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‘सड़क मुसलमानों के लिए नहीं’ लिखने पर जेल गईं लड़कियां रिहा, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत

दिल्ली–देहरादून हाईवे पर ‘ये सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है’ लिखने वाली लड़कियों को जमानत मिल गई है. इसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया.

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Delhi Dehradun Highway
दिल्ली–देहरादून हाईवे पर 'विवादित बयान' लिखने वाली युवतियां रिहा हुई. (फोटो- इंडिया टुडे)
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राहुल कुमार
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15 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 07:36 PM IST)
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सहारनपुर में दिल्ली–देहरादून हाईवे पर ‘ये सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है’ लिखती लड़कियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें दो लड़कियां सुलेखा और शारदा शामिल थीं. वहीं एक युवक जितेंद्र राघव भी गिरफ्तार हुआ था. अब कोर्ट ने इन तीनों को जमानत दे दी है. अदालत से राहत मिलने के बाद तीनों आरोपियों को जिला जेल से रिहा कर दिया. इसके बाद हिंदू रक्षा दल के उनके साथियों ने फूल-माला पहनाकर उनका स्वागत किया.

इंडिया टुडे से जुड़े राहुल कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार, 14 मार्च को कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दी. बेल मिलने के बाद जैसे ही तीनों जेल से बाहर आए, 'हिंदू रक्षा दल' से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारेबाजी भी की. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

मामला क्या है

ये घटना सहारनपुर के थाना बिहारीगढ़ इलाके का है. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दो महिलाओं को दीवार पर कुछ लिखते हुए देखा गया. महिलाओं ने दीवार पर लिखा था कि "यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है". दोनों महिलाओं का संबंध ‘हिंदू रक्षा दल’ से बताया गया.

बाद में संबंधित दल की अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने भी पुष्टि की कि उन महिलाओं का संबंध उनके दल से है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के एक कर्मचारी की शिकायत के बाद थाना बिहारीगढ़ ने मामले का संज्ञान लिया और कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 353 (2) के तहत FIR दर्ज की थी. साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और सड़क पर लिखे गए शब्दों को हटा दिया. 

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बाद में 'शांति व्यवस्था भंग' करने के आरोप में दो युवतियों और एक युवक को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने तीनों आरोपियों को SDM कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों को जमानत दे दी. जमानत आदेश मिलने के बाद उन्हें जिला जेल से रिहा कर दिया गया.

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