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शख्स की एक्सीडेंट में हुई थी मौत, घर में इकलौते कमाने वाले थे, 10 साल लग गए, अब मिला मुआवजा

दिल्ली फायर सर्विस में तैनात एक कर्मचारी के परिवार को मुआवजा मिलने में 10 साल लग गए. साल 2016 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी. अब घरवालों को ट्रिब्यूनल में जाकर मुआवजा मिला है.

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2016 road accident victim family receives compensationn
2016 में एक सड़क दुर्घटना में DFS कर्मचारी की मौत हुई थी. (सांकेतिक तस्वीर)
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शुभम कुमार
11 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 11 फ़रवरी 2026, 10:42 AM IST)
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दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के एक कर्मचारी के परिवार को 10 साल बाद मुआवजा मिला है. मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 82.86 लाख रुपये मुआवजे की रकम मुकर्रर की है. साल 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान DFS कर्मचारी की जान चली गई थी.

लॉ ट्रेंड की रिपोर्ट के मुताबिक़, विनीत सहरावत (34 साल) का 27 फरवरी 2016 को हरियाणा के भिवानी ज़िले में एक्सीडेंट हुआ था. गगड़वास गांव के पास विनीत अपनी बाइक से कहीं जा रहे थे, तभी हरियाणा रोडवेज की एक बस ने उन्हें टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि उनकी मौत हो गई. 

अब मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पाया कि ये दुर्घटना रैश ड्राइविंग के चलते हुई थी. ट्रिब्यूनल ने कहा कि विनीत अपने परिवार में कमाने वाले इकलौते शख्स थे. और इसलिए ट्रिब्यूनल ने उनकी अकाल मौत के बाद मोटर व्हीकल एक्ट के तहत उनके परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया है. सबूतों और चश्मदीद के बयान को ध्यान में रखते हुए ट्रिब्यूनल में प्रीसाइडिंग ऑफिसर ऋचा मनचंदा ने कहा, 

विनीत सहरावत एक सरकारी कर्मचारी भी थे. उनके परिजन उनके ऊपर ही निर्भर थे, इसलिए भविष्य की जरूरतों के लिए उन्हें ये रकम दी जानी चाहिए. 

ट्रिब्यूनल ने विनीत के परिजन की भविष्य की ज़रूरतों के लिए कुल 82.86 लाख रुपये का मुआवज़ा तय किया है. हरियाणा रोडवेज की जिस बस से दुर्घटना हुई थी, उसका एक्सीडेंट के समय बीमा (थर्ड पार्टी बीमा) था. इसीलिए कोर्ट ने बीमा कंपनी को मृतक के परिवार को मुआवजे की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है.

ये भी पढ़ें: सड़क हादसे में घायल शख्स की जान बचाई तो सरकार कितना इनाम देगी?

MACT कोर्ट क्या है?

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) की शुरुआत की गई थी. ये सड़क हादसों से जुड़े मामलों में पीड़ितों या उनके परिवार को मुआवजा जल्दी दिलाने में मदद करता है. अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं. इसकी सुनवाई दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (DHJS) से जुड़े जुडिशियल ऑफिसर करते हैं. ये ट्रिब्यूनल हाई कोर्ट के डायरेक्ट सुपरविशन में आता है. 

वीडियो: लैम्बोर्गिनी दुर्घटना के आरोपी शिवम मिश्रा के वकील ने क्या बताया?

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