छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी 'चूहा' बनकर कलेक्ट्रेट ऑफिस क्यों पहुंच गए?
Chhattisgarh congress paddy protest: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने BJP सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने 'चूहे की बारात' निकाली, चूहे की वेशभूषा पहनी.
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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने ‘चूहों की बारात’ निकाल दी. दरअसल, यह विपक्ष का राज्य की विष्णु देव साव सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन था. इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता बाराती बने. कुछ ने चूहे की कॉस्टयूम पहनी और ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी की. इतना ही नहीं, जब कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्होंने SDM को एक ज्ञापन भी सौंपा साथ ही एक पिंजरे में बंद चूहा भी दिया.
मगर ये सब क्यों? वजह है करोड़ों रुपये का धान गोदाम से गायब होना. इंडिया टुडे के पत्रकार रघुनन्दन पांडा की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये के धान गायब होने के मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदर्शन किया. इसका नेतृत्व दुर्ग ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने किया. उन्होंने दावा किया कि कवर्धा जिले में लगभग 7 करोड़ रुपये और महासमुंद जिले में करीब 5 करोड़ रुपये की कीमत का धान सरकारी गोदामों से गायब हुआ है.
उन्होंने कहा,
“ये कोई सामान्य नुकसान नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित घोटाला है. अगर चूहे ही इसके जिम्मेदार हैं, तो गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई.”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया कि गोदामों में रखा धान चूहे खा गए. जबकि करोड़ों रुपये के धान का गायब होना बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय लापरवाही की तरफ इशारा करता है. विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार के पास अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत है, तो वे स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने से क्यों बच रही है. पार्टी ने ये भी आरोप लगाया कि विपक्ष के बयानों पर तुरंत जांच एजेंसियां सक्रिय हो जाती है. लेकिन इतने बड़े घोटाले पर उन्होंने भी चुप्पी साधी हुई है. कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर यदि छत्तीसगढ़ सरकार धान गायब होने के मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाती, तो आंदोलन को प्रदेशभर में तेज किया जाएगा.
महासमुंद में धान सूख गयाइंडिया टुडे से जुड़े अरविंद की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शासकीय धान संग्रहण केंद्र से लगभग 19 लाख का 81621 क्विंटल धान गायब हो गया है. बताया जा रहा है कि धान में कमी सुख जाने की वजह से आई है. जिले में पांच अलग-अलग जगह धान रखने के लिए संग्रहण केंद्र बने हुए हैं. ये हैं- महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली. इन केंद्रों में लगभग 22 लाख 88 हजार क्विंटल धान रखा गया था. मगर बाद में जब इस धान का भौतिक सत्यापन किया गया, तो सभी पांचों संग्रहण केंद्र से करीब-करीब 81 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया.
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