CJI सूर्यकांत ने बेरोजगारों को 'कॉकरोच' बताया, कहा- 'यही लोग मीडिया-एक्टिविस्ट बन जाते हैं'
बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताने वाला चीफ जस्टिस सूर्यकांत का ये कॉमेंट एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें वह अपने आपको सीनियर एडवोकेट घोषित करने की मांग कर रहा था.

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उन युवाओं को ‘तिलचट्टा’ यानी ‘कॉकरोच’ बताया है, जिनके पास नौकरी नहीं है. जो बेरोजगार हैं. उनकी इस टिप्पणी को फ्रैंज काफ्का की कहानी ‘मेटामॉर्फोसिस’ के कैरेक्टर ग्रेगर साम्सा से जोड़ने की जरूरत नहीं है, जो एक सुबह उठकर देखता है कि वह कॉकरोच बन गया है. उसके पास तो सेल्समैन की नौकरी थी.
बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताने वाला चीफ जस्टिस सूर्यकांत का ये कॉमेंट एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें वह अपने आपको सीनियर एडवोकेट घोषित करने की मांग कर रहा था.
वकील ने कोर्ट में अपनी इस मांग को लेकर ऐसी ‘आक्रामक’ और जोरदार अपील की कि CJI नाराज हो गए. उन्होंने वकील को लगभग फटकारते हुए कहा कि क्या सीनियर एडवोकेट का दर्जा सिर्फ सजाकर रखने वाला स्टेटस सिंबल है? इसके बाद इस बहस ने ऐसा मोड़ लिया कि बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ बन गए.
जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ बैठी बेंच में शामिल CJI सूर्यकांत ने कहा,
कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.
कॉकरोच के बारे में बता दें कि ये एक तरह का कीड़ा है जो पूरी दुनिया में पाया जाता है. नमी और गंदगी वाली जगहों पर रहता है. कहते हैं कि महीने भर बिना खाना-पानी के रह सकता है. यानी वह किसी भी परिस्थिति में जिंदा रह लेते हैं.
CJI ने आगे कहा कि ये 'परजीवी' (parasites) समाज का हिस्सा हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं. समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी लोग हैं. क्या आप (वकील) भी उनके साथ मिलकर सिस्टम के खिलाफ खड़ा होना चाहते हैं?
सीनियर वकील बनाने की मांग की थीअपील करने वाले दिल्ली के वकील ने ‘सीनियर एडवोकेट’ बनाए जाने की प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को अदालत में चुनौती दी थी. उन्होंने मांग की थी उन्हें भी सीनियर वकील का दर्जा दिया जाए. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को ये बात ऐसी नागवार गुजरी कि उन्होंने ये तक कह दिया कि दुनिया में कोई भी सीनियर एडवोकेट बनने के लायक हो सकता है, लेकिन कम से कम वो (अपीलकर्ता वकील) इसके हकदार नहीं हैं.
बेंच ने साफ कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा योग्यता के सम्मान के तौर पर दिया जाता है, न कि किसी स्टेटस सिंबल की तरह. क्या यह किसी ऐसे व्यक्ति का व्यवहार है जो सीनियर एडवोकेट बनना चाहता है? बेंच ने वकील के रवैये और उसके कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स पर भी नाराजगी जताई. कहा कि अगर दिल्ली हाईकोर्ट उन्हें सीनियर एडवोकेट बना भी देगा तो सुप्रीम कोर्ट उसके इस फैसले को रद्द कर देगा.
कैसे बनते हैं सीनियर वकील?कानून से जुड़ी जानकारियां देने वाली वेबसाइट लॉ चक्र के मुताबिक, सीनियर एडवोकेट का दर्जा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों, एडवोकेट्स एक्ट की धारा 16 और सुप्रीम कोर्ट की 2017 गाइडलाइंस के तहत दिया जाता है. यह सम्मान उन वकीलों को मिलता है जिनकी अदालत में अच्छी-खासी प्रतिष्ठा हो. कानून की जबर्दस्त जानकारी हो और जिनका रिकॉर्ड मजबूत हो. आमतौर पर यह दर्जा एक स्थायी समिति की सिफारिश के आधार पर दिया जाता है. किसी व्यक्ति के सीधे मांग करने पर उसे सीनियर एडवोकेट नहीं बनाया जाता.
बेंच ने अपीलकर्ता वकील को फटकारते हुए कहा कि उसकी प्राथमिकता ठीक जगह पर नहीं है. क्या उसके पास दूसरे केस नहीं हैं, जिस पर वह ध्यान दे सके?
CJI सूर्यकांत के रोष की आंच अन्य वकीलों तक भी पहुंची. CJI ने कहा कि वो सोच रहे हैं कि काले कोट पहने कई वकीलों की डिग्री की जांच सीबीआई (CBI) से कराएं क्योंकि उन्हें उनकी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है. उन्हें इस बात का शक है कि कुछ लोगों ने वकालत की अपनी डिग्रियां आखिर हासिल कैसे कीं?
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