दिल्ली में पानी को तरसे लोग, बिना नहाए ऑफिस जाने को मजबूर, यहां तो काला पानी आ रहा
दक्षिण दिल्ली के दक्षिणपुरी के रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले लगभग दो महीनों से पीने, नहाने, कपड़े धोने और शौचालय तक के लिए भी पानी की ठीक-ठाक सप्लाई नहीं हुई है.

सुबह के 10 बजे की चटकती धूप है. दक्षिणी दिल्ली का इलाका. लोग अपने काम पर जा रहे हैं. पांच फुट चौड़ी तंग गली बाइकों, साइकिलों, झाड़ुओं और सीढ़ियों से भरी है. इन सबके बीच लोगों का ध्यान खींचती हैं, दर्जनों खाली बाल्टियां. पानी की बोतलें और नीले प्लास्टिक के डिब्बे. इनमें पानी नहीं है. इनमें पानी का इंतजार है, जिससे लोगों की प्यास बुझेगी. नहाने-धोने से लेकर खाना बनाने तक का जरूरी काम होगा. तापमान धीरे-धीरे 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है, लेकिन ये खाली बर्तन यहां के लोगों की ‘प्यास के प्रतीक’ बनकर खड़े रह जाते हैं. उन्हें पानी नहीं मिलता.
ये हाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का है. दक्षिण दिल्ली के दक्षिणपुरी के रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले लगभग दो महीनों से पीने, नहाने, कपड़े धोने और शौचालय तक के लिए भी पानी की ठीक-ठाक सप्लाई नहीं हुई है. इंडिया टुडे से जुड़े आशुतोष मिश्रा की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणीपुरी में, खासतौर पर ब्लॉक 10-11 के आसपास के इलाकों में सैकड़ों निवासी पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं. निवासियों का कहना है कि एक महीने से भी ज्यादा समय से ये संकट है. घरों के नल सूख चुके हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है.
यहां के निवासियों का यह भी दावा है कि पानी के टैंकर आते तो हैं, लेकिन उनमें से कई प्राइवेट टैंकर होते हैं. वो एक बार की सप्लाई के लिए 1,500 रुपये तक वसूलते हैं. एक महिला बताती हैं कि उनके पति बिना नहाए ऑफिस चले गए. पानी नहीं है, इस वजह से गुजारा मुश्किल हो रहा है. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात बेहद खराब हैं. इस संकट से परेशान होकर यहां रहने वाले लोगों ने हाल ही में विरोध प्रदर्शन भी किया. सड़क भी जाम की, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ. प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
पानी की मांग में उछाललगातार बढ़ती गर्मी ने दिल्ली में पानी के संकट को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है. दिल्ली में तापमान 45°C के पार पहुंच जाने के कारण पानी की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. हालांकि दिल्ली सरकार का दावा है कि किसी भी इलाके में पानी की कमी नहीं होगी. जहां भी जरूरत होगी, वहां टैंकर से पानी भेजा जाएगा. लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आती है.
दिल्ली के जिन इलाकों को पानी की किल्लत वाला इलाका माना जाता है, वो हैं, संगम विहार, दक्षिणपुरी, अंबेडकर नगर, खानपुर, तिगरी, मदनगीर, तुगलकाबाद एक्सटेंशन, कालकाजी के कुछ हिस्से और बदरपुर बॉर्डर के पास की कॉलोनियां.
स्थानीय लोगों का कहना है कि महीने भर से पानी का संकट है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है. इलाके के कुछ घरों में पानी के नए कनेक्शन भी लगे हैं. उन घरों में जो पानी आता है वो नाले के पानी-सा काला या बदबूदार है. इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने इलाके के एक घर में आ रहे सप्लाई के पानी का रिएलिटी चेक भी किया. उन्होंने देखा कि पानी का रंग बेहद काला था और बदबू इतनी कि घर में खड़ा होना मुश्किल था. संकट से जूझ रहे इन परिवारों के बच्चे कंधों पर डिब्बे उठाकर दूर से पानी भरकर लाते हैं.
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