सिर्फ चार ब्लॉक 1, 2, 3 और 12 का ही ढांचा ठीक है. अन्य ब्लॉकों को 'जर्जर' या मजबूती के लिहाज से नाकाफी पाया गया.
बुनियादी ढांचे की भी कमी है. स्कूल की 'फैसिलिटी रिपोर्ट' के मुताबिक, यहां पीने के पानी के केवल 5 आउटलेट हैं, जबकि जरूरत 24 की है.
ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूल में लड़कियों के लिए एक भी शौचालय नहीं है. जबकि स्कूल में छात्राओं की संख्या ही सबसे ज्यादा है. कुल 1194 छात्रों में 1114 लड़कियां हैं.
CWSN (विशेष जरूरतों वाले बच्चे) के बुनियादी ढांचे में भी भारी कमी बताई गई है. 30 की जरूरत के हिसाब से CWSN के लिए सिर्फ 4 टॉयलेट सीट (कमोड) हैं. और 60 की जरूरत के मुकाबले CWSN के लिए यूरिनल की संख्या शून्य है.
जिन ब्लॉक को बनावट के हिसाब से ठीक माना गया था, उनमें भी ऑडिट में नमी के धब्बे और दीवारों पर सीलन सी पाई गई. ऑडिट में यह भी बताया गया कि अंदर और बाहर का प्लास्टर सिर्फ औसत हालत में था. और कई जगहों पर पेंट उखड़ा हुआ दिख रहा था.
फर्नीचर की हालत पर बनी एक रिपोर्ट में आग से सुरक्षा से जुड़ी कमियों की ओर भी इशारा किया गया है. बायोलॉजी लैब में लगे फायर एक्सटिंग्विशर को बड़ी मरम्मत की जरूरत बताई गई है. जबकि क्लासरूम, किचन, डाइनिंग हॉल, सेमिनार हॉल और दूसरी जगहों पर लगे एक्सटिंग्विशर को बदलने या मरम्मत के लिए कहा गया.
ऑडिट में वॉटरप्रूफिंग, खराब प्लास्टर और पेंट की मरम्मत, प्लंबिंग में लीकेज ठीक करने, नियमित रखरखाव और हर तीन से पांच साल में समय-समय पर ढांचे की जांच करवाने की सिफारिश की गई है.
ये रिपोर्ट ऐसे समय पर आई, जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं में कमी और पुरानी हो चुकी इमारतों को लेकर उनकी संरचनात्मक स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे.
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