दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिए तैयार हुआ रामलीला मैदान, रेखा गुप्ता के सामने ये बड़ी चुनौतियां हैं
Rekha Gupta Oath Ceremony: पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. दिल्ली के रामलीला मैदान में वो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी.

विधायक दल की नेता चुने जाने के बाद रेखा गुप्ता ने दिल्ली के उपराज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस दावे को स्वीकार कर लिया है. 20 फरवरी की दोपहर को करीब 12 बजे, रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण (Delhi CM Oath Ceremony) करेंगी. रामलीला मैदान में पिछले कई दिनों से इसकी तैयारी चल रही है. इंडिया टुडे ग्रुप के इनपुट्स के मुताबिक, कैबिनेट के लिए प्रवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविन्द्र राज, कपिल मिश्रा, पंकज सिंह और आशीष सूद भी शपथ ले सकते हैं.
पिछले दिनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का जायजा भी लिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौके पर मौजूद रहेंगे.
शालीमार बाग सीट से रेखा गुप्ता 2015 से ही चुनाव लड़ रही हैं. लेकन कभी जीत नहीं मिली थी. इस बार वो पहली बार विधायक बनी हैं. इससे पहले CM पद के लिए सबसे अधिक प्रवेश वर्मा के नाम की चर्चा थी. उन्होंने नई दिल्ली सीट पर AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल को हराया था. 10 सालों तक दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाने वाले विजेंद्र गुप्ता भी इस रेस में थे. लेकिन इन्हीं दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री पद का प्रस्तावक बनाया गया. उन्होंने रेखा गुप्ता के नाम का प्रस्ताव रखा और विधायकों की मंजूरी मिल गई.
चुनाव के बाद से आम आदमी पार्टी के नेता लगातार भाजपा पर अपने वादे पूरे करने के लिए दबाव बना रही है. शपथ ग्रहण के बाद रेखा गुप्ता के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. पहली चुनौती तो यमुना नदी की सफाई को लेकर है. इस चुनाव में इसे मुद्दा बनाया गया और केजरीवाल इस मामले में बैकफुट पर दिखे. उन्हें ये बात स्वीकार करनी पड़ी कि वो अपने वादे के मुताबिक यमुना को साफ नहीं कर पाए. हालांकि, उन्होंने कुछ कारण भी गिनवाए लेकिन चुनाव के नतीजों से ऐसा नहीं लगा कि लोगों ने उनकी सफाई स्वीकार की.
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AAP सरकार अपने कार्यकाल में लगातार केंद्र के साथ ठीक-ठीक तालमेल नहीं बैठा पाई. केजरीवाल और पार्टी के दूसरे बड़े नेता लगातार आरोप लगाते रहे कि उपराज्यपाल और केंद्र सरकार उनके काम में अड़चनें डालते हैं. इस कारण से वो काम नहीं कर पाते. इस बार स्थिति वैसी नहीं है. केंद्र में भी और दिल्ली में भी भाजपा की ही सरकार है. ऐसे में रेखा गुप्ता से उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं.
केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू नहीं किया था. केजरीवाल सरकार का मानना था कि दिल्ली में लोगों को पहले से बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं. इसलिए इस योजना की जरूरत नहीं है. लेकिन भाजपा ने अपने इलेक्शन मैनिफेस्टो में इसे शामिल किया. अब इसकी तैयारी भी चल रही है. LG ने एक रिपोर्ट भी मांगी है. पूछा है कि क्या मोहल्ला क्लिनिकों को आरोग्य मंदिरों में बदला जा सकता है.
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इसके अलावा रेखा गुप्ता के सामने कई और मामले भी हैं. जैसे कि डीटीसी बसों की खरीद, रोजगार के मुद्दे को हल करना, सड़कों का निर्माण और झुग्गीवालों को मकान देना. ये वैसे मुद्दे हैं जिनका वादा भाजपा ने इस चुनाव में किया है.
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