The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Delhi public water testing labs not global standard certified

इंदौर जैसा जानलेवा गंदा पानी दिल्ली में फैल गया तो टेस्टिंग कहां होगी? ये पढ़कर कांप जाएंगे

दिल्ली में पानी की क्वालिटी जांचने वाली लैब को लेकर चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है. यहां 25 से ज्यादा पानी जांचने वाली लैब्स हैं लेकिन उनमें से सिर्फ 2 ही सरकारी मान्यता प्राप्त हैं.

Advertisement
delhi water lab
इंदौर के घरों में पहुंच रहे जानलेवा पानी का एक सैंपल. (तस्वीर- पीटीआई)
pic
राघवेंद्र शुक्ला
2 जनवरी 2026 (Updated: 2 जनवरी 2026, 05:29 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

इंदौर में कई लोगों की जान ले चुका गंदा पानी अगर दिल्ली में फैल जाए तो उसकी टेस्टिंग कहां होगी? आगे जो जानकारी देने वाले हैं, उसे पढ़कर दिल्लीवासियों का डरना बनता है. क्योंकि यहां पानी जांचने वाली ज्यादातर लैब ही दुरुस्त और भरोसेमंद नहीं हैं. राष्ट्रीय राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में पानी जांचने वाली 25 से ज्यादा लैब में से सिर्फ 2 ही सरकारी मान्यता प्राप्त (NABL's accredited) हैं. यानी उनके जांच करने के पैमाने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं. दिक्कत ये है कि दिल्ली में वेस्ट वॉटर हों या लोगों के पीने वाला पानी, सभी की जांच इन्हीं लैब में होती है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) की पानी की जांच करने वाली जो लैब है, वह भी NABL से मान्यता प्राप्त (NABL's accreditation) नहीं है. विडंबना ये है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) यमुना के पानी की मासिक जांच के लिए इसी लैब की रिपोर्ट पर भरोसा करता है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की जांच करने वाली सरकारी लैबों के मामले में दिल्ली देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे नीचे है. यहां 25 से ज्यादा पानी जांचने की लैब हैं. NABL का रिकॉर्ड बताता है कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की सिर्फ दो जोनल लैब, हैदरपुर और वजीराबाद, ही मान्यता प्राप्त हैं. बाकी लैबों की मान्यता अक्टूबर में खत्म हो गई है. इसे लेकर दिल्ली सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि DJB ने कुछ लैब के लिए NABL मान्यता के लिए आवेदन किया है.

NABL यानी ‘नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज’ देश की एक स्वायत्त संस्था है, जो ये सुनिश्चित करती है कि लैब अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक सही और भरोसेमंद जांच कर रही हैं या नहीं. केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन (JJM) योजना के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी वॉटर टेस्टिंग लैब को इससे मान्यता दिलानी होती है. ताकि डेटा सही और भरोसेमंद हो.

अन्य प्रदेशों का हाल

हालांकि, देश भर में इस मिशन के तहत पानी टेस्टिंग लैब्स की गुणवत्ता के मामले में काफी सुधार हुआ है. भारत में लगभग 2847 वॉटर टेस्टिंग लैब हैं, जिनमें से 1678 यानी करीब 59 फीसदी लैब NABL से मान्यता प्राप्त हैं. केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 4 दिसंबर के दस्तावेज के अनुसार, तमिलनाडु, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड में 100 फीसदी सरकारी लैब मान्यता प्राप्त हैं. हरियाणा में 98 फीसदी, असम में 94 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 66 फीसदी लैब को मान्यता मिली है. दिल्ली में यह हिसाब 8 प्रतिशत से भी कम है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पानी की जांच को लेकर NABL की रिपोर्ट का पालन जरूरी है. अगर रिपोर्ट NABL की नहीं है तो वह सिर्फ कागज का टुकड़ा है और उसकी कोई वैधता नहीं है. कोई कोर्ट या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी उसे सही नहीं मानेगी.

दिल्ली में पानी खराब

ये हालात तब हैं जब दिल्ली में हवा और पानी दोनों की हालत बेहद खराब है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में दिल्ली में हैजा (कॉलेरा) के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई. ट्रीटेड और वेस्ट वॉटर में खतरनाक लेवल तक प्रदूषक पाए गए. RTI के जरिए NABL से मान्यता प्राप्त CPCB के लैब की कुछ जानकारी निकाली गई, जिसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के नमूनों की जांच की गई थी. इसके अनुसार, जून 2025 में दिल्ली के 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में से सिर्फ 4 ही मानकों पर खरे उतरे. 

बाकी प्लांट्स में फैकल कोलीफॉर्म, BOD, TSS, फॉस्फेट, अमोनिया जैसे 8 मानकों पर पानी की क्वालिटी खराब पाई गई. टीओआई की टीम ने देखा कि यही 'अशुद्ध' पानी सीधे स्टॉर्म वॉटर ड्रेन, सप्लीमेंट्री ड्रेन और नजफगढ़ ड्रेन में जाता है, जो आगे चलकर यमुना नदी में गिरती है.

ये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का डेटा था, लेकिन जब उसी महीने के DPCC यानी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से तुलना की गई तो नतीजे बिल्कुल अलग निकले. DPCC के डेटा में ज्यादातर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सही और मानकों पर खरे बताए गए.

अब सरकार के ही दो अलग-अलग बोर्डों के डेटा में ऐसा अंतर दिखेगा तो कैसे होगी यमुना साफ?

वीडियो: यूपी के ग़ाज़ियाबाद में पुलिस फर्जी मशीन से लोगों को बांग्लादेशी बता रही है? वायरल वीडियो में क्या दिखा?

Advertisement

Advertisement

()