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होटलरूम में थे पति-पत्नी, स्टाफ मास्टर की से अंदर घुस गया, कोर्ट ने 10 लाख का जुर्माना ठोका

Udaipur Leela Hotel privacy Case: स्टाफ मेंबर की हरकत से नाराज महिला ने होटल के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दायर कर दी. अब इस मामले को प्राइवेसी का उल्लंघन करार देते हुए अदालत ने लीला पैलेस होटल को महिला को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है. साथ ही कमरे का किराया ब्याज समेत वापस करने के लिए कहा है.

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Udaipur Leela Hotel privacy Case
महिला के कमरे में मास्टर की से हाउसकीपिंग स्टाफ ने की थी एंट्री. (Unsplash)
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रितिका
7 जनवरी 2026 (Updated: 8 जनवरी 2026, 03:33 PM IST)
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Udaipur Leela Hotel privacy Case: उदयपुर के सबसे फेमस लग्जरी होटल लीला पैलेस (Leela Palace) पर प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए एक कंज्यूमर कोर्ट ने 10 लाख रुपये का मुआवजा ठोका है. मामला एक महिला की निजता से जुड़ा है. उसने लीला पैलेस होटल में एक कमरा बुक किया था. बताया जा रहा है कि होटल के एक हाउसकीपिंग स्टाफ मेंबर ने महिला की अनुमति के बिना होटल रूम में मास्टर की (Master Key) की मदद से एंट्री ली थी. इस दौरान महिला अपने पति के साथ वॉशरूम में थी.

स्टाफ मेंबर की हरकत से नाराज महिला ने होटल के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दायर कर दी. अब इस मामले को प्राइवेसी का उल्लंघन करार देते हुए अदालत ने लीला पैलेस होटल को महिला को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है. साथ ही कमरे का किराया ब्याज समेत वापस करने के लिए कहा है. 

ये फैसला चेन्नई (नॉर्थ) की जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दिया है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता चेन्नई की रहने वाली है और पेशे से वकील है. उसने 26 जनवरी 2025 के लिए होटल में एक लेक व्यू रूम 55,500 रुपये में बुक किया था. महिला का आरोप था कि जब वह और उसका पति वॉशरूम में थे, तब एक हाउसकीपिंग स्टाफ ने मास्टर की से उनके कमरे में एंट्री की थी. महिला का कहना था कि वॉशरूम का दरवाजा टूटा होने की वजह से उनकी निजता का उल्लंघन हुआ था. इस घटना से उन्हें मानसिक तनाव भी हुआ.

महिला ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसकी शिकायत होटल से की, तो उन्होंने ऐसी किसी भी गलती से इनकार कर दिया. साथ ही कहा कि स्टाफ ने होटल के तय नियमों के अनुसार ही काम किया. होटल ने कहा कि उनके स्टाफ को ट्रेनिंग की जाती है, कि वे दरवाजें की घंटी बजाएं. अपना नाम बताएं और जवाब न मिले तो थोड़ा इंतजार करें, फिर ही अंदर जाएं. 

होटल का दावा था कि दरवाजे पर कोई ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ साइन नहीं था. ना ही गेट के अंदर डबल लॉक लगा था. रिपोर्ट के मुताबिक, जब स्टाफ को वॉशरूम के इस्तेमाल का पता लगा, तो वो तुरंत वहां से चला गया. बाद में होटल की तरफ से माफी के लेटर दिए गए थे.

हालांकि अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया. कोर्ट ने पाया कि बिना सही जांच के स्टाफ को मास्टर चाबी का इस्तेमाल करके एंट्री करने की अनुमति देना एक गंभीर चूक है. अगर स्टाफ को अंदर से आवाज सुनाई नहीं दी थी, तो भी उन्हें मास्टर की का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए था. रिसेप्शन डेस्क को फोन कर पूछना चाहिए था कि गेस्ट अभी भी कमरे में है या नहीं.

कोर्ट ने ये भी कहा कि होटल के खुद के बयान में भी ये माना गया कि स्टाफ घंटी बजाने के तुरंत बाद मास्टर की से कमरे में चला गया था. इस तरह की एंट्री गलत और सुरक्षित नहीं है. खासकर तब जब कमरे में कोई हो. कंज्यूमर कोर्ट ने साफ कहा कि अगर होटल मैनेजमेंट संबंधी नियमों का सख्ती से पालन किया होता, तो ये घटना टाली जा सकती थी.

वीडियो: अंकिता भंडारी मर्डर केस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?

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