जंगल में तेंदू के पत्ते बीनते थे, अब फॉरेस्ट ऑफिसर हैं, अजय की कहानी इंस्पायर करती है
Chhattisgarh youth inspiring story: अजय गुप्ता छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार अपनी रोजी-रोटी के लिए तेंदू के पत्ते और महुआ इकट्ठा करने पर निर्भर था. फिर उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) की तैयारी की और 91वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की.

छत्तीसगढ़ के संबलपुरी गांव में अजय गुप्ता का नाम सिर्फ एक शख्स का नाम नहीं है. यह गांव और समुदाय के लोगों के लिए गर्व करने की एक वजह बन गया है. अजय ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) की परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की. अजय ने सिर्फ IFS ही नहीं, बल्कि इसी साल सिविल सर्विसेज परीक्षा भी 452वीं रैंक के साथ पास की है. जंगल की सेवा करने वाले अफसर की परीक्षा पास करना इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि अजय ने इन्हीं जंगलों में परिवार के साथ तेंदू के पत्ते इकट्ठा करते हुए बचपन गुजारा है. छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने भी उन्हें इसी बात की बधाई दी है कि जहां वो तेंदू के पत्ते बीनते थे, अब उसी जंगल की रक्षा करेंगे.
कौन हैं अजय?अजय गुप्ता छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार रोजी-रोटी के लिए तेंदू के पत्ते और महुआ इकट्ठा करने के काम पर निर्भर था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अजय ने अपना बचपन परिवार के साथ जंगल से छोटी-मोटी वन उपज इकट्ठा करने में बिताया था. इस इलाके में आज भी कई परिवारों की आजीविका का यही प्रमुख साधन है. घर में पैसों की तंगी के बावजूद अजय ने पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने 10वीं कक्षा में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल किए.
इसके बाद अजय रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में पढ़ाई करने पहुंचे. स्कॉलरशिप की मदद से तीन साल तक वह बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख पाए. TOI से बातचीत में उन्होंने कहा,
NIT में आने के बाद ही मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने सपने को और आगे बढ़ा सकता हूं.
अजय ने बताया कि जंगलों से उनका जुड़ाव ही करियर चुनने में सबसे अहम वजह बना. उन्होंने कहा,
जंगल ने मुझे सब कुछ दिया है. रोजी-रोटी. पहचान और अब बदले में कुछ लौटाने का एक मकसद भी.
उन्होंने आगे कहा कि बस्तर में ग्रामीण विकास से जुड़े कामों के दौरान मिले अनुभव ने वन सेवा में शामिल होने के उनके फैसले को और मजबूत किया. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अजय गुप्ता को बधाई दी. उन्होंने कहा कि उनकी सफलता जंगलों पर निर्भर परिवारों के आत्मविश्वास को दर्शाती है. मुख्यमंत्री ने कहा,
यह गर्व की बात है कि एक ऐसा युवा, जो कभी तेंदू के पत्ते इकट्ठा करता था, अब उन्हीं जंगलों की रक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा.
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अजय की यह उपलब्धि दूरदराज के जंगली इलाकों में रहने वाले लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है. अजय की शिक्षा में सरकारी स्कॉलरशिप योजनाओं ने भी अहम भूमिका निभाई. माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस फेडरेशन और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना से मिली आर्थिक मदद ने उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में काफी सहायता दी.
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