The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Dalit man ordered to clean police station for bail Supreme Court slams Odisha High Court

दलित को जमानत के बदले थाने की सफाई करने को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को अब खूब सुनाया

Supreme Court Order: जमानत की शर्त के तौर पर Odisha High Court ने कुमेश्वर नाइक नाम के एक आदमी को 'दो महीने तक हर सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच काशीपुर पुलिस स्टेशन की सफाई करने का आदेश दिया. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो हाई कोर्ट को जमकर खरी-खरी सुनाई गई.

Advertisement
pic
pic
मौ. जिशान
| अनीषा माथुर
5 मई 2026 (अपडेटेड: 5 मई 2026, 11:19 AM IST)
Supreme Court, Odisha High Court, bail conditions, caste-based bail terms, Dalits, Tribals, district judiciary, police stations, suo motu cognisance, compliance report, vendanta group, untouchability
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत शर्त को रद्द कर दिया.
Quick AI Highlights
Click here to view more

भारतीय संविधान ने देश में छुआछूत को खत्म किया. दलित और आदिवासियों ने सदियों तक इस दंश को झेला है. जब भी देश में कहीं छुआछूत की घटना होती है, तो अदालत की तरफ आस भरी निगाह से देखा जाता है. अब अदालत पर ही दलितों और आदिवासियों की 'बेइज्जती' करने का आरोप लग रहा है. आरोप यह है कि ओडिशा हाई कोर्ट और राज्य की जिला अदालतों ने जमानत पर रिहाई की शर्त के तौर पर दलितों और आदिवासियों को पुलिस स्टेशन की सफाई करने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर ध्यान दिया और ओडिशा हाई कोर्ट और जिला अदालतों की कड़ी आलोचना की.

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया. सोमवार, 4 मई को सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह ऐसे आदेशों से 'गहराई से निराश' और 'हतोत्साहित' है.

इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ओडिशा ज्यूडिशियरी के 'बुरी, अपमानजनक और भारी जमानत शर्तें' लगाने के तरीके को 'पूरी तरह से नामंजूर' करता है. बेंच ने कहा कि ऐसी शर्तें आरोपी की इज्जत पर चोट करती हैं और दोषी मानने पर आधारित होती हैं.

मामला क्या है?

मामला ओडिशा का है, जहां वेदांता ग्रुप ने बॉक्साइट की खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू किया. स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. यह विरोध हिंसक हो गया. आरोप है कि दलित और आदिवासी समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने वेदांता के कर्मचारियों पर कुल्हाड़ी से हमला किया. इस मामले में करीब 40 लोगों को गिफ्तार किया गया. कुछ को ओडिशा हाई कोर्ट से जमानत मिली, तो कुछ जिला अदालतों से जमानत लेकर रिहा हो गए.

विवाद इनकी जमानत की शर्तों पर है. आर्टिकल 14 की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 मई 2025 को ओडिशा हाई कोर्ट ने जमानत की शर्त के तौर पर कुमेश्वर नाइक नाम के एक आदमी को 'दो महीने तक हर सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच काशीपुर पुलिस स्टेशन की सफाई करने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इन शर्तों को रद्द कर दिया और जमानत दे दी. कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को उसके आदेश का पालन करने की रिपोर्ट चार हफ्ते में देने के लिए कहा है.

यह भी पढ़ें: विधवा महिला को ससुर से मिलेगा गुजारा भत्ता, लेकिन ये शर्तें पूरी होनी चाहिए

रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 और जनवरी 2026 के बीच ऐसे आठ ऑर्डर पास किए गए. इनमें से सात रायगढ़ जिले की कोर्ट ने पास किए थे, जबकि एक हाई कोर्ट ने पास किया था. आठ मामलों में से छह दलित समुदाय के थे और दो आदिवासी थे.

वीडियो: मुंबई में तरबूज से नहीं हुई परिवार की मौत, FDA की रिपोर्ट में क्या पता चला?

Advertisement

Advertisement

()