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YES BANK में काम करते थे डिजिटल अरेस्ट वालों के साथी, बुजुर्ग दंपती की पाई-पाई खा गए

Delhi Police ने Digital Arrest के जरिए Cyber Fraud करने वाले एक रैकेट का खुलासा किया है. आरोपी लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने के लिए खुद को पुलिस, CBI , कस्टम अधिकारी और दूसरे सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे.

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दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए साइबर ठगी करने वाले रैकेट का खुलासा किया है. (इंडिया टुडे)
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अरविंद ओझा
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9 जनवरी 2026 (Updated: 9 जनवरी 2026, 05:37 PM IST)
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दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक इंटर स्टेट रैकेट का भंडाफोड़ किया है. ये रैकेट ‘डिजिटल अरेस्ट’ से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाता है. पुलिस की जांच में पता चला है कि इस साइबर ठगी का YES BANK कनेक्शन भी है. उसने जिन 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें यस बैंक के दो अधिकारी भी शामिल हैं (Yes Bank Digital arrest). 

इंडिया टुडे की  रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने मामले में जांच की शुरुआत 80 साल के एक बुजुर्ग की शिकायत पर की थी. उनको डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगों ने 96 लाख रुपये वसूल लिए. उन्होंने बुजुर्ग को वॉट्सऐप कॉल के जरिए TRAI, दिल्ली पुलिस और CBI अधिकारी बनकर डराया. ठगों ने उनको बताया कि उनके मोबाइल नंबर और आधार का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है और वह जांच के दायरे में हैं.

7 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट 

ठगों ने बुजुर्ग और उनकी पत्नी को लगातार वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. उन्होंने दोनों को घर से बाहर निकलने या किसी से बात करने से मना किया. आरोपियों ने बुजुर्ग दंपति को CBI ऑफिसर बनकर हड़काया और उनको यकीन दिलाने के लिए CBI का फर्जी ऑफिस भी दिखाया. यही नहीं, उन्होंने एक व्यक्ति को वकील बनाकर उन पर मानसिक दबाव बनाया.

लगातार धमकी और दबाव के चलते बुजुर्ग डर गए. उन्होंने अपनी फिक्सड डिपॉजिट तुड़वाकर सारी जमा पूंजी ठगों के अकाउंट में ट्रांसफर की. लेकिन इससे भी बात नहीं बनी उनको पैसे की डिमांड पूरी करने के लिए गोल्ड लोन लेना पड़ा. ठगों ने उनसे कुल 96 लाख रुपये वसूल लिए.

साइबर ठगों ने बुजुर्ग को दिलासा दिया था कि वेरिफिकेशन के बाद उनके पैसे उनको वापस कर दिए जाएंगे. लेकिन जब पैसे वापस नहीं आए तो 4 नवंबर 2025 को उन्होंने दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट के पास ई-एफआईआर दर्ज कराई.

IFSO यूनिट ने जांच के दौरान तकनीकी सबूतों के आधार पर पहले हरियाणा के हिसार से प्रदीप कुमार और नमनदीप मलिक को गिरफ्तार किया. इसके बाद ओडिशा के भुवनेश्वर से शशिकांत पटनायक को पकड़ा गया. पटनायक फर्जी GST रजिस्ट्रेशन और पैसे खपाने में शामिल था.

YES बैंक के दो अधिकारी भी गिरफ्तार 

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पता चला कि इस रैकेट में YES बैंक की तिलक नगर शाखा के दो अधिकारी भी शामिल थे. सीनियर सेल्स मैनेजर नीलेश कुमार और सेल्स ऑफिसर चंदन कुमार फर्जी दस्तावेंजों की मदद से आरोपियों को करंट अकाउंट खुलवाने में मदद करते थे. इन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाया जाता था. दिल्ली पुलिस ने इन दोनों बैंक अधिकारियों को भी गिरफ्त में ले लिया है.

आरोपी लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने के लिए खुद को पुलिस, CBI , कस्टम अधिकारी और दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे. साइबर ठगों का ये रैकेट सरकारी अधिकारी बन कर लोगों को कॉल करता था और उनको यकीन दिलाता था कि वो किसी गलत मामले में फंसे हुए हैं. फिर उनको गिरफ्तारी का डर दिखाता था और भरोसा हो जाने पर मामला सुलझाने के नाम पर फर्जी करंट अकाउंट के जरिए पैसे ट्रांसफर करवा लेता था.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित और इंटर स्टेट साइबर क्राइम रैकेट है. इनके मनी ट्रेल और दूसरे सहयोगियों की भूमिका की जांच चल रही है. पुलिस ने लोगों से डिजिटल अरेस्ट जैसे किसी भी कॉल या मैसेज से सावधान रहने और तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की है.

वीडियो: खर्चा-पानी: दिल्ली के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की पूरी कहानी

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