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कॉलेज ड्रॉपआउट बेटा मम्मी के साथ मिलकर चला रहा था 4200 फर्जी अकाउंट, असली खेल और भी बड़ा

मोहम्मद उजैफ अपनी मां शबाना अब्दुल बारी के साथ मिलकर कथित तौर पर 4,200 से ज्यादा फर्जी खातों को ऑपरेट कर रहा था. बेंगलुरु पुलिस की एक स्पेशल टीम ने दोनों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया है.

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College dropout son and his mother cyber fraud bengaluru
बेंगलुरु से साइबर क्राइम का एक बेहद बड़ा मामला सामने आया है. (unsplash.com)
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आनंद कुमार
15 जनवरी 2026 (Updated: 15 जनवरी 2026, 11:48 PM IST)
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बेंगलुरु से बीकॉम ड्रॉपआउट 22 साल के एक नौजवान ने जल्दी अमीर बनने की हसरत में करोड़ों के साइबर स्कैम को अंजाम दिया. और इस स्कैम में राजदार बनी उसकी मां. दुबई बैठे एक सरगना के लिए हजारों फर्जी बैंक खातों को ऑपरेट करके दोनों मां-बेटे सालाना 25 लाख से ज्यादा रुपये कमा रहे थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद उजैफ अपनी मां शबाना अब्दुल बारी के साथ मिलकर कथित तौर पर 4,200 से ज्यादा फर्जी खातों को ऑपरेट कर रहा था. बेंगलुरु पुलिस की एक स्पेशल टीम ने दोनों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया है. 

पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी मां-बेटे ने साइबर फ्रॉड से जुटाए गए 24 करोड़ रुपये फर्जी खातों के जरिए खपाए हैं. पुलिस ने आगे बताया कि एक कॉलेज ड्रॉपआउट युवक से शुरू हुआ यह खेल हजारों खातों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक विशाल नेटवर्क में बदल गया.

बेंगलुरु पुलिस की स्पेशल टीम ने उजैफ के नेटवर्क से जुड़े नौ युवकों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. इन लोगों पर कथित तौर पर उजैफ को फर्जी खातों के मैनेजमेंट, उनसे जुड़े डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर एटीएम से कैश निकालने और कार्ड्स को दुबई भेजने में मदद करने का आरोप है. जांच टीम के मुताबिक उजैफ और उसकी मां समेत 11 आरोपी मिलकर 9,000 से ज्यादा फर्जी खाते चला रहे थे, जिनमें 240 करोड़ रुपये के लेनदेन को फ्रीज कर दिया गया है.

बेंगलुरु सिटी के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने टीओआई को बताया कि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक यह गैंग देश भर में कम से कम 864 साइबर क्राइम के मामलों से जुड़ा हुआ है. ये लोग दुबई के जिस सरगना के लिए काम करते थे, उसकी पहचान प्रेम तनेजा के तौर पर हुई है. प्रेम एक कुख्यात सट्टेबाज है जिसे मुंबई पुलिस ने 2013 के आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार किया था. फिलहाल वह फरार चल रहा है.

बेंगलुरु पुलिस ने इस गैंग से 242 डेबिट कार्ड, 58 मोबाइल फोन, 531 ग्राम सोने के आभूषण, 4.9 लाख रुपये कैश, नौ घड़ियां, 33 चेकबुक, 21 पासबुक, एक डिजिटल पेमेंट रिंग और एक क्रिप्टोकरेंसी बुक भी जब्त की है. इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के डिप्टी पुलिस कमिश्नर एम नारायण ने बताया,

 पुलिस को नवंबर में पता चला कि उजैफ और उसकी मां सरकारी अस्पतालों, खासकर लेबर वार्ड और कॉलेजों में जाकर लोगों को 2 हजार से 5 हजार रुपये के कमीशन पर बैंक अकाउंट खोलने के लिए राजी करते थे.

उजैफ खुद को बिजनेसमैन बताता था जो टैक्स बचाने के लिए दूसरों के नाम पर अकाउंट खोल रहा है. लोगों से पासबुक, ATM कार्ड और चेक बुक लेने के बाद दोनों दिल्ली में बैठे अपने साथियों को भेज देते थे.

कोविड के बाद साइबर फ्रॉड की ओर मुड़ा

कोविड-19 महामारी के दौरान उजैफ के पिता का निधन हो गया था. गृहस्थी का भार उसके कंधे आ गया. वह ऑनलाइन गेमिंग का एक्सपर्ट था. शुरुआत में उसने एक गेमिंग ऐप को ब्लॉक करवाने के लिए नेगेटिव कमेंट्स पोस्ट करके 20 हजार रुपये कमाए थे. फिर वह इस काम में जुटा रहा. बाद में ऐप हैंडल करने वाले लोगों ने उससे संपर्क किया और बताया कि अगर बड़ी कमाई चाहिए तो प्रेम तनेजा के साथ काम करो. उन्होंने ही तनेजा के साथ उसकी एक ऑनलाइन मीटिंग फिक्स करवाई. उजैफ अप्रैल 2021 में पहली बार प्रेम तनेजा के संपर्क में आया था. तब से ही वो उसके साथ काम कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, उजैफ ने दुबई जाकर कम से कम दर्जन बार तनेजा से मुलाकात की.

महंगे जूते और घड़ियों पर खूब पैसे खर्चे

जांच टीम के मुताबिक उजैफ लार्जर दैन लाइफ जीवन जीता था. उसके पास से 1 लाख रुपये के जूते और 9 रिस्ट वॉच बरामद हुई हैं, जिनमें से दो घड़ियां लगभग 15 लाख रुपये की हैं. एक अनुमान के मुताबिक उजैफ इन अवैध खातों के संचालन से कम से कम 25 लाख रुपये सालाना कमाता था.

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