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एक्सीडेंट के बाद कंपनी से मुआवजा मांगने गया, कोर्ट ने भारी जुर्माना क्यों लगा दिया?

उसने कोर्ट से यह भी छुपाया कि उसे बीमा कंपनी से 3 लाख रुपये मिल चुके हैं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और उसके वकील दोनों जानते थे कि कार अब उनके पास नहीं है. बावजूद इसके उन्होंने जानबूझकर अदालत का समय बर्बाद किया गया.

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Consumer Court Imposed Costs of 40,000 For Filing Fake Complaint For Compensation Of Sold Car
कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया. (फाइल फोटो- PTI)
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रिदम कुमार
23 जून 2025 (Updated: 25 जून 2025, 07:16 AM IST)
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कार का मुआवज़ा लेने के लिए शख्स कोर्ट पहुंचा था. कोर्ट ने मुआवज़ा देने के बजाए उस पर ही 40 हज़ार रुपये का जुर्माना ठोक दिया. क्योंकि पता ये चला कि जिस कार के लिए शख्स मुआवजा मांगने गया था, उसे वो पहले ही बेच चुका था. कोर्ट ने कहा कि एक बार कार बेचने के बाद उस पर खरीदने वाले का अधिकार होता है. बेचने वाले का नहीं. कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी और जुर्माना भी लगाया.

बार एंड बेंच की ख़बर के मुताबिक, कोर्ट के बताया गया कि शिकायतकर्ता ने जनवरी 2025 में Trigent Corporate नाम की कंपनी को अपनी क्षतिग्रस्त कार बेच दी थी. लेकिन फिर भी वह Hyundai से मुआवज़े या फ्री रिपेयर की मांग करता रहा.

उसने कोर्ट से यह भी छुपाया कि उसे बीमा कंपनी से 3 लाख रुपये मिल चुके हैं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और उसके वकील दोनों जानते थे कि कार अब उनके पास नहीं है. बावजूद इसके उन्होंने जानबूझकर अदालत का समय बर्बाद किया.

कोर्ट ने कहा कि शिकायत को गलत इरादों से दायर किया गया. साथ ही कोर्ट ने कहा, 

“कोई भी संपत्ति एक बार बेच दी जाए, तो उस पर केवल खरीदार का अधिकार होता है, न कि बेचने वाले का.”

कोर्ट ने केस को खारिज करते हुए 40,000 रुपये कंज़्यूमर वेलफेयर फंड में जमा करने का आदेश दिया. अगर रकम 30 दिन में जमा नहीं की गई तो उस पर 10% सालाना ब्याज़ लगाया जाएगा.

शिकायतकर्ता ने 5.22 लाख रुपये में Hyundai की कार खरीदी थी. 14,880 रुपये में कार की एक्सटेंडेड वारंटी भी ली. अक्टूबर 2024 में कार के ब्रेक फेल हुए और फिर बोनट में आग लग गई. कंपनी ने जांच में पाया कि यह मैकेनिकल ख़राबी थी जो वारंटी में कवर हो सकती थी. लेकिन शिकायतकर्ता ने कार 88,000 रुपये में बेच दी और इंश्योरेंस कंपनी से तीन लाख रुपये ले लिए. 

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