दिल्ली का शख्स पत्नी की हत्या कर भागा, पकड़ने में पुलिस को 40 साल लग गए
आरोपी की उम्र अब 84 साल हो गई है. उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है. पूछताछ में उसने ये भी बताया है कि कैसे 40 साल तक वो कानून को चकमा देता रहा, कहां-कहां छिपा रहा और क्या-क्या करता रहा.

एक फिल्मी डायलॉग है, ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं.’ कितने लंबे होते हैं ये कहना मुश्किल है, लेकिन कभी-कभी तो ये 40 साल लंबे हो जाते हैं. एक शख्स ने 1986 में अवैध संबंधों के शक में अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी. 40 साल तक वो कानून के ‘लंबे हाथों’ की पकड़ से बाहर रहा. लेकिन अब पुलिस ने आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया है.
आरोपी की उम्र अब 84 साल हो गई है. उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है. पूछताछ में उसने ये भी बताया है कि कैसे 40 साल तक वो कानून को चकमा देता रहा, कहां-कहां छिपा रहा और क्या-क्या करता रहा.
हत्या के 40 साल बाद पकड़ा गया आरोपीये उस समय की बात है जब न तो आम लोगों के पास मोबाइल फोन होते थे. न आधार कार्ड जैसे पहचान पत्रों का नामो-निशान ही था. साल था 1969. चंद्रशेखर प्रसाद इसी साल दिल्ली आए थे और शाकरपुर इलाके में रहते थे. दिल्ली आने के दो साल बाद 1971 में उनकी शादी हुई. शादी के कुछ सालों बाद ही उन्हें अपनी पत्नी पर शक हुआ कि उसका किसी और के साथ संबंध है. इस शक ने घरेलू कलह की नींव डाली. पति-पत्नी में आए दिन झगड़े होने लगे. झगड़े इतने बढ़ गए कि बात मर्डर तक जा पहुंची.
पत्नी की हत्या कर फरारइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अक्टूबर 1986 को चंद्रशेखर प्रसाद ने ईंट से सिर पर वार कर पत्नी की हत्या कर दी और मौके से भाग गया. पुलिस उसकी तलाश करती रही लेकिन वह कभी हाथ नहीं लगा. एक साल बाद 1987 में उसे ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया गया. समय बीतते-बीतते 40 साल बीत गए. वक्त बदला. पुलिस नई टेक्नीक से लैस हुई. संसाधन बेहतर हुए, लेकिन पुलिस के सामने आरोपी को पकड़ने की चुनौती रत्ती भर भी कम नहीं हुई.
40 साल से अनसुलझे इस केस में सबसे बड़ा चैलेंज तो आरोपी के पहचान की थी. जिस समय ये वारदात हुई, तब न तो आधार कार्ड होते थे न मोबाइल डेटा जैसी चीजें. न तो सीसीटीवी कैमरे ही इतने आम थे कि वीडियो फुटेज से आरोपी की शिनाख्त की जाए.
कैसे आरोपी तक पहुंची पुलिस?
हालांकि, जैसा फिल्मी डायलॉग है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं. सो कानून ने अपने हाथ पसारे. जांच करने वाली टीम ने सबसे पहले चंद्रशेखर प्रसाद के बेटों को पता लगाया. वो दिल्ली में ही रहते थे. गोपनीय तरीके से उनके फोन नंबर हासिल किए. फिर उसे निगरानी पर लगा दिया. इस सर्विलांस से पहली और जरूरी बात ये पता लगी कि प्रसाद दिल्ली में ही रहते हैं. नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में रहते हुए उन्होंने अपनी फर्जी पहचान बना ली है. कोई बड़ा फंक्शन हो या कोई और प्रोग्राम, तभी वो अपने परिवार के लोगों से मिलने के लिए जाते हैं.
इतना क्लू काफी था. पुलिस ने सारी जानकारी जुटाई और प्रसाद की धरपकड़ की व्यवस्था कर ली. बुधवार, 22 अप्रैल को पुलिस ने उसे अलीपुर में एक कारखाने से गिरफ्तार कर लिया. प्रसाद यहीं पर छिपे थे. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की. उन्होंने 40 साल पहले पत्नी की हत्या की बात कबूल कर ली. ये भी बताया कि 40 साल तक वह कहां, क्या करता रहे.
फरारी के बाद कहां-कहां छिपा?
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को प्रसाद ने बताया कि पत्नी की हत्या के बाद वह हरियाणा के एक आश्रम में छिप गए. इसके बाद पंजाब के पटियाला चला गए. वहां काफी दिनों तक रिक्शा चलाने का काम किया. फरार होने के दौरान बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में रहे, लेकिन सारी तिकड़म के बावजूद कानून से बच नहीं पाएया.
प्रसाद को पकड़ने वाली टीम को लीड कर रहे इंस्पेक्टर सुनील कुमार कालखंडे ने कहा कि चाहे जितना समय लगे, चाहे जितनी गहराई के साथ छानबीन करनी पड़े, पुलिस अपराधियों को पकड़ने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है.
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