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मालवीय नगर हादसे के बाद क्यों चर्चा में हैं दिल्ली के 'लाल डोरा' इलाके? अंग्रेजों से है कनेक्शन

Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में लगी आग ने 21 लोगों की जान ले ली. लापरवाही और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच एक शब्द जो अचानक से सुर्खियों में आ गया है, वो है 'लाल डोरा'. आखिर क्या है ये 'लाल डोरा' इलाके और कैसे इनके तार मालवीय नगर हादसे से जुड़े हैं?

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4 जून 2026 (पब्लिश्ड: 11:32 AM IST)
Delhi Lal Dora Areas
मालवीय नगर कांड के बाद चर्चा में लाल डोरा इलाके (फोटो- PTI)
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दिल्ली के चर्चित मालवीय नगर इलाके में बने एक होटल में आग लगी. 21 जिंदगियां मौत के मुंह में समां गईं. मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे. किसी ने कहा होटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे. तो किसी ने कहा बिना प्लानिंग बेतरतीब शहरीकरण इस हादसे का जिम्मेदार है. मगर इन सब चर्चाओं के बीच एक शब्द सरकारी फाइलों से निकल कर अचानक ही सुर्खियों में आ गया. वो शब्द है 'लाल डोरा' इलाके.

अगर आप दिल्ली-एनसीआर में नहीं रहते तो दिल्ली का जिक्र आते ही आपके दिमाग में चौड़ी सड़कों, चमचमाती इमारतों और शहरी जिंदगी की चकाचौंध ही आती है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि उसी दिल्ली के अंदर एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जहां देश के आम कायदे-कानून और बिल्डिंग बाई-लॉज सीधे-सीधे दम तोड़ देते हैं. दिल्लीवाले इस दुनिया को 'लाल डोरा' इलाके का नाम देते हैं.

आज हम इसी लाल डोरा व्यवस्था का पूरा ताना-बाना, इतिहास और नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाले रवैये का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे. आइए, समझते हैं कि अंग्रेजों के जमाने का एक फैसला आज दिल्ली के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन चुका है.

'लाल डोरा' आखिर है क्या और ये दिल्ली में कहां-कहां है?

'लाल डोरा' के पूरे सिस्टम को समझना हो तो हमें इतिहास के पन्नों को पलटना पड़ेगा. बात साल 1908 की है. अंग्रेज हुक्मरान दिल्ली के राजस्य यानी रेवेन्यू रिकॉर्ड्स का दस्तावेजीकरण बोले तो डॉक्यूमेंटेशन कर रहे थे. उस वक्त दिल्ली के गांवों में दो तरह की जमीन थी. पहली जहां लोग रहते थे. और दूसरी वो जमीन, जिस पर खेती की जाती थी.

दोनों इलाकों के नक्शे पर अलग-अलग दिखाने के लिए लाल रंग से एक लकीर खींच दी गई. जो इलाके लाल घेरे के अंदर आए उन्हें नाम मिला- 'लाल डोरा'. ब्रिटिश हुकूमत ने तय किया कि इस लाल लकीर के अंदर यानी कि  'लाल डोरा' इलाके में जो आबादी रहेगी. उसे खेती की जमीन के सख्त कानूनों से राहत दी जाएगी. आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब ये था कि लाल डोरा के भीतर मकान बनाने के लिए किसी म्युनिसिपल अथॉरिटी या सरकारी दफ्तर से नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं थी.

फिर आया साल 1947. अंग्रेज गए, अंग्रेजी छोड़ गए और साथ ही साथ छोड़ गए 'लाल डोरा'  इलाके के लिए बने इस खास इंतजामों को भी. दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 507 के तहत इन इलाकों को भवन निर्माण के कड़े नियमों से छूट मिलती रही. आज की तारीख में पूरी दिल्ली में करीब 360 से ज्यादा गांव हैं, जो इसी लाल डोरा के दायरे में आते हैं.

वक्त का पहिया घूमा और ये इलाके दिल्ली के पॉश और मॉर्डन शहरी इलाकों के बीचों-बीच आ गए. लेकिन म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने इन्हें छेड़ा नहीं. 'लाल डोरा' इलाकों के लिए अंग्रेजों के जमाने वाले नियम इक्कीसवीं सदीं में भी जारी रहे.  

मालवीय नगर हादसा और 'लाल डोरा' पर उठते सवाल

अब बात करते हैं उस सबसे बड़े विवाद की जो मालवीय नगर के होटल में लगी आग के बाद भड़क उठा है. लाल डोरा इलाकों को नक्शा पास कराने और टैक्स से जो छूट मिली थी, वो वहां के मूल निवासियों को बसाने के लिए थी. लेकिन धीरे-धीरे इन इलाकों में अंधाधुंध और बेतरतीब कंस्ट्रक्शन होने लगा. पांच-पांच, छह-छह मंजिला इमारतें खड़ी हो गईं, वो भी बिना किसी सेफ्टी ऑडिट या सरकारी मंजूरी के.

आलम ये है कि मालवीय नगर के खिड़की एक्सटेंशन जैसे इलाके, जो लाल डोरा क्षेत्र के तहत आते हैं, वहां संकरी गलियों में कमर्शियल गोदाम, छोटी फैक्ट्रियां और रिहायशी इमारतें एक-दूसरे से बिल्कुल सटकर खड़ी हैं.

जब ऐसी जगहों पर आग लगती है, तो पूरी व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर ढह जाती है. पतली गलियों और अतिक्रमण की वजह से न तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर समय से पहुंच पाती हैं और न ही इमारतों में आपातकालीन निकास यानी एग्जिट गेट की कोई व्यवस्था होती है. बाकी इन इमारतों के अपने खुद के फायर सेफ्टी सिस्टम की तो बात ही मत कीजिए.

मालवीय नगर हादसे ने इसी कड़वे सच को एक बार फिर उजागर कर दिया है. यही वजह है कि अब अदालतें और शहरी नियोजक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि लाल डोरा इलाकों में सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि रिहायशी इलाकों के बीच चल रही मौत की फैक्ट्रियों को रोका जा सके.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: मालवीय नगर के होटल में 21 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?

सामान्य प्रश्न

लाल डोरा क्षेत्र क्या होता है?

सरल शब्दों में कहें तो ये दिल्ली के गांवों की वो जमीन है, जिसे साल 1908 में अंग्रेजों ने खेती की जमीन से अलग आबादी के रहने के लिए चिन्हित किया था. इस दायरे में आने वाली संपत्तियों को म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कड़े बिल्डिंग नियमों और नक्शा पास कराने की अनिवार्यता से कानूनी रूप से छूट मिली हुई है.

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद लाल डोरा की चर्चा क्यों हो रही है?

मालवीय नगर के पास स्थित लाल डोरा आबादी वाले संकरे रिहायशी इलाके में जब आग लगी, तो वहां नियमों की भारी अनदेखी सामने आई. बिना किसी फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के चल रही कमर्शियल गतिविधियों के कारण दमकल कर्मियों को राहत काम में भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे इन इलाकों के अनियंत्रित विकास पर दोबारा बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.

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