ऑपरेशन सिंदूर में 'सेना की आवाज' बनी थीं, कर्नल सोफिया कुरैशी को राष्ट्रपति ये मेडल देंगी
Col Sophia Qureshi: विशिष्ट सेवा मेडल उन अधिकारियों को दिया जाता है, जिन्होंने गैर-युद्ध भूमिकाओं में रहते हुए भी सेना की कार्यक्षमता और तैयारियों को मज़बूत किया हो.
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पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की मीडिया ब्रीफिंग देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जाएगा. 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों के 70 कर्मियों को गैलेंट्री अवॉर्ड यानी वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने की मंज़ूरी दी है. इनमें 6 पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए हैं. इसके अलावा सशस्त्र बलों और अन्य कर्मियों को 301 सैन्य अलंकरण से सम्मानित करने की भी मंज़ूरी दी है. सैन्य अलंकरण सम्मान के तहत मिलने वाले विशिष्ट सेवा मेडल में 135 लोगों के साथ कर्नल सोफ़िया कुरैशी का नाम भी शामिल है.
विशिष्ट सेवा मेडल उन अधिकारियों को दिया जाता है, जिन्होंने गैर-युद्ध भूमिकाओं में रहते हुए भी सेना की कार्यक्षमता और तैयारियों को मज़बूत किया हो. ये सम्मान सेना में लंबे समय तक दी गई विशिष्ट सेवा, नेतृत्व और अहम जिम्मेदारियों के लिए दिया जाता है.
अब आपको कर्नल सोफ़िया कुरैशी के बारे में बताते हैं.
कर्नल सोफ़िया कुरैशी को देश भर में पहचान तब मिली, जब उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से प्रेस को सैन्य कार्यवाई की जानकारी दी थी. इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी. प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उनका शांत रवैया, सधी हुई भाषा और पेशेवर अंदाज़ लोगों को खूब पसंद आया था.
कर्नल सोफ़िया कुरैशी भारतीय सेना के कोर ऑफ़ सिग्नल्स से जुड़ी हैं. महज़ 35 साल की उम्र में उन्होंने कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं. मार्च 2016 में वो एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना के दल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं. ये अभ्यास एक्सरसाइज़ फोर्स 18 था, जिसे भारत में अब तक का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास माना जाता है. कर्नल कुरैशी ने 2001 में संसद हमले के बाद हुए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान पंजाब बॉर्डर पर भी अहम भूमिका निभाई थी.
इसके अलावा अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय सेना का एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आईं. उन्होंने विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ मिलकर ऑपरेशन से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.
70 सशस्त्र बल कर्मियों को गैलेंट्री अवॉर्डबता दें कि जिन 70 सशस्त्र बल कर्मियों को गैलेंट्री अवॉर्ड देने एलान हुआ है, इनमें 1 अशोक चक्र, 3 कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (जिसमें 1 मरणोपरांत), 1 बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (जिसमें 5 मरणोपरांत), 6 नौसेना मेडल (वीरता), 2 वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं.
इसके अलावा अन्य कर्मियों को भी कुल 301 सैन्य सम्मान देने की मंज़ूरी दी गई है. इनमें 30 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 56 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 9 युद्ध सेवा मेडल, 2 बार टू सेना मेडल (विशिष्ट सेवा), 43 सेना मेडल (विशिष्ट सेवा), 8 नौसेना मेडल (विशिष्ट सेवा), 14 वायुसेना मेडल (विशिष्ट सेवा), 135 विशिष्ट सेवा मेडल और 2 BRDB मेडल शामिल हैं. BRDB मतलब Border Roads Development Board.
कई सैनिकों को ‘मेंशन इन डिस्पैचेज़’ से भी सम्मानित किया जाएगा है. ये सम्मान उन जवानों को मिले हैं, जिन्होंने ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफ़ाज़त, ऑपरेशन ऑर्किड और ऑपरेशन मेघदूत जैसे अभियानों के साथ-साथ राहत, बचाव और मेडिकल इवैकुएशन मिशनों में भूमिका निभाई थी.
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया. गणतंत्र दिवस आयोजन के दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंडियन एयर फोर्स अधिकारी से अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु शुक्ला को ‘अशोक चक्र’ प्रदान किया गया. वे जून 2025 में नासा के प्राइवेट स्पेसफ्लाइट मिशन, एक्सिओम मिशन 4 का हिस्सा थे और इंटरनेशल स्पेस स्टेशन का दौरा करने वाले पहले भारतीय थे.
कार्यक्रम के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को सिंबॉलिक तौर पर ‘अशोक चक्र’ दिया गया है. ये सभी 70 गैलेंट्री अवॉर्ड और 301 सैन्य अलंकरण सम्मान राष्ट्रपति भवन में औपचारिक रूप से आयोजित होने वाले समारोह में दिए जाएंगे.
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